Wednesday, June 29, 2022
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ट्रांसजेंडर लोगों के साथ भेदभाव अपराध घोषित: राज्यसभा ने पास किया बिल, कॉन्ग्रेस लगा रही थी अड़ंगा

विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी कॉन्ग्रेस ने एक बार फिर निराश किया। बिल में सौ नुक्स बताते हुए कॉन्ग्रेसी नेता इसे प्रवर समिति (स्टैंडिंग कमिटी) के ठंडे बस्ते में डाल देने की हिमायत करते नज़र आए।

ट्रांसजेंडरों के साथ भेदभाव रोकने वाले और उनके अस्तित्व को क़ानूनी मान्यता प्रदान करने वाला एक ऐतिहासिक बिल राज्य सभा ने आज पास कर दिया है। ‘ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ़ राइट्स) बिल, 2019’ नामक इस अधिनियम को संसद के उच्च सदन ने निचले सदन लोक सभा द्वारा पारित मसौदे के हूबहू स्वरूप में, बिना किसी संशोधन के पास कर दिया है। यानी अब राष्ट्रपति का हस्ताक्षर होते ही बिना किसी देरी के यह कानून का रूप ले लेगा।

बिल को राज्य सभा में मोदी सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने पेश किया। इसमें उनके लिए कल्याणकारी योजनाओं का भी प्रावधान है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि लोक सभा की प्रवर समिति के सुझाए गए संशोधन भी मसौदे में शामिल कर लिए गए हैं

इस बिल के मुताबिक शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, निवास आदि 8 स्पष्ट क्षेत्रों में ट्रांसजेंडर लोगों के साथ भेदभाव करने को अपराध घोषित किया गया है। इसके अलावा ट्रांसजेंडर की परिभाषा भी इस अधिनियम में तय की गई है। इसके अनुसार ऐसे सभी व्यक्ति जिनका जेंडर (लिंग) उनके जन्म के जेंडर से मेल नहीं खाता, ट्रांसजेंडर की परिभाषा में आएँगे।

बिल पास कराने में सहयोग को लेकर विपक्ष का रवैया मिश्रित रहा। जहाँ वाईएसआर कॉन्ग्रेस जैसे कई छोटे दलों ने इसमें सहयोग किया और सरकार को बहुमत के लिए ज़रूरी आँकड़े को छूने में सहायता की, वहीं विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी कॉन्ग्रेस ने एक बार फिर निराश किया। बिल में सौ नुक्स बताते हुए कॉन्ग्रेसी नेता इसे प्रवर समिति (स्टैंडिंग कमिटी) के ठंडे बस्ते में डाल देने की हिमायत करते नज़र आए।

यह साफ नहीं हो पाया है कि आखिर स्टैंडिंग कमिटी में भेजने की लॉबिंग की जगह कॉन्ग्रेस ने अपने सुझावों को सदन में ही पेश क्यों नहीं किया। छोटे विपक्षी दलों के सांसदों ने उसी जगह बिल पर मतदान भी किया है, और अपने हिसाब से उसकी खामियों को भी सदन में ही उजागर भी किया।

वहीं कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर केवल ट्विटर पर ही बिल को लेकर सारी बहस करते नज़र आए। यहाँ याद करना ज़रूरी है कि जिस समय (अगस्त के मानसून सत्र में) यह बिल पास हो रहा था, शशि थरूर और उनकी पार्टी कॉन्ग्रेस कश्मीर और अनुच्छेद 370 के मुद्दे को लेकर संसद ठप करने की कोशिशों में लगे थे। इसका कोई जवाब अभी तक कॉन्ग्रेस या थरूर ने नहीं दिया है कि जो बातें वे अब कर रहे हैं, वह बातें उन्होंने और उनकी पार्टी ने उस समय की थीं या नहीं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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