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रेप दोषियों को नपुंसक बनाने के लिए Pak संसद में बिल पारित, जमात-ए-इस्लामी के सांसद ने बताया- शरिया के खिलाफ

इस बिल के पारित होने के बाद से पाकिस्तान में कुछ संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। जमात-ए-इस्लामी के सांसद मुश्ताक अहमद ने इसे गैर-इस्लामी बताया और शरिया के विरुद्ध कहा है।

पाकिस्तान के इस्लामाबाद में बुधवार (नवंबर 17, 2021) को संसद के संयुक्त सत्र में बलात्कारियों को सजा देने के लिए एक बिल पारित किया गया। इस विधेयक में केमिकल के जरिए बलात्कारी को नपुंसक बनाने की सजा का उल्लेख है। आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक 2021 में पाकिस्तान दंड संहिता, 1860 और आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1898 में संशोधन करने की बात है।

इसमें लिखा है, “केमिकल कास्ट्रेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसे प्रधानमंत्री द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा विधिवत अधिसूचित किया जाता है। इससे एक व्यक्ति अपने जीवन में कभी भी संभोग करने में असमर्थ हो जाता है। इसे अदालत द्वारा दवाओं के माध्यम से निर्धारित किया जाता है। ये अधिसूचित मेडिकल बोर्ड द्वारा संचालित होता है।”

इस बिल के पारित होने के बाद से पाकिस्तान में कुछ संगठन विरोध कर रहे हैं। जमात-ए-इस्लामी के सांसद मुश्ताक अहमद ने इसे गैर-इस्लामी बताया और शरिया के विरुद्ध कहा। उनके मुताबिक बलात्कारी की सजा सरेआम लटकाए जाने की होनी चाहिए। नपुंसक बनाने का उल्लेख शरिया में नहीं मिलता।

बता दें कि पाकिस्तान में बलात्कारियों को सजा देने के लिए नए कानून पर विचार पिछले साल से हो रहा था। नवंबर 2020 में प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस कानून को बनाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इसके बाद खबरें आई थीं कि कैबिनेट की बैठक में पाकिस्तान के कानून मंत्रालय ने इस बिल का मसौदा पीएम के सामने पेश किया था।

उल्लेखनीय है कि साल 2018 में लाहौर में 7 साल की बच्ची की रेप के बाद हत्या और फिर लाहौर में ही मोटरवे गैंगरेप केस के बाद रेप के दोषियों को सख्त सजा देने की माँग उठ रही थी। पीटीआई सांसद फैसल जावेद खान ने दावा किया था कि नए कानून को जल्द ही पाकिस्तान की संसद में लाया जाएगा। अब उसी माँग को लेकर यह बिल पारित हुआ है।

मालूम हो कि केमिकल कास्ट्रेशन एक मेडिकल प्रक्रिया है। इसके तहत शख्स को ऐसा इंजेक्शन या दवाएँ दी जाती हैं जिससे उसकी यौन क्षमता खत्म हो जाती है ये इंजेक्शन व्यक्ति के हॉरमोन्स पर असर डालता है और वो किसी स्थिति में संभोग करने लायक नहीं बचता।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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