अमेरिका के इलिनोइस प्रांत में 700 पादरियों पर यौन शोषण का आरोप; अटॉर्नी जनरल ने किया खुलासा

रोमन कैथोलिक चर्च के मुखिया पोप फ्रांसिस ने भी ये स्वीकार किया था कि यौन शोषण और आर्थिक अनियमितताआें के आरोपों से घिरे कैथोलिक चर्च से लोग दूर होते जा रहे हैं। पोप ने कहा था कि यौन शोषण के मामलों से निपटने में चर्च सफल नहीं हो पाया है।

अमेरिका के इलिलोईस प्रांत में करीब 700 पादरियों पर बच्चों के यौन शोषण का आरोप लगा है। इलिनोइस के अटॉर्नी जनरल ने अपनी एक रिपोर्ट में इस बात पर चिंता जताई है कि चर्च इन आरोपों से निपटने में अक्षम रहा है। ज्ञात हो कि चर्च ने यौन शोसन के आरोपित पादरियों की संख्या 185 बताई थी लेकिन अटॉर्नी जनरल लीसा मैडिगन के अनुसार ऐसे पादरियों की संख्या इस से कहीं बहुत ज्यादा है। अटॉर्नी जनरल की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने अपनी जांच में पाया कि चर्च ने इन आरोपों की या तो अच्छे से जाँच नहीं की या फिर इस तरफ ध्यान ही नहीं दिया। अपने रिपोर्ट में मैडिगन ने कहा;

“चूंकि मैं यह जानता हूँ कि चर्च ने बहुतों बार पादरियों द्वारा यौन शोषण के पीड़ितों को नजरअंदाज किया है, मैं अपनी जांच में पाए गए निष्कर्षों को सामने रखना चाहता हूँ। हालांकि ये निष्कर्ष प्रारंभिक हैं लेकिन ये इस जाँच को जारी रखने की जरूरत को दर्शाते हैं।”

बता दें कि मैडिगनने ये जांच अगस्त में ही शुरू की थी और इसके बाद से वो कई बिशप्स, पादरियों, पीड़ितों और चर्च से जुड़े लोगों से बात कर चुकी है। अपनी रिपोर्ट में उन्होंने आगे कहा है;

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“इन यौन शोषण के आरोपों की जांच ना करने का फैसला लेकर चर्च अपने नैतिक दायित्वों का निर्वहन करने में असमर्थ रहा है। चर्च पीड़ितों, चर्च जाने वाले लोगों और आम जनों को ऐसी यौन शोषण की घटनाओं का पूर्ण और सही हिसाब देने में विफल रहा है जिसमे पद्द्रियों की संलिप्तता हो। जांच करने में असमर्थ रहना यह भी बताता है कि कैथोलिक चर्च ने ये जानने का कभी प्रयास ही नहीं किया कि पादरियों के ऐसे गलत व्यवहारों को नजरअंदाज किया गया या फिर उन्हें सीनियरों द्वारा ऐसी घटनाओं को गुप्त रखा गया।”

उन्होंने अपनी रिपोर्ट में अपनी जांच में पाए गए निष्कर्षों के हवाले से इस बात पर भी चिंता जताई कि अब चर्च अपनी निगरानी स्वयं नहीं कर सकता और अब ये उनका आतंरिक मुद्दा नहीं रहा। अटॉर्नी जनरल के ये खुलासे चौंका देने वाले हैं। उन्हें लोगों द्वारा अब तक तीन सौ से भी अधिक चिट्ठियाँ, मेल्स और सन्देश आ चुके हैं जिसमे चर्च के पादरियों की काली करतूतों के बारे में बताया गया है। ऐसे में इस बात पर भी गौर करना चाहिए कि जब ऐसे यौन शोषण के आरोपित पादरियों कि संख्या 700 थी तब चर्च का आंकडा इतना कम यानी 185 कैसे था? क्या बचे हुए 500 पादरियों को बचाने की कोशिश की गई और पीड़ितों के आरोपों को पूरी तरह से नजरंदाज कर दिया गया?

अटॉर्नी जनरल के कार्यालय का यह भी कहना है कि आरोपों की जांच अधूरी रही और कई मामलों में कानून का पालन नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि बाल कल्याण संस्थाओं को सूचना भी नहीं दी गई

वहीं भारत में भी पादरियों पर बच्चों और महिलाओं के यौन शोषण के आरोप अक्सर लगते रहे हैं। यहाँ भी कई चर्च इन आरोपों के घेरे में हैं और उन पर अक्सर पीड़ितों के आरोपों पर गौर नहीं करने का आरोप लगता रहा है। इसी साल जून में केरल के कोट्टयम से एक चर्च में पांच पादरियों द्वारा एक विवाहित महिला का कई साल से यौन शोषण किए जाने की घटना सामने आई थी। पीड़ित महिला और उनके पति ने चर्च पर गंभीर आरोप लगाये थे और कहा था कि चर्च से जुड़े कुछ नामी-गिरामी लोगों ने महिला पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया था।

वहीं केरल में ही एक नन ने पंजाब के जालंधर स्थित डायोसीस कैथलिक चर्च के बिशप के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी और आरोप लगाया था कि कि बिशप ने 2014 के बाद से उसका 14 बार यौन उत्पीड़न किया। यही नहीं, पादरी के काले करतूतों का भंडाफोड़ करने के लिए उस नन को काफी विरोध का भी सामना करना पड़ा और केरल के विधायक पीसी जॉर्ज ने तो उसे वेश्या तक बता दिया था। विधायक ने कहा था;

“इस बात में किसी को शक नहीं है कि नन वेश्या है। 12 बार उसने एंजॉय किया तो 13वीं बार यह रेप कैसे हो गया?”

ऐसे बयानों से यह साफ़ हो जाता है कि चर्च और पादरियों को मिल रहे सत्ता संरक्षण के कारण पीड़ित उनके खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं करा पाते और अगर उन्होंने आवाज उठाई भी तो उन्हें खासा परेशानी का सामना करना पड़ता है।

उधर जर्मनी में भी एक बड़े खुलासे के अनुसार 1946 से 2014 के बीच कैथोलिक चर्च के 1,670 अधिकारियों ने 3,677 नाबालिगों का यौन शोषण किया था। जांचकर्ताओं ने जर्मनी के 27 डियोसेजे में 38,156 फाइलों का विश्लेषण किया जिसमें 1,670 अधिकारियों के मामले में नाबालिगों का यौन शोषण किए जाने के आरोपों का पता चला था।

रोमन कैथोलिक चर्च के मुखिया पोप फ्रांसिस ने भी ये स्वीकार किया था कि यौन शोषण और आर्थिक अनियमितताआें के आरोपों से घिरे कैथोलिक चर्च से लोग दूर होते जा रहे हैं। पोप ने कहा था कि यौन शोषण के मामलों से निपटने में चर्च सफल नहीं हो पाया है।

वहीं ‘मी टू’ अभियान के तहत एक 40 वर्षीय  महिला ने मेघालय में कैथोलिक चर्च के दो पादरियों पर वर्षो पहले यौन शोषण करने का आरोप लगाया था। एक फेसबुक पोस्ट के माध्यम से पीड़ित महिला ने कहा था कि वह तीन बार आत्महत्या का प्रयास भी कर चुकी हैं। उसने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा था;

“जब मैं पांच साल की थीं तभी से फ्रांसिस गेल ने मेरा यौन शोषण करना शुरू कर दिया था। मैंने जब अपने परिजनों को इस बारे में बताया तो उन्होंने मेरी ही पिटाई कर दी। 12 साल की उम्र तक यह सिलसिला जारी रहा। उसके बाद मैंने साहस करके और गर्भवती होने के डर से फ्रांसिस गेल (आरोपित पादरी) से मिलना बंद कर दिया।”

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