Tuesday, April 16, 2024
Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयचीन-Pak सहित 55 देशों का UNSC में भारत की अस्थायी सदस्यता को समर्थन

चीन-Pak सहित 55 देशों का UNSC में भारत की अस्थायी सदस्यता को समर्थन

इससे पहले 7 बार भारत यूएनएससी का अस्थायी सदस्य रह चुका है। 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92 और 2011-12 में भारत यह उपलब्धि हासिल कर चुका है।

एशिया पैसिफिक समूह के सभी 55 देशों ने 2021-22 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की अस्थायी सदस्यता का समर्थन किया है। इन 55 देशों में पाकिस्तान और चीन भी शामिल है। भारत अगर सदस्यता के लिए चुना जाता है तो यह सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्य के रूप में उसका आठवाँ कार्यकाल होगा क्योंकि इससे पहले 7 बार भारत यूएनएससी का अस्थायी सदस्य रह चुका है। 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92 और 2011-12 में भारत यह उपलब्धि हासिल कर चुका है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने एशिया पैसिफिक देशों का आभार जताया है। यूएनएससी में 15 अस्थायी सीटों के लिए अगले वर्ष जून में चुनाव होना है।

भारत ने हाल ही में कहा था कि संयुक्त राष्ट्र के अंतर्गत आने वाले अधिकतर देश सुरक्षा परिषद में स्थायी व अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने के पक्ष में हैं। सैयद अकबरुद्दीन ने एशिया पैसिफिक राष्ट्र समूह का उदाहरण देते हुए कहा था कि यहाँ 52 में से 2 देश अस्थायी सदस्यता के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। उन्होंने पश्चिमी यूरोपियन देशों का उदाहरण देते हुए कहा था कि वहाँ 25 देश 2 सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा में हैं। इसे जनसँख्या की दृष्टि से देखने की वकालत करते हुए अकबरुद्दीन ने बताया था कि 300 करोड़ से ज्यादा लोगों को सिर्फ़ 2 अस्थायी सीटें मिलेंगी, वो भी बस 2 वर्षों के लिए।

अकबरुद्दीन के अनुसार, दुनिया का कोई भी अन्य क्षेत्र प्रतिनिधित्व के मामले में इतना कमज़ोर नहीं है। बता दें कि संयुक्त राष्ट्र में 10 अस्थायी सदस्यों को क्षेत्र के आधार पर चुना जाता है। जैसे, 5 सीटें अफ़्रीकी और अमेरिकी देशों को, 1 पूर्वी यूरोप के देशों को, लैटिन अमेरिकी और कैरिबियन देशों के लिए 2 और 2 सीटें पश्चिमी यूरोप व अन्य देशों को दी जाती हैं। जो 5 स्थायी सदस्य हैं, वे हैं- अमेरिका, चीन, रूस, फ़्रांस और ब्रिटेन। अभी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 10 अस्थायी सदस्य हैं- बेल्जियम, Cote d’Ivoire, डोमिनिकन रिपब्लिक, एक्विटोरिअल गिनिया, जर्मनी, इंडोनेशिया, कुवैत, पेरू, पोलैंड और दक्षिण अफ्रीका।

भारत लम्बे समय से सुरक्षा परिषद में बदलाव की वकालत करता रहा है और माँग करता रहा है कि उसे यूएनएससी में स्थायी सदस्यता दी जाए। पूर्व केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर ने अपनी पुस्तक में इस बात का ज़िक्र किया था कि भारत को सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का ऑफर मिला था लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने ‘मित्र राष्ट्र’ चीन के लिए इस सीट को क़ुर्बान कर दिया। थरूर ने दावा किया था कि उन्होंने इससे सम्बंधित फाइलें संयुक्त राष्ट्र में देख रखी है। बता दें कि थरूर 1978 से ही संयुक्त राष्ट्र में विभिन्न पदों पर कार्यरत रहे हैं।

इन सबके बावजूद 55 देशों द्वारा अस्थायी सदस्यता के लिए भारत का समर्थन एशिया पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा का भी विषय है। हालाँकि, अस्थायी सदस्य सुरक्षा परिषद में वीटो का इस्तेमाल नहीं कर सकते। लेकिन, वे किसी मुद्दे को लेकर असहमति जता सकते हैं और अपनी राय रख सकते हैं। विशेषज्ञों ने पाकिस्तान द्वारा भारत का समर्थन करने को भी एक अच्छी शुरुआत बताया। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि पाकिस्तान अलग-थलग पड़ने के डर से मजबूरन ऐसा कर रहा है।

Special coverage by OpIndia on Ram Mandir in Ayodhya

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

सोई रही सरकार, संतों को पीट-पीटकर मार डाला: 4 साल बाद भी न्याय का इंतजार, उद्धव के अड़ंगे से लेकर CBI जाँच तक जानिए...

साल 2020 में पालघर में 400-500 लोगों की भीड़ ने एक अफवाह के चलते साधुओं की पीट-पीटकर निर्मम हत्या कर दी थी। इस मामले में मिशनरियों का हाथ होने का एंगल भी सामने आया था।

‘मोदी की गारंटी’ भी होगी पूरी: 2014 और 2019 में किए इन 10 बड़े वादों को मोदी सरकार ने किया पूरा, पढ़ें- क्यों जनता...

राम मंदिर के निर्माण और अनुच्छेद 370 को निरस्त करने से लेकर नागरिकता संशोधन अधिनियम को अधिसूचित करने तक, भाजपा सरकार को विपक्ष के लगातार कीचड़ उछालने के कारण पथरीली राह पर चलना पड़ा।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
282,677FollowersFollow
417,000SubscribersSubscribe