Friday, July 30, 2021
Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयनीरव मोदी के विशेषज्ञ गवाह काट्जू की लंदन की कोर्ट में फजीहत, जज ने...

नीरव मोदी के विशेषज्ञ गवाह काट्जू की लंदन की कोर्ट में फजीहत, जज ने ‘फर्जी दलीलों’ को बताया निजी अजेंडा

ब्रिटिश जज ने अपने आदेश में कहा, ऐसा कोई ठोस या भरोसेमंद सबूत नहीं है, कि भारत में न्यायपालिका अब स्वतंत्र नहीं है या एक निष्पक्ष सुनवाई करने में सक्षम नहीं है।

पीएनबी घोटाले में भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण को उचित बताते हुए लंदन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट (Westminster Magistrate Court, UK) के जिला जज सैम्यूल गूजी ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काट्जू की दलीलों को घोर असंवेदनशील बताया। काट्जू ने नीरव मोदी की पैरवी में भाजपा सरकार की तुलना हिटलर से करते हुए कहा था कि सरकार की नजर में नीरव मोदी यहूदी है और वह उसे सभी आर्थिक समस्याओं के लिए जिम्मेदार ठहराएगी।

ब्रिटेन की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि नीरव मोदी को अपने खिलाफ मामले में भारतीय अदालतों के समक्ष जवाब देना है और ऐसे कोई प्रमाण नहीं है कि जिससे संकेत मिलता हो कि भारत में उसके मामले की निष्पक्ष सुनवाई नहीं होगी। इसके साथ ही, जज ने भारत के सेवानिवृत जज अभय थिप्से और मार्कंडेय काट्जू की तरफ से भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के समर्थन में एक्सपर्ट के रूप में राय को पूरी तरह से खारिज कर दिया और मार्कंडेय काट्जू की गवाही पर भी सवाल खड़े किए।

काट्जू ने की नीरव मोदी की पैरवी

मार्कंडेय काटजू ने वेस्टमिंस्टर कोर्ट में एक्सपर्ट के रूप में नीरव मोदी के पक्ष में बाते कही थीं। उन्होंने कहा था कि भारत के ज्यूडिशियरी का अधिकांश हिस्सा भ्रष्ट है और जाँच एजेंसियाँ सरकार की ओर झुकाव रखती हैं, लिहाजा नीरव मोदी को भारत में निष्पक्ष सुनवाई का मौका नहीं मिलेगा। 

जज ने बयान को बताया गैर विश्वसनीय बताया 

यूके के जज गूजी ने न केवल काट्जू की टिप्पणी को अनुचित और हैरान करने वाला बताया बल्कि कहा कि मेरी नजर में उनकी राय निष्पक्ष और विश्वसनीय नहीं थी। न्यायाधीश ने कहा कि मार्कंडेय काट्जू ने भारतीय ज्यूडिशियरी में इतने ऊँचे ओहदे पद पर काम किया है, इसके बावजूद उनकी पहचान ऐसे मुखर आलोचक के रूप में रही है जिनका अपना एजेंडा होता है। मुझे उनके सबूत के साथ ही उनका व्यवहार भी सवालों के घेरे में लगा। डिस्ट्रिक्ट जज सैमुअल गूजी ने काटजू के गवाही की कड़ी निंदा की और इस साक्ष्य को ‘गैर निष्पक्ष और गैर विश्वसनीय’ करार दिया।

न्यायाधीश गूजी ने कहा, “अलबत्ता, कुछ राजनीतिक व्याख्यान को गलत सलाह करार दिया जा सकता है, मीडिया, ब्रॉडकास्टिंग व सोशल मीडिया लिंक, जो बचाव पक्ष की तरफ से बड़ी मात्रा में मेरे सामने पेश किये गए, में ऐसा कुछ भी नहीं जो यह संकेत दें कि मुकदमे की सुनवाई को प्रभावित करने के लिये राजनेता किसी तरह का दखल दे रहे हैं। एनडीएम (नीरव दीपक मोदी) के मुकदमे की तो छोड़िए, सुनवाई प्रक्रिया ऐसे किसी प्रभाव को लेकर अतिसंवेदनशील होगी।”

वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट के जज ने कहा, “मैं ऐसे किसी भी प्रतिवेदन को खारिज करता हूँ कि भारत सरकार ने जानबूझकर मीडिया में इसे इतना चर्चित किया है। मैं न्यायमूर्ति काट्जू की विशेषज्ञ राय को भी काफी कम तवज्जो देता हूँ।” ब्रिटिश जज ने अपने आदेश में कहा, ऐसा कोई ठोस या भरोसेमंद सबूत नहीं है, कि भारत में न्यायपालिका अब स्वतंत्र नहीं है या एक निष्पक्ष सुनवाई करने में सक्षम नहीं है।

‘भारतीय सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज का बर्ताव हैरान करने वाला’

नीरव मोदी के मामले पर मीडिया ट्रायल के प्रभाव के आलोचक होने के बावजूद वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत के न्यायाधीश ने इस बात पर हैरानी जताई कि खुद सुप्रीम कोर्ट के जज रह चुके काट्जू ने ब्रिटेन में कार्यवाही के दौरान दिए जाने वाले साक्ष्यों के संबंध में पत्रकारों को जानकारी देने का चौंकाने वाला फैसला लिया, मीडिया में अपना तूफान खड़ा किया और मीडिया के हितों को देखा।

गूजी ने बचाव पक्ष द्वारा पेश किए गए एक अन्य गवाह उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अभय थिप्से की भी आलोचना की जिन्होंने बचाव पक्ष के गवाह के तौर पर पेश होते हुए यह बताया था कि कैसे भारतीय अदालतों में यह मामला चलेगा। बता दें कि नीरव मोदी मामले में काट्जू पिछले साल एक विशेषज्ञ गवाह के तौर पर वेस्टमिंस्टर कोर्ट में पेश हुए थे।

गौरतलब है कि PNB घोटाले मामले में भगौड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी की याचिका को लंदन की अदालत ने गुरुवार (फरवरी 25, 2021) को ठुकराते हुए उसके भारत प्रत्यर्पित किए जाने को मंजूरी दे दी। अदालत ने फैसला सुनाते हुए भारत की न्यायपालिका को निष्पक्ष कहा।

वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट के जज सैमुअल गोजी ने कहा कि यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि नीरव मोदी को भारत में कई सवालों के जवाब देने हैं। उन्होंने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि अगर उन्हें प्रत्यर्पित किया गया तो उनके साथ न्याय नहीं होगा। 

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

विजय माल्या के किंगफिशर एयरलाइंस ने IDBI को डूबोए थे जितने पैसे, पाई-पाई ब्याज के साथ वसूल: मुनाफे में 318% का उछाल

कभी जिस IDBI को भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने डूबो दिया उस बैंक ने इस तिमाही में भारी मुनाफा कमाया है। वजह किंगफिशर एयरलाइंस से सारी वसूली बैंक ने कर ली है।

‘मनमोहन सिंह ने की थी मनमर्जी, मुसलमान स्पेशल क्लास नहीं’: सुप्रीम कोर्ट में सच्चर कमेटी की सिफारिशों को चुनौती

सुप्रीम कोर्ट में सच्चर कमेटी की सिफारिशों को लागू करने को चुनौती दी गई है। याचिका 'सनातन वैदिक धर्म' नामक संगठन के छह अनुयायियों ने दायर की है।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
111,994FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe