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मुगल प्रेम में धुल गए मौर्य से मराठा तक: NECRT किताबों में इस्लामी महिमामंडन पर यूजर्स बरसे

मानस रोबिन ने लिखा, "शक्तिशाली अहोम ने 600 गौरवशाली वर्षों तक शासन किया। असम के सबसे महान योद्धा लचित बरफुकन ने सरायघाट के प्रसिद्ध युद्ध में मुगलों को हराया। लेकिन शर्मनाक तरीके से एनसीईआरटी ने 600 साल के लंबे इतिहास को एक छोटे से पैराग्राफ में समेट दिया। वामपंथी इतिहासकारों ने दशकों तक हम सबको बेवकूफ बनाया।"

विनायक दामोदर सावरकर पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा दिए गए बयानों के बाद से सोशल मीडिया पर बहस का दौर जारी है। सोशल मीडिया यूजर्स NCERT की किताबों के कई चैप्टर का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए ये उजागर करने की कोशिश कर रहे हैं कि कैसे इसमें इस्लाम का महिमामंडन किया गया है।

वरिष्ठ लेखक और वीर सावरकर पर वृहद शोध करके दो पुस्तकें लिख चुके विक्रम संपत ने इस बारे में ट्विटर थ्रेड के जरिये कई सारी बातों पर ध्यान दिलाया है और NCERT की किताबों में इस्लाम के घुसपैठ को उजागर करने की कोशिश की है। स्कूल की इन किताबों में इस्लाम का महिमामंडन किया गया है, जबकि मौर्य, मराठा, राजपूत, अहोम, चोल, विजयनगर और गुप्त साम्राज्यों के बारे में पढ़ाई के नाम पर खानापूर्ति की गई है।

बीजेपी के दिल्ली प्रदेश प्रवक्ता अजय सेहरावत ने 12वीं कक्षा के इतिहास की पुस्तक के एक पेज का स्क्रीनशॉट शेयर किया। इसमें बताया गया है कि उदारवादी हिंदुओं को इस्‍लाम के ‘समानता, भाईचारे और एक ईश्‍वर’ के सिद्धांतों ने आकर्षित किया। अजय ने कहा कि यही वजह है कि आज की युवा पीढ़ी हिंदू संस्कृति की आलोचना करती है।

अनीश गोखले ने भी किताब के इस पन्ने को शेयर किया।

विष्णुुकांत सिंह ने लिखा कि काफी पहले से ही बच्चों का ब्रेनवॉश किया जा रहा है। इसके लिए उन्होंने किताब के दो पन्नों का स्क्रीनशॉट शेयर किया, जिसमें मुस्लिम को अच्छा और हिंदू को बुरा दिखाने की कोशिश की गई है।

विक्रम संपत के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए सुनंदा वशिष्ठ ने कहा कि हम सभी NCERT की किताबें पढ़कर बड़े हुए हैं। हम सभी जानते हैं कि इसमें हमने विजयनगर के बारे में इससे ज्यादा नहीं पढ़ाया कि यह दक्षिण में कहीं स्थित है। चोल वंश के बारे में शायद एक लाइन पढ़ने को मिल भी जाए, लेकिन राष्ट्रकूटों के बारे में तो वो भी नहीं।

मानस रोबिन ने लिखा, “शक्तिशाली अहोम ने 600 गौरवशाली वर्षों तक शासन किया। असम के सबसे महान योद्धा लचित बरफुकन ने सरायघाट के प्रसिद्ध युद्ध में मुगलों को हराया। लेकिन शर्मनाक तरीके से एनसीईआरटी ने 600 साल के लंबे इतिहास को एक छोटे से पैराग्राफ में समेट दिया। वामपंथी इतिहासकारों ने दशकों तक हम सबको बेवकूफ बनाया।”

एक यूजर ने लिखा, एनसीईआरटी की किताबें ईसाई युग का उल्लेख करती हैं लेकिन बच्चों को शास्त्रीय भारतीय युग जैसे विक्रम, शक या कोल्लम युग के बारे में नहीं बताती है।

इसी तरह एक यूजर ने किताब के एक पन्ने का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए बताया कि किसा तरह से हिंदू त्योहार दिवाली को लेकर नकारात्मकता फैलाई जाती है, जबकि ईद या बकरीद के लिए ऐसा नहीं होता।

गौरतलब है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार (अक्टूबर 13, 2021) को उदय माहुरकर की पुस्तक ‘Savarkar: The Man Who Could Have Prevented Partition‘ की लॉन्च में कहा कि विनयाक दामोदर सावरकर के ‘दया याचिका’ दायर करने को लेकर झूठ फैलाया गया, उसे गलत तरीके से पेश किया गया।

उन्होंने दावा किया कि सावरकर ने जेल में सजा काटते हुए अंग्रेजों के सामने दया याचिका महात्मा गाँधी के कहने पर दाखिल की थी। राजनाथ सिंह ने कहा था, “महात्मा गाँधी ने अपनी ओर से ये अपील की थी कि सावरकर जी को रिहा किया जाना चाहिए। जैसे हम आज़ादी हासिल करने के लिए आंदोलन चला रहे हैं, वैसे ही सावरकर भी आंदोलन चलाएँगे। लेकिन उन्हें बदनाम करने के लिए कहा जाता है कि उन्होंने माफी माँगी थी, अपने रिहाई की बात की थी जो बिलकुल बेबुनियाद है।”

वहीं संघ प्रमुख मोहन भागवत ने सावरकर को सच्चा देशभक्त और बहुआयामी व्यक्तित्व का धनी बताते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद वीर सावरकर को बदनाम करने के लिए तेजी से मुहिम चल रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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