Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयइमरान ख़ान को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड, सिख चरमपंथ और खालिस्तानी समर्थकों का आयोजन

इमरान ख़ान को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड, सिख चरमपंथ और खालिस्तानी समर्थकों का आयोजन

सिख फेडरेशन यूके की जड़ें सिख चरमपंथ और खालिस्तान आंदोलन से जुड़ी हुई हैं। ISYF की स्थापना भिंडरवाले के भतीजे जसबीर सिंह रोडे ने की थी।

गुरु नानक देव की 550वीं जयंती के दौरान दो प्रमुख अलगाववादी ब्रिटिश सिख संगठनों ने लंदन के सिटी हॉल में करतारपुर गलियारे के लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट’ पुरस्कार से सम्मानित किया। द पीएम फॉर यूके एंड यूरोप में पाकिस्तान के पीएम फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट के प्रवक्ता साहिबज़ादा जहाँगीर ने गुरुवार (21 नवंबर) को इमरान ख़ान की ओर से यह पुरस्कार प्राप्त किया।

सिटी हॉल में कार्यक्रम का आयोजन सिख नेटवर्क, सिख फेडरेशन (यूके) और लंदन के मेयर सादिक ख़ान के सहयोग से लंदन विधानसभा के सदस्य डॉ ओंकार सहोता ने किया था। सिख फेडरेशन (यूके) को खालिस्तान का समर्थक कहा जाता है। इस कार्यक्रम में लेबर पार्टी की नेता प्रीत कौर गिल, डिप्टी मेयर डेबी वीकस-बर्नार्ड, सतपाल सिंह, जस सिंह, कैनन मार्क पॉल्सन और सिख समुदाय के लोग शामिल हुए।

साहिबज़ादा जहाँगीर ने पुरस्कार के लिए सिख समुदाय के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि करतारपुर गलियारा पाकिस्तान से शांति का संदेश है। इसके अलावा उन्होंने कहा, “करतारपुर कॉरिडोर ने सिखों के विचारों को संस्कृतियों और देशों के बीच एक पुल के रूप में सुदृढ़ किया।”

उन्होंने कहा कि यह इमरान ख़ान की सरकार के लिए गर्व की बात है कि करतारपुर कॉरिडोर का “अद्भुत कार्य” आठ महीनों की सबसे कम संभव अवधि में पूरा हुआ और यह सब इमरान ख़ान के प्यार, शांति और मानवता के लिए जुनून के कारण संभव हो सका।

ग़ौर करने वाली बात यह है कि सिख फेडरेशन यूके की जड़ें सिख चरमपंथ और खालिस्तान आंदोलन से जुड़ी हुई हैं। इसके अधिकांश वरिष्ठ सदस्य अंतरराष्ट्रीय सिख यूथ फेडरेशन (ISYF) के पूर्व सदस्य हैं, जिन्हें आतंकवाद विरोधी क़ानूनों के तहत ब्रिटेन में प्रतिबंधित कर दिया गया था। ISYF की स्थापना भिंडरवाले के भतीजे जसबीर सिंह रोडे ने की थी।

सिख नेटवर्क, दबिंदरजीत सिंह सिद्धू द्वारा स्थापित एक अन्य ब्रिटिश सिख समूह है, जो ब्रिटेन से मान्यता और समर्थन प्राप्त करने और क्षेत्रीय अखंडता के लिए भारत के अधिकार को हटाने के लिए सूचीबद्ध है। इसका प्रमुख एजेंडा भारत-विरोधी राजनीति को समर्थन देना है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

हैशटैग लगाओ, दुनिया बदलो… कितना आसान है न? क्या सोशल मीडिया लोकतंत्र को बर्बाद कर रहा है?

लोकतंत्र इंसान की कमियों को स्वीकार कर समझौतों से चलता है। लेकिन सोशल मीडिया का अनियंत्रित दौर हर छोटी कमी को भ्रष्टाचार बताकर लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट कर रहा है। कैसे आज का सोशल मीडिया और डिजिटल यूटोपियनवाद हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।
- विज्ञापन -