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राम मंदिर फैसले पर पुनर्विचार याचिका का उमर खालिद कनेक्शन, आतंकी संगठन SIMI से भी है रिश्ता

सिमी जैसे संगठन से लेकर मुस्लिम बहुल इलाके से लोकसभा चुनाव लड़ चुके कासिम अब ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में हैं और जमात-ए-इस्लामी हिंद की केन्द्रीय समिति के एक सक्रिय सदस्य के रूप में...

अयोध्या मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जन्मभूमि पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर करने का निश्चय किया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक जिस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुस्लिम पक्ष ने यह ऐलान किया, उसमें उमर खालिद के पिता और एक समय सिमी (जो बाद में आतंकवादी संगठन घोषित हुआ) का हिस्सा रहे सय्यद सैयद कासिम रसूल इलियास मीडिया को संबोधित कर रहे थे। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कासिम ने अयोध्या में सुप्रीम कोर्ट द्वारा राम मंदिर फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर करने की बात कही है।

उमर खालिद के पिता सैयद कासिम रसूल इलियास एक ज़माने में सिमी का हिस्सा रहे थे लेकिन 1985 में इस संगठन से खुद को अलग कर लिया। इसके बाद वे वेलफेयर पार्टी ऑफ़ इंडिया के टिकट पर पश्चिम बंगाल से चुनाव भी लड़ चुके हैं। उन्होंने मुर्शिदाबाद की एक मुस्लिम बहुल इलाके वाली जंगीपुर सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था।

सिमी जैसे संगठन से लेकर मुस्लिम बहुल इलाके से लोकसभा चुनाव लड़ चुके कासिम अब ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में हैं और जमात-ए-इस्लामी हिंद की केन्द्रीय समिति के एक सक्रिय सदस्य के रूप में जाने जाते हैं। साथ ही बाबरी मस्जिद को-आर्डिनेशन कमिटी के संयोजक भी रह चुके हैं।

वहीं कासिम के बेटे उमर खालिद खुद को एक नास्तिक कहते हैं। हालाँकि खालिद की छवि तैयार करने का श्रेय मुख्यधारा की मीडिया को जाता है, जिसने उसे समाज के सामने एक कट्टर नास्तिक वामपंथी का जामा पहनाया है। जबकि खालिद ने उस वक़्त इस्लामिक चरमपंथ के आगे घुटने टेक दिए थे जब कमलेश तिवारी की हत्या में जिहादियों के शामिल होने की बात सामने आई थी। ऐसा इसलिए भी हो सकता है क्योंकि खालिद चाहते ही नहीं कि उनके इस्लामिक समाज में फैली व्यापक असहिष्णुता पर कभी भी कोई चर्चा हो।

गैर-मु##मान को झूठ बोलकर फँसाने के इस कदम को तक़िया भी कहा जाता है जोकि इस्लाम की धार्मिक मान्यताओं के अनुकूल है। इसके तहत मजहब विशेष का एक शख्स दूसरे मजहब के व्यक्ति को भरोसे में लेकर यह जताता है कि वह दरअसल इस्लाम में विश्वास नहीं रखता।

बता दें कि अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में मस्जिद बनाने के लिए अलग ज़मीन देने की बात कही है। इसी निर्णय के साथ जन्मभूमि पर एक भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए रास्ता साफ हो गया था। मगर आज की मुस्लिम संगठनों की बैठक के बाद उन्होंने यह दावा किया है कि वह इस मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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