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2012 से 2021: हिंदुओं की दुखद दास्ताँ, जब 12 बार इस्लामी आतंकियों ने बांग्लादेश में बनाया इन्हें निशाना

धार्मिक उत्पीड़न और भेदभाव के कारण लगभग 11.3 मिलियन (1 करोड़ 13 लाख) हिंदू बांग्लादेश छोड़ चुके हैं। 2012 और 2013 में फरवरी और नवंबर के बीच...

हाल ही (18 मार्च) में बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के एक युवा द्वारा कथित तौर पर सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखने के बाद एक इस्लामी समूह के सैकड़ों समर्थकों द्वारा पूर्वोत्तर में स्थित सिलहट डिवीजन में हिंदुओं के 70-80 घरों पर बर्बतापूर्ण हमला करने का मामला सामने आया।

ढाका ट्रिब्यून अखबार के मुताबिक हिफाजत ए इस्लाम के नेता मामुनुल हक के हजारों अनुयायियों ने सिलहट डिवीजन के सुनामगंज जिले के शल्ला उप जिले में एक हिंदू गाँव पर हमला किया। बताया गया कि काशीपुर, नाचनी, चाँदीपुर और कुछ अन्य मुस्लिम बहुल गाँवों से हक के समर्थक, नवागाँव में एकत्र हुए और उन्होंने स्थानीय हिंदुओं के घरों पर डंडों और देसी हथियारों से हमला किया व 70 से 80 घर तोड़ डाले।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लगभग 70 से 80 हिंदुओं के घरों में तोड़फोड़ की गई थी, लेकिन एक स्थानीय पत्रकार ने दावा किया है कि कम से कम 500 हिंदू घरों में तोड़फोड़ की गई और उन्हें जला दिया गया । इसके अलावा इस्लामी चरमपंथियों ने 8 मंदिरों में भी तोड़फोड़ की। इस हमले को फेसबुक पर लाइव किया गया था।

अगले दिन (19 मार्च, शुक्रवार) कुछ उपद्रवियों ने बांग्लादेश के ठाकुरगाँव के रानीसंकल उपजिला के उत्तरगांव गाँव में स्थित एक मंदिर में काली माता की मूर्ति को भी तोड़ डाला।

पाकिस्तान की तरह बांग्लादेश में भी हिंदुओं पर कई बर्बरतापूर्ण हमले किए गए हैं। दशकों से बांग्लादेश में हिंदू समुदाय इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर रहे हैं और आज त​क उनके द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। इतना ही नहीं धार्मिक उत्पीड़न और भेदभाव के कारण लगभग 11.3 मिलियन (1 करोड़ 13 लाख) हिंदू 1964 और 2013 के बीच बांग्लादेश छोड़ चुके हैं।

बांग्लादेश में हिंदुओं की दुखद दास्तां 1947 के नरसंहार के साथ शुरू हुई थी। बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान यह और बढ़ गई थी, तब लगभग 30,00,000 हिंदू मारे गए थे। यह सदी के सबसे बड़े जनसंहारों में से एक था, जो आज तक जारी है।

साल 2012 और 2013 में फरवरी और नवंबर के बीच, चटगाँव में हठजारी और बशखाली, सतखीरा के कालीगंज, दिनाजपुर के चिरिरबंदर में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ कम से कम 20 हमले हुए।

हिंदुओं द्वारा 10वें आम चुनावों का बहिष्कार करने से इंकार करने के बाद 2014 में बांग्लादेश में बड़ी झड़पें हुई थीं। बांग्लादेश में मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद हिंदुओं को बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात-शिबिर के कार्यकर्ताओं का सामना करना पड़ा।

ठाकुरगाँव, दिनाजपुर, रंगपुर, बोगरा, लालमोनिरहाट, राजशाही, चटगाँव और जेसोर जैसे कई स्थानों पर हिंदू घरों को लूटा गया और बर्बरतापूर्वक जला दिया गया था।

इसी तरह 23 अक्टूबर, 2019 को बुरहानुद्दीन में पुलिस और स्थानीय मुसलमानों के बीच झड़प में 10 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे और चार लोगों की मौत हो गई थी। वहीं सैकड़ों पुलिसकर्मी मारे गए थे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस दौरान 12 हिंदू घरों और एक मंदिर में तोड़फोड़ भी की गई थी। एक हिंदू घर में भी आग लगा दी गई। एक मोटरसाइकिल को भी जला दिया गया था।

पिछले साल 2 नवंबर को कट्टरपंथी इस्लाम के एक समूह ने बांग्लादेश के कोमिला जिले में मुरादनगर उपजिला के अंतर्गत कोरबनपुर गांव में 10 हिंदू परिवारों पर हमला कर दिया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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