कश्मीर पर UN फूलों का हार लेके नहीं खड़ा, हमारी कौम भी 100 करोड़ के बाज़ार के साथ हो गई: पाक विदेश मंत्री

कुरैशी कहते हैं कि UN की सुरक्षा परिषद के पाँचों सदस्य पाकिस्तान के लिए हार लेके नहीं खड़े। उनमें से कोई भी रुकावट बन सकता है। उन्होंने पाकिस्तान और कश्मीर के लोगों को 'मूर्खों के स्वर्ग' ("fool's paradise") में न रहने की सलाह दी।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी का एक बयान ट्विटर पर आया है, जिसमें वह कूटनीतिक रूप से पाकिस्तान के कश्मीर मामले पर हिंदुस्तान का कुछ न बिगाड़ पाने का इकबाल करते दिख रहे हैं। 1:24 और 0:57 मिनटों के दो भागों के इस वीडियो में कुरैशी रक्षात्मक लहजे में पाकिस्तानी प्रेस को अपनी सरकार की मजबूरियाँ गिनाते हुए देखे जा सकते हैं।

‘आप के लिए हार लेके नहीं खड़े’

पहले वीडियो में कुरैशी कहते हैं कि UN की सुरक्षा परिषद के पाँचों सदस्य (ब्रिटेन, अमेरिका, चीन, रूस, फ़्रांस) पाकिस्तान के लिए हार लेके नहीं खड़े। उनमें से कोई भी (अगर पाकिस्तान कश्मीर का मसला सुरक्षा परिषद में ले जाना चाहे तो) रुकावट बन सकता है। उन्होंने पाकिस्तान और कश्मीर के लोगों को ‘मूर्खों के (काल्पनिक) स्वर्ग’ (“fool’s paradise”) में न रहने की सलाह दी।

“हकीकत-पसंदाना (यथार्थवादी) तरीके से देखिए। जज़्बात उभारना बहुत आसान है। मुझे… (चुटकी बजाते हुए) दो मिनिट लगेंगे। मैं 35-36 साल से सियासत कर रहा हूँ, बाएँ हाथ का काम है। जज़्बात उभारना तो आसान काम है, ऐतराज़ करना उससे भी आसान है (पाकिस्तानी प्रेस की ओर इशारा करते हुए)। लेकिन, एक… एक मसले को समझकर आगे (UN में) ले जाना पेचीदा है। आगे वो लोग (UN सदस्य) आपके लिए हार लेके नहीं खड़े। सिक्योरिटी काउन्सिल में जो P-5 मेंबर्स हैं, उनमें से… कोई भी रुकावट बन सकता है। क्या आपको कोई शक है? नहीं होना चाहिए। Do not live in a fool’s paradise. Let the people of Pakistan be aware. पाकिस्तानियों को, कश्मीरियों को बाखबर रहना चाहिए। कोई वहाँ आपके लिए मुंतज़िर नहीं खड़ा, कि कोई वहाँ आपकी दावत के लिए नहीं खड़ा। ये तो आपको नई जद्दोजहद का आगाज़ करना पड़ेगा। कोई ऐसा साज़गार माहौल नहीं है।”

‘उम्मा के मुहाफ़िज़ों ने बहुत से investments कर रखीं हैं वहाँ’

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कुरैशी आगे दूसरे वीडियो में अपने बयान-ए-दर्द जारी रखते हुए बताते हैं कि जिस इस्लाम, और उसकी उम्मा (कौम) का भरोसा था, वह भी गच्चा दे गई। उम्मा वाले तो हिंदुस्तान की 100 करोड़ की आबादी के बाजार के लालच में पड़ गए हैं, और पाकिस्तान बेचारा अकेला हो गया है।

“उनके इंट्रेस्ट्स हैं। मैं आपको पहले अर्ज़ कर चुका। मैंने इशारतन कह दिया। एक अरब (की आबादी की) की मार्केट है। और यहाँ इस खित्ते (क्षेत्र) में अब नई… आपने realignment देखी है (अरब देशों के हिंदुस्तान की तरफ झुकाव की ओर इशारा)। देखी है न आपने? मेरा इशारा आप समझ गए। एक नई realignment है, एक अरब की मार्केट है। बहुत से लोगों ने वहाँ इन्वेस्टमेंट्स कर रखीं हैं। वैसे तो हम उम्मा और इस्लाम की बात तो करते हैं, पर उम्मा के मुहाफ़िज़ों ने बहुत सी इंवेस्टमेंट्स कर रखीं हैं वहाँ (हिंदुस्तान में)। उनके मफ़ादात हैं वहाँ। तो मैंने कहा ये कश्मीर का मसला आज का है? ये पिछले 5 अगस्त से शुरू हुआ है? ये तो सात दहाईयों से है। तीस साल से क्या हुआ इस पर? मैं सवाल करता हूँ न! क्या ये मसला कोई नया है?”

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नितिन गडकरी
गडकरी का यह बयान शिवसेना विधायक दल में बगावत की खबरों के बीच आया है। हालॉंकि शिवसेना का कहना है कि एनसीपी और कॉन्ग्रेस के साथ मिलकर सरकार चलाने के लिए उसने कॉमन मिनिमम प्रोग्राम का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है।

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