Friday, June 14, 2024
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इस्लामी देश मलेशिया में ‘रद्द’ हुए शरिया के 16 कानून, कट्टरपंथी भड़के: बोले- हमारी आँखों के सामने क्या-क्या हो रहा है

मलेशिया की सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला लेते हुए केलंतन राज्य में शरिया आधारित आपराधिक कानूनों को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह संघीय सरकार का अधिकार है। इस तरह के कानून उस पर अतिक्रमण करते हैं।

मलेशिया की सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला लेते हुए केलंतन राज्य में शरिया आधारित आपराधिक कानूनों को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह संघीय सरकार का अधिकार है और इस तरह के कानून उस पर अतिक्रमण करते हैं। इस फैसले के बाद मलेशिया में इस्लामी कट्टरपंथी नाराज हो रखे हैं।

जानकारी के मुताबिक, कोर्ट में यह केस 2022 में दो मुस्लिम महिलाओं की ओर से दायर किया गया था जिसपर सुनवाई करते हुए 9 फरवरी 2024 को नौ सदस्यीय संघीय न्यायालय ने 8-1 के बहुमत से फैसला सुनाया। फैसले में 16 कानूनों को अमान्य करार दिया गया।

इन कानूनों में कुकर्म, यौन उत्पीड़न, अनाचार और ‘क्रॉस ड्रेसिंग’ (विपरीत लिंग से संबंधित कपड़े पहनना) से लेकर झूठे सबूत देने तक के अपराधों के लिए दंड का प्रावधान किया गया था। कोर्ट ने इन कानूनों को रद्द करते हुए कहा कि इन (उक्त) विषयों के लिए इस्लामी कानून नहीं बना सकते, क्योंकि ये विषय मलेशियाई संघीय कानून के अंतर्गत आते हैं।

इस फैसले को सुनाते वक्त कोर्ट के बाहर सिक्योरिटी टाइट थी क्योंकि इस्लामी कट्टरपंथी इस केस के विरोध में पहले से थे। द स्ट्रेट टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि निर्णय आने के वक्त 1000 से अधिक कट्टरपंथी लोग पुतराज्य में कोर्ट के बाहर प्रदर्शन करने के लिए कोर्ट के बाहर थे। निर्णय आने के बाद वह सब नाराज हो गए।

उन्होंने कहा, “इस तरह का निर्णय इस्लामी मुल्क में नहीं लिया जाना चाहिए। ये हमारी आँखों के आगे हो रहा है। हम मुस्लिमों को लग रहा है कि हमें चुनौती दी जा रही है। अगर हमारे मुल्क में कानून नहीं होगा तो मुश्किल हो सकती है। देश मुश्किल में पड़ जाएगा।”

कुछ प्रदर्शनकारियों ने इस फैसले के लिए नेताओं को दोषी बताया। वहीं कुछ ने माँग की कि शरिया को वापस से वैसे ही राज्य में लागू किया जाए जैसे वो पहले था। उसमें कोई बदलाव न हो।

गौरतलब है कि मलेशिया में 1990 से कट्टरपंथी पैन मलेशियाई इस्लामिक पार्टी या PAS का राज है। वहाँ दो स्तरीय कानून प्रणाली चलती है। इसके तहत शरिया के तहत मुस्लिमों के व्यक्तिगत और पारिवारिक मामले आते हैं और साथ ही यहाँ सिविल कानून भी चलता है। जिस राज्य की अदालत ने इस फैसले को सुनाया है वहाँ की 97 फीसद आबादी मुस्लिमों की है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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