Wednesday, January 27, 2021
Home रिपोर्ट राष्ट्रीय सुरक्षा J&K में सुरक्षा बलों को भूमि अधिग्रहण के लिए अब NOC की ज़रूरत नहीं,...

J&K में सुरक्षा बलों को भूमि अधिग्रहण के लिए अब NOC की ज़रूरत नहीं, केंद्र ने वापस लिया 1971 का आदेश

इससे पहले सुरक्षा बलों के जवानों को गृह मंत्रालय के पास NOC के लिए आवेदन करना होता था। अब इससे राहत मिल गई है। असल मे सुरक्षा बलों को कई क्षेत्रों में कन्स्ट्रक्शन कार्य करने होते हैं। अब कुछ क्षेत्रों को चुन कर उसे 'रणनीतिक क्षेत्र' घोषित करने में भी आसानी होगी, जहाँ......

जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए लगभग 1 वर्ष पूरे हो गए हैं और इसके साथ ही भारतीय सुरक्षा बलों के लिए सरकार नई सौगात भी लेकर आई है। अब सुरक्षा बलों के जवानों को राज्य में भूमि के अर्जन/अधिग्रहण के लिए ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) लेने की कोई ज़रूरत नहीं है। इससे भारतीय सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ व गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले अन्य सशस्त्र बलों को फायदा मिलेगा।

इससे पहले के आदेश के हिसाब से सुरक्षा बलों के जवानों को जमीन अधिग्रहण के लिए NOC सर्टिफिकेट लेने लेने की आवश्यकता पड़ती थी, जिसके लिए उन्हें काफी जद्दोजहद करनी होती थी। अब जब ये आदेश वापस हो गया है, भूमि अधिग्रहण के लिए सेना के लिए रास्ते खुल गए हैं। राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव पवन कोतवाल ने सम्बन्ध में शुक्रवार (जुलाई 24, 2020) को एक आदेश जारी किया।

इससे पहले सुरक्षा बलों के जवानों को गृह मंत्रालय के पास NOC के लिए आवेदन करना होता था। अब इससे राहत मिल गई है। असल मे सुरक्षा बलों को कई क्षेत्रों में कन्स्ट्रक्शन कार्य करने होते हैं। अब कुछ क्षेत्रों को चुन कर उसे ‘रणनीतिक क्षेत्र’ घोषित करने में भी आसानी होगी, जहाँ सुरक्षा बलों के जवान आसानी से निर्माण-कार्य कर सकें और जरूरत पड़ने पर उस क्षेत्र का इस्तेमाल कर सकें।

जम्मू कश्मीर चूँकि अब केंद्र शासित प्रदेश है, इसीलिए अब यहाँ केंद्र सरकार के नियम-कानून लागू हो रहे हैं। केंद्र के नियम लागू होने के बाद जम्मू कश्मीर में अब राइट टू फेयर कंपनसेशन एंड ट्रांसपरेंसी इन लैंड इक्वीजिशन, रिहैबिलिशन एंड रिसेटलमेंट एक्ट, 2013 के तहत भूमि अधिग्रहण का रास्ता भी साफ हो गया है। जिस सर्कुलर को वापस लेने के बाद ये संभव हो सका है, वो 1971 में आया था।

अब जिले में ही सारा कार्य हो जाएगा क्योंकि सभी जिलों के डीएम को भूमि अधिग्रहण संबंधी कार्रवाई आगे बढ़ाने के लिए अनुमति और निर्देश दे दिए गए हैं। रणनीतिक कार्यों के लिए नेवी, एयरफोर्स और सशस्त्र बलों को अन्य राज्यों में पहले से ही ये सुविधाएँ हासिल हैं लेकिन जम्मू कश्मीर में ऐसा नहीं हो पाता था। राज्यों में पुलिस को भी ये अधिकार मिले हुए हैं। लोगों ने केंद्र सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

 

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

योगेंद्र यादव और राकेश टिकैत का नाम FIR में: पुलिस ने कहा – ‘अच्छे से सत्यापन के बाद कर रहे गिरफ्तारी’

गणतंत्र दिवस पर हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने 22 एफआईआर में कम से कम 10 ऐसे किसान नेताओं का नाम जोड़ा है, जो इस 'आंदोलन' में...

‘धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला स्क्रिप्ट नहीं लिखो’ – TANDAV वालों की होगी गिरफ्तारी, रोक से SC का इनकार!

वेब सीरीज ‘तांडव’ के निर्माताओं को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिल पाई। कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार करते हुए...
00:48:51

Video: ‘किसान’ नेता स्वतंत्र क्यों घूम रहे हैं? एक भी अरेस्ट क्यों नहीं?

सिंघु बॉर्डर पर किसान क्यों हैं अभी भी? एक भी अरेस्ट क्यों नहीं? मीटिंग तो एक रूटीन प्रक्रिया है, लेकिन असामान्य परिस्थिति में रूटीन से बाहर क्यों नहीं है सरकार? टिकैत, योगेन्द्र यादव समेत वो चालीस किसान नेता क्यों नहीं हैं कस्टडी में? सरकार जवाबदेही तक क्यों नहीं तय कर पाई है?

1 Feb को संसद पर कब्जा, ‘खालिस्तानी’ झंडा फहराने वाले को 2.5 करोड़ रुपए: आतंकी संगठन SFJ का ऐलान

प्रतिबंधित आतंकी संगठन 'सिख फॉर जस्टिस' (SFJ) ने आगामी 1 फरवरी को संसद पर कब्ज़ा और घेराव की धमकी दी है।

इस्लामी हो या खालिस्तानी… निशाना हिन्दू ही है: एक ही ट्रेंड को बार-बार देख कर भी केंद्र और SC शांत क्यों?

अराजकता को जब पलने दिया जाता है तो फिर कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज बचती नहीं। जो दिल्ली दंगों में हुआ, वही खालिस्तानी 'किसान' उपद्रव में।

‘केदारनाथ’ और ‘राम मंदिर’ पर किसान दंगाइयों का आतंक, 26 जनवरी परेड वाले मंदिर का गुंबद तोड़ा

'किसान' दंगाइयों ने तिरंगा के अपमान के साथ ही राम मंदिर और केदारनाथ मंदिर को निशाना बनाते हुए राम मंदिर की झाँकी के कुछ हिस्सों को तोड़ दिया।

प्रचलित ख़बरें

तेज रफ्तार ट्रैक्टर से मरा ‘किसान’, राजदीप ने कहा- पुलिस की गोली से हुई मौत, फिर ट्वीट किया डिलीट

राजदीप सरदेसाई ने तिरंगे में लिपटी मृतक की लाश की तस्वीर अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर करते हुए लिखा कि इसकी मौत पुलिस की गोली से हुई है।

महिला पुलिस कॉन्स्टेबल को जबरन घेर कर कोने में ले गए ‘अन्नदाता’, किया दुर्व्यवहार: एक अन्य जवान हुआ बेहोश

महिला पुलिस को किसान प्रदर्शनकारी चारों ओर से घेरे हुए थे। कोने में ले जाकर महिला कॉन्स्टेबल के साथ दुर्व्यवहार किया गया।

दिल्ली में ‘किसानों’ ने किया कश्मीर वाला हाल: तलवार ले पुलिस को खदेड़ा, जगह-जगह तोड़फोड़, पुलिस वैन पर पथराव

दिल्ली में प्रदर्शनकारी पुलिस के वज्र वाहन पर चढ़ गए और वहाँ जम कर तोड़-फोड़ मचाई। 'किसानों' द्वारा तलवारें भी भाँजी गईं।

दलित लड़की की हत्या, गुप्तांग पर प्रहार, नग्न लाश… माँ-बाप-भाई ने ही मुआवजा के लिए रची साजिश: UP पुलिस ने खोली पोल

बाराबंकी में दलित युवती की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया। पुलिस ने बताया कि पिता, माँ और भाई ने ही मिल कर युवती की हत्या कर दी।

हिंदुओं को धमकी देने वाले के अब्बा, मोदी को 420 कहने वाले मौलाना और कॉन्ग्रेस नेता: ‘लोकतंत्र की हत्या’ गैंग के मुँह पर 3...

पद्म पुरस्कारों में 3 नाम ऐसे हैं, जो ध्यान खींच रहे- मौलाना वहीदुद्दीन खान (पद्म विभूषण), तरुण गोगोई (पद्म भूषण) और कल्बे सादिक (पद्म भूषण)।

26 जनवरी 1990: संविधान की रोशनी में डूब गया इस्लामिक आतंकवाद, भारत को जीतना ही था

19 जनवरी 1990 की भयावह घटनाएँ बस शुरुआत थी। अंतिम प्रहार 26 जनवरी को होना था, जो उस साल जुमे के दिन थी। 10 लाख लोग जुटते। आजादी के नारे लगते। गोलियॉं चलती। तिरंगा जलता और इस्लामिक झंडा लहराता। लेकिन...
- विज्ञापन -

 

योगेंद्र यादव और राकेश टिकैत का नाम FIR में: पुलिस ने कहा – ‘अच्छे से सत्यापन के बाद कर रहे गिरफ्तारी’

गणतंत्र दिवस पर हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने 22 एफआईआर में कम से कम 10 ऐसे किसान नेताओं का नाम जोड़ा है, जो इस 'आंदोलन' में...

‘धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला स्क्रिप्ट नहीं लिखो’ – TANDAV वालों की होगी गिरफ्तारी, रोक से SC का इनकार!

वेब सीरीज ‘तांडव’ के निर्माताओं को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिल पाई। कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार करते हुए...
00:48:51

Video: ‘किसान’ नेता स्वतंत्र क्यों घूम रहे हैं? एक भी अरेस्ट क्यों नहीं?

सिंघु बॉर्डर पर किसान क्यों हैं अभी भी? एक भी अरेस्ट क्यों नहीं? मीटिंग तो एक रूटीन प्रक्रिया है, लेकिन असामान्य परिस्थिति में रूटीन से बाहर क्यों नहीं है सरकार? टिकैत, योगेन्द्र यादव समेत वो चालीस किसान नेता क्यों नहीं हैं कस्टडी में? सरकार जवाबदेही तक क्यों नहीं तय कर पाई है?

पत्नी दूसरे के साथ भागी तो बन गया ‘सीरियल किलर’: 18 महिलाओं को बेरहमी से उतारा मौत के घाट

तेलंगाना के हैदराबाद में टास्क फोर्स पुलिस ने एक सीरियल किलर को गिरफ्तार किया है। यह सीरियल किलर अब तक 18 महिलाओं के साथ सेक्स करने के बाद उनकी हत्या कर चुका है।

‘150+ लोगों से हिन्दू धर्म छुड़वा ईसाई बनाया जा रहा था’ – इंदौर में VHP और बजरंग दल का दखल, 11 पर FIR

इंदौर में सैंकड़ों लोगों का धर्म परिवर्तन कराने का मामला सामने आया है। सेंट अर्नॉल्ड रिलिजियस सेंटर में सैकड़ों हिंदुओं को लालच देकर...

लाल किले में हुई हिंसा के मामले में 200 लोग हिरासत में: लूट, डकैती और हत्या की साजिश के आरोप में मुकदमा दर्ज

गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली में हुई हिंसा के संबंध में दिल्ली पुलिस ने 200 लोगों को हिरासत में ले लिया है। कहा जा रहा है जल्द ही इन सबको गिरफ्तार किया जाएगा।

1 Feb को संसद पर कब्जा, ‘खालिस्तानी’ झंडा फहराने वाले को 2.5 करोड़ रुपए: आतंकी संगठन SFJ का ऐलान

प्रतिबंधित आतंकी संगठन 'सिख फॉर जस्टिस' (SFJ) ने आगामी 1 फरवरी को संसद पर कब्ज़ा और घेराव की धमकी दी है।

‘स्किन टू स्किन कॉन्टैक्ट के बिना छूना यौन अपराध नहीं’ वाले बॉम्बे HC के फैसले पर SC ने लगाई रोक, आरोपित को नोटिस जारी

किसी नाबालिग के ब्रेस्ट को बिना ‘स्किन टू स्किन’ कान्टैक्ट के छूने पर POCSO के तहत अपराध न मानने के हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।

लाल किले के भीतर दंगाइयों का आंतक: चकनाचूर हुए काउंटर पर लगे शीशे, उखाड़ दिए गए रेलिंग व बैनर

लाल किले में घुसी भीड़ ने उपद्रव के दौरान न केवल टिकट काउंटर को पूरी तरह फोड़ा। उन्होंने इसके साथ लगे बोर्डों को भी निकाल कर फेंक दिया। वहीं एसी और रेलिंग को उखाड़कर भी नीचे कर दिया गया है।

इस्लामी हो या खालिस्तानी… निशाना हिन्दू ही है: एक ही ट्रेंड को बार-बार देख कर भी केंद्र और SC शांत क्यों?

अराजकता को जब पलने दिया जाता है तो फिर कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज बचती नहीं। जो दिल्ली दंगों में हुआ, वही खालिस्तानी 'किसान' उपद्रव में।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,695FollowersFollow
387,000SubscribersSubscribe