वाराणसी में राड़ा होना तय: SP जुटा शालिनी यादव को मनाने में, नामांकन वापस न लेने से बढ़ीं तेज बहादुर की मुश्किलें

यदि शालिनी यादव अपना नामांकन वापस नहीं लेती हैं, तो तेज बहादुर के साथ ही SP की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। शालिनी का टिकट काटना एक तरह से महिलाओं का अपमान भी है, वो भी तब, जबकि पूर्वांचल में वैसे ही बहुत कम महिलाएँ मैदान में हैं।

किसी भी शर्त पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हराने की मशक्कत में जुटे SP और कॉन्ग्रेस की माथापच्ची के कारण वाराणसी लोकसभा सीट पर हर दिन नया मनोरंजन देखने को मिल रहा है। एक ओर जहाँ SP द्वारा सेना में मिलने वाली पीली दाल का वीडियो बनाने से चर्चा में आए BSF से बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव को टिकट दिए जाने के बाद मीडिया उनके समर्थन में माहौल बनाने में जुटा है, वहीं SP अभी अंदरूनी समस्याओं से ही जूझती नजर आ रही है।

आसान काम नहीं है शालिनी यादव को मनाना

BSF के पूर्व जवान तेज बहादुर के लिए समाजवादी पार्टी (SP) ने जिस शालिनी यादव का टिकट काटा है, वो पूर्वांचल के बड़े राजनीतिक घराने से संबंध रखती हैं। शालिनी यादव अब भी PM नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र वाराणसी से उम्मीदवार हैं क्योंकि उन्होंने अभी तक अपना नामांकन वापस नहीं लिया है। माना जा रहा है कि शालिनी यादव का अपना जनाधार है, इसलिए SP के नए उम्मीदवार और BSF के बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। शायद इसीलिए पार्टी अब शालिनी को मनाने में जुटी हुई है।

शालिनी यादव पूर्वांचल में कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता रहे श्यामलाल यादव की बहू हैं। श्यामलाल यादव 1984 में कॉन्ग्रेस के टिकट पर वाराणसी से लोकसभा सदस्य चुने गए थे। वो राज्यसभा के उप सभापति रहे थे। श्यामलाल 1957 से 1962 और 1967 से 1968 तक UP विधानसभा के सदस्य और केंद्रीय कृषि मंत्री भी रह चुके हैं। कुल मिलाकर शालिनी यादव बनारस के एक बड़े कॉन्ग्रेस परिवार से ताल्लुक रखती हैं। सबसे मजेदार बात यह है कि वो 22 अप्रैल को ही कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देकर SP में शामिल हुई थीं। ऐसे में उन्हें मनाना SP के लिए टेढ़ी खीर साबित हो सकता है।

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शालिनी ने वाराणसी के मेयर पद का चुनाव लड़ा था और उन्हें सवा लाख वोट मिले थे। हालाँकि, वो हार गई थीं। वो बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में ग्रेजुएट हैं। नामांकन वापसी के मामले पर शालिनी यादव की नाराजगी SP की परेशानी बढ़ा रही है।

यदि शालिनी यादव अपना नामांकन वापस नहीं लेती हैं, तो तेज बहादुर के साथ ही SP की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। शालिनी का टिकट काटना एक तरह से महिलाओं का अपमान भी है, वो भी तब, जबकि पूर्वांचल में वैसे ही बहुत कम महिलाएँ मैदान में हैं।

शालिनी यादव ने अभी अपना नामांकन वापस नहीं लिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनका कहना है कि अगर अखिलेश यादव कहेंगे, तो वह अपना नामांकन वापस ले लेंगी। साथ ही, उन्होंने कहा है कि अगर पार्टी की तरफ से नहीं कहा जाएगा तो वो ऐसा नहीं करेंगी और चुनाव लड़ेंगी। इस पूरे प्रकरण में BJP का कोई नुकसान नहीं है, लेकिन SP का वोट प्रतिशत जरूर कम हो सकता है। इसका कारण यह है कि शालिनी यादव तेज बहादुर के मुकाबले एक गंभीर प्रत्याशी हैं।

बता दें कि BSF से बर्खास्त तेज बहादुर ने सोमवार को नामांकन के अंतिम दिन समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर पर्चा दाखिल किया है। जबकि, वो पहले ही निर्दलीय तौर पर भी नामांकन कर चुके थे।

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