Wednesday, April 1, 2020
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UN का सर्वे: पाकिस्तान की आर्थिक हालत होगी नेपाल, बांग्लादेश से भी बदतर

पाकिस्तान में पर्यावरणीय पतन भी खतरनाक स्तर तक पहुँच चुका है, जो कि विकास की उपलब्धियों के लिए खतरा बन गया है। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने भी कहा था कि पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि दर 2019 में सुस्त होकर 3.9% रहेगी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

इन दिनों पाकिस्तान का हाल काफी बुरा है। वहाँ की अर्थव्यवस्था गर्त में चली गई है और महंगाई आसमान छू रही है। जरूरत का हर सामान दुगने-तिगुने दामों पर मिल रहा है। खाने-पीने से लेकर पेट्रोल-डीजल की कीमताें में बेतहाशा बढ़ाेतरी दर्ज की गई है। कंगाली के दौर से गुजर रहे पाकिस्‍तान के लिए एक और बुरी खबर है। संयुक्त राष्ट्र की एक आर्थिक रिपोर्ट में पूर्वानुमान लगाया गया है कि इस साल 2019 में पाकिस्‍तान की जीडीपी वृद्धि दर सबसे कम 4.2% और 2020 में मात्र 4% रह सकती है। बड़ी बात यह है कि रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्‍तान की जीडीपी दर नेपाल, बांग्‍लादेश और मालदीव से भी पीछे रह सकती है।

एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक आयोग (ईएससीएपी) की तरफ से ‘एंबिशंस बियॉन्ड ग्रोथ’ शीर्षक से जारी की गई सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह बात कही गई है कि 2019 में पाकिस्तान की जीडीपी की वृद्धि दर इस क्षेत्र में सबसे कम 4.2% रहने का अनुमान है। जबकि इसी वर्ष बांग्‍लादेश की जीडीपी 7.3%, भारत की 7.5%, मालदीव और नेपाल की 6.5% की दर से बढ़ने का अनुमान है।

पाकिस्तान में पर्यावरणीय पतन खतरनाक स्तर तक पहुँच चुका है, जो कि विकास की उपलब्धियों के लिए खतरा बन रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने भी कहा था कि पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि दर 2019 में सुस्त होकर 3.9% रहेगी। एडीबी ने ‘व्यापक आर्थिक चुनौतियों’ का हवाला देते हुए कहा था कि पाकिस्तान की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2018 में 5.2% से गिरकर 2019 में 3.9% पर आने का अनुमान है।

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एशियाई विकास परिदृश्य 2019 के अनुसार, कृत्रि क्षेत्र में सुधार के बावजूद 2018 में पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि दर धीमी पड़ी है। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान की विस्तारवादी राजकोषीय नीति ने बजट और चालू खाते के घाटे को व्यापक रूप से बढ़ाया और विदेशी मुद्रा का भारी नुकसान किया है। एडीबी ने कहा कि जब तक वृहद आर्थिक असंतुलन को कम नहीं किया जाता है, तब तक वृद्धि के लिए परिदृश्य धीमा बना रहेगा, ऊँची मुद्रास्फीति रहेगी, मुद्रा पर दबाव बना रहेगा।

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