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रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का न्योता लेकर आडवाणी-जोशी के द्वार पर VHP, कहा – अयोध्या आने का प्रयास करेंगे: चंपत राय ने उम्र का दिया था तकाजा

इससे पहले 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के अध्यक्ष चंपत राय ने कहा था कि आडवाणी जी का होना अनिवार्य है और वो ये भी कहेंगे कि वो कृपया न आएँ।

राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा में शामिल होने के लिए पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और भाजपा के पूर्व अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी को VHP (विश्व हिन्दू परिषद) के नेताओं ने उनके आवास पर पहुँच कर न्योता दिया है। इसकी तस्वीर भी सामने आई है, जिसमें संगठन के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार वयोवृद्ध भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को निमंत्रण पत्र सौंप रहे हैं। आडवाणी और जोशी राम मंदिर आंदोलन में दशकों तक सक्रिय रहे हैं और मुखर होकर इस आंदोलन का नेतृत्व किया है।

VHP ने जानकारी दी है कि दोनों वयोवृद्ध नेताओं ने आश्वासन दिया है कि वो 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में आयोजित राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में आने का पूरा प्रयास करेंगे। इससे पहले ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के अध्यक्ष चंपत राय ने कहा था कि आडवाणी जी का होना अनिवार्य है और वो ये भी कहेंगे कि वो कृपया न आएँ। उन्होंने पत्रकारों से पूछा था कि आपने आडवाणी जी को देखा है या नहीं, उनकी उम्र तक आप पहुँच भी पाएँगे या नहीं।

बता दें कि लालकृष्ण आडवाणी 96 वर्ष के हो चले हैं। नब्बे के दशक में रथ यात्रा निकाल कर उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन को नई दिशा दी थी और बिहार में लालू यादव सरकार द्वारा उनकी गिरफ़्तारी कराना देश भर में चर्चा का विषय बना था। चंपत राय ने कहा था कि मुरली मनोहर जोशी से उनकी बात हुई है और वो फोन पर उन्हें यही कहते रहे कि आप मत आइए, लेकिन वो लगातार ज़िद करते रहे – मैं आऊँगा। बकौल चंपत राय, डॉ जोशी के साथ उनसे अच्छे संबंध शायद ही किसी के होंगे।

हालाँकि, अब VHP ने साफ़ कर दिया है कि लालकृष्ण आडवाणी और डॉ मुरली मनोहर जोशी को निमंत्रण पत्र दिया गया है और दोनों कार्यक्रम में आने का प्रयास भी करेंगे। जबकि चंपत राय ने कहा कि उन्होंने बार-बार डॉ जोशी से निवेदन किया कि वो न आएँ, क्योंकि उनकी उम्र हो गई है, ठंड बहुत होगी और उनके घुटने की सर्जरी हुई है। उन्होंने राम मंदिर के भूमिपूजन का उदाहरण दिया, जब उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम कल्याण सिंह कार्यक्रम में आने की ज़िद करने लगे थे, उन्हें हाँ-हाँ कर के भरोसे में रखा गया, फिर अंतिम दिन मना कर दिया गया उनके स्वास्थ्य को देखते हुए।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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