Wednesday, April 24, 2024
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PAK में प्रोफेसर जुनैद हाफिज को सजा-ए-मौत, फेसबुक पोस्ट के जरिए ईशनिंदा का था आरोप

जुनैद के परिवार और वकीलों को भी जान से मारने की धमकी दी गई। 2014 में उनके वकील को कार्यालय में घुसकर मारा गया था। अदालत ने कहा है कि दोषी को धारा 382-B CrPC का लाभ नहीं मिलेगा, क्योंकि पाकिस्तान के ईशनिंदा कानून में रहम की इजाजत नहीं है।

पाकिस्‍तान की एक जिला एवं सत्र अदालत ने मुल्‍तान की बहाउद्दीन जकारिया यूनिवर्सिटी के एक लेक्‍चरर को ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा सुनाई है। प्रोफेसर का नाम जुनैद हाफ‍िज है। जुनैद पंजाब प्रांत के मुल्तान शहर की यूनिवर्सिटी में इंग्लिश लिट्रेचर विभाग में बतौर अतिथि लेक्‍चरर के तौर पर कार्यरत थे। उन पर एक फेसबुक पोस्ट में ईश निंदा करने के आरोप में बीते 23 मार्च 2013 को मामला दर्ज हुआ था। लेकिन मामले की कार्रवाई साल 2014 में शुरू की गई। इसके बाद से ही वे जेल में हैं।

पाकिस्‍तानी मीडिया डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, अतिरिक्‍त सत्र न्‍यायाधीश काशिफ कयूम ने उन्हें यह सजा सुनाई। अदालत की ओर से आरोपित जुनैद हाफ‍िज पर 5 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। उन्हें ये सजा पाकिस्‍तान दंड संहिता की धारा- 295-C के तहत सुनाई गई।

इसके अलावा, अदालत ने जुनैद हाफ‍िज को कुछ अन्य धारों के तहत उम्रकैद एवं 1 लाख रुपए जुर्माने की सजा भी सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि सभी सजाएँ साथ चलेंगी और दोषी को धारा 382-B CrPC का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि पाकिस्तान के ईशनिंदा कानून में दोषी के लिए रहम की इजाजत नहीं है। इस मामले में अभियोक्ता की ओर से दावा किया गया कि जाँचकर्ताओं ने उनके लैपटॉप से ऐसी चीजें बरामद कीं, जो मजहब के ख़िलाफ़ है।

गौरतलब है कि पिछले 6 साल से पाकिस्तान की जेल में जीवन काट रहे जुनैद हाफिज का नाम बीते दिनों अमेरिका के धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) ने अपने वैश्विक पीड़ितों के डेटाबेस में शामिल किया था। इस दौरान आयोग ने स्पष्ट किया था कि जुनैद किस भयावह संकट में हैं और जेल में उनकी जान को किस हद तक खतरा है।

इसके अलावा यूएससीआईआरएफ ने उनके मामले में ये भी कहा था कि जुनैद के इतने लंबे मामले में अब आठवें जज की नियुक्ति हुई और अभियोजन कथित ईशनिंदा का एक भी सबूत नहीं पेश कर सका। इस दौरान जुनैद को भयावह मानसिक व शारीरिक पीड़ा से गुजरना पड़ा। साथ ही उन्हें, उनके परिवार व वकीलों को जान से मारने की धमकियाँ दी गईं। इतना ही नहीं, बता दें साल 2014 में जुनैद के वकील को उनके कार्यालय में घुसकर मारा गया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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