Tuesday, April 16, 2024
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गाय चाहिए तो ‘प्रदूषण सर्टिफिकेट’ लाइए: NGT ने गोशाला खोलने के लिए जारी किए नए दिशानिर्देश

'वह 200 मीटर दूर डेयरी फार्म और गोशाला खोलने की बात कर कहते हैं कि इससे चोरो और कसाइयों को आसानी होगी। आखिर कैसे उस समय पशुओं का ख्याल रखा जा सकेगा? कैसे पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी?'

किसानों को गाय पालने के लिए अब शहर या गाँव से 200 मीटर दूर कोई जगह चुननी होगी। सीपीसीबी (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) ने हाल में गौशाला और डेयरी फार्म के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को यह जानकारी दी है।

नए दिशा-निर्देश के तहत शहर हो या गाँव, जहाँ आबादी होगी, उससे 200 मीटर की दूरी पर ही डेयरी फार्म और गौशाला खोलने की इजाजत मिलेगी। इनमें कहा गया है कि गौशाला और डेयरी खोलने के लिए नगर नियम व अन्य स्थानीय निकायों से वायु और जल अधिनियम के तहत मंजूरी लेनी होगी। इन दिशा निर्देशों को NGT(राष्ट्रीय हरित अधिकरण) ने भी मंजूरी दे दी है।

नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, शहर हो या गाँव, आबादी वाले क्षेत्र से 200 मीटर की दूरी पर डेयरी फार्म और गौशाला खोलने की इजाजत के अलावा नदी, तालाब, झील के अलावा अस्पताल और शिक्षण संस्थानों से कम से कम 500 मीटर की दूरी पर ही कोई डेयरी फार्म या गौशाला खोल पाएगा। इसी तरह राष्ट्रीय राजमार्ग और नहरों से 200 मीटर की दूरी पर खोलने की इजाजत होगी

एनजीटी ने गौशाला और डेयरी फार्म खोलने और इसके नियमन के लिए जारी दिशा-निर्देश को मंजूरी देते हुए इसे लागू करने की हरी झंडी दे दी है। एनजीटी प्रमुख जस्टिस एके गोयल की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष डेयरी फार्म और गौशाला के नियमन के लिए तैयार की गई दिशा-निर्देश पेश करते हुए सीपीसीबी ने यह जानकारी दी है।

यह नए दिशा निर्देश ट्रिब्यूनल ने नुग्गेहाली जयसिम्हा की ओर से दाखिल याचिका के बाद जारी किए हैं जिनका सोशल मीडिया पर बहुत विरोध किया जा रहा है। 21 राज्यों ने नई दिशा-निर्देश को लागू करने पर सहमति दी है। जिन प्रदेशों ने इन निर्देशों को माना है उसमें कर्नाटक भी है।

ऐसे में गिरीश अल्वा जैसे सक्रिय सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि अगर ऐसा नियम होगा जहाँ गायों को पालन के लिए पॉल्यूशन क्लियरेंस लेना पड़ेगा तो इसका सीधा प्रभाव किसानों की जिंदगी और गौशालाओं पर पड़ेगा। लोग इस बाबत सीएम येदियुरप्पा को, पशुपालन मंत्री को टैग करके इस आदेश को वापस लेने की गुहार लगा रहे हैं।

एक यूजर कहता है एनजीटी के दिशा निर्देश पर आधारित यह आदेश डेरी फार्म और गौशालाों पर लागू होगा। कई हद्द तक यह डेरी फार्म के लिए स्वीकार्य है मगर गौशालों के लिए यह बिलकुल स्वीकार्य नहीं है। इससे भ्रष्टाचार बढ़ेगा और गौशालाएँ बंद होंगी। लोगों को लग रहा है कि ऐसे आदेशों के पीछे बूचड़खाना चलाने वाली लॉबी की साजिश भी हो सकती है।

शिशिर हेगड़े लिखते हैं कि अगर गोशाला और किसानों को पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से इजाजत लेनी पड़ेगी तो कोई भी आम आदमी गो पालन नहीं कर पाएगा। इस फैसले की निंदा होनी चाहिए और इस ‘अवैज्ञानिक’ फैसले को वापस लिया जाना चाहिए।

शिशिर पूछते हैं कि जब यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हुआ है कि गो-पालन से वायु-जल प्रदूषण में नियंत्रण होता है तो यह बहुत दुखद है कि किसानों को अब गाय पालने से पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की इजाजत लेनी होगी। वह 200 मीटर दूर डेयरी फार्म और गोशाला खोलने की बात कर कहते हैं कि इससे चोरो और कसाइयों को आसानी होगी। आखिर कैसे उस समय पशुओं का ख्याल रखा जा सकेगा? कैसे पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी? और कौन गाय पालने वालों को उनके घर या गाँव से 200 किमी दूर जगह देगा? उनका कहना है कि ये सब ऐसा लग रहा है कि ये एक एजेंडा हो ताकि लोगों को गाय पालने से रोका जाए।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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