Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयपाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा में अज्ञात बंदूकधारियों ने 4 को उतारा मौत के घाट, इनमें...

पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा में अज्ञात बंदूकधारियों ने 4 को उतारा मौत के घाट, इनमें 2 सुरक्षाकर्मी: गाड़ियों पर ताबड़तोड़ गोलीबारी

घायलों की हालत गंभीर है और उनका अस्पताल की इंटेंसिव केयर यूनिट इलाज किया जा रहा है। बताते चलें कि ये इलाका सुन्नियों और शियाओं के बीच सांप्रदायिक हिंसा के लिए जाना जाता है।

पाकिस्तान के उत्तर पश्चिम खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में रविवार (7 जनवरी, 2024) को दो यात्री वाहनों पर गोलीबारी की गई। कुर्रम जिले सद्दा बाजार इलाके में हुए इस हमले में दो सुरक्षाकर्मियों सहित कम से कम चार लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए।

पुलिस और सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। अभी तक किसी भी समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। जिला पुलिस अधिकारी (DPO) मुहम्मद इमरान के मुताबिक बंदूकधारियों ने स्वचालित हथियारों से एक कार और एक यात्री कोच को निशाना बनाया।

हादसे के तुरंत बाद पुलिस, सुरक्षा बल और बचाव दल घटनास्थल पर पहुँचे। उन्होंने लाशों और घायलों को नजदीकी अस्पताल में पहुँचाया गया। पाराचिनार जिला मुख्यालय अस्पताल के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ कैसर अब्बास ने पुष्टि की कि घायल लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।

स्वास्थ्य अधिकारी के मुताबिक, घायलों की हालत गंभीर है और उनका अस्पताल की इंटेंसिव केयर यूनिट इलाज किया जा रहा है। बताते चलें कि ये इलाका सुन्नियों और शियाओं के बीच सांप्रदायिक हिंसा के लिए जाना जाता है।

इस हादसे के बाद तूरी बंगश की स्थानीय जनजातियों ने हमलों के बारे में रणनीति पर फैसला करने के लिए आपातकालीन बैठक बुलाई है। बताते चलें कि बीते महीने, गिलगित-बाल्टिस्तान के चिलास में एक यात्री बस पर आतंकवादी हमले में नौ लोग मारे गए थे और 25 घायल हो गए थे।

साल 2023 में सामान्य तौर पर पाकिस्तान में और खास तौर से खैबर पख्तूनख्वा में आतंकी वारदातों में खासा इजाफा हुआ है। इस प्रांत में 419 आतंकवादी हमले हुए। इनमें 620 लोग मारे गए थे। मरने वालों में 306 सुरक्षा बल के जवान, 222 नागरिक और 92 आतंकवादी शामिल थे।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?

मुस्लिमों को रिझाने में 2017 में औंधे मुँह गिरे थे अखिलेश, आरक्षण का वादा किया लेकिन घोषणापत्र खाली रहा: 2027 के चुनावी रण में...

मुस्लिम आरक्षण पर अखिलेश बयानों से लेकर मुलायम सिंह यादव की मुस्लिम राजनीति अपने पुराने ढर्रे पर रही है। हालाँकि अब यूपी में वोटर्स अपनी प्रथमिकताएँ बदल रहे हैं।
- विज्ञापन -