Friday, February 26, 2021

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Vinayak Damodar Savarkar

भूमिपूजन की बधाई, हनुमान चालीसा पाठ: सावरकर ने कहा था- हिन्दू एक हुए तो कॉन्ग्रेसी कोट पर जनेऊ पहनेंगे

सावरकर ने अविभाजित भारत में मुस्लिम लीग के साथ हिन्दू महासभा के गठबंधन को लेकर कॉन्ग्रेसी दुष्प्रचार को जवाब देते हुए ये बातें कही थीं।

भारत के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में सावरकर-बोस सिद्धांत को अमल में लाने का वक्त आया

यह स्पष्ट है कि आज के भारतीय जहाज के तल में एक बड़ा छेद है जिसे हमें दुरुस्त करने की आवश्यकता है। अगर हम ऐसा नहीं करते हैं तो यह जहाज सागर में डूब सकता है।

‘एक ने अंग्रेजों के सामने सिर झुका दिया, दूसरे ने चाइना के सामने’ – झूठ फैलाने पर AAP नेता पर FIR

"एक ने अंग्रेजों के सामने सर झुका दिया था और दूसरे ने चाइना के सामने…" इस विवादित ट्वीट पर सोशल मीडिया यूज़र्स ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की थी।

समाज सुधारकों से भी ऊपर थीं इंदिरा गाँधी, उनके और सावरकर के बीच कोई तुलना नहीं: कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया

कर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्धारमैया ने सावरकर पर फ्लाईओवर के नामकरण का विरोध करते हुए इंदिरा गाँधी को सबसे ऊपर बताया।

…जब सावरकर ने लेनिन को लंदन में 3 दिन के लिए दी थी शरण

वीर सावरकर ने एक बार लंदन में लेनिन को 3 दिन तक शरण दी थी। कम्युनिस्ट यह स्वीकार नहीं कर पाते कि सावरकर को कई प्रमुख वामपंथियों ने वीर कहने का साहस किया था।

…जब कॉन्ग्रेस के बड़े नेता ने सेल्युलर जेल से वीर सावरकर का नाम हटाने का दिया आदेश और पड़े ‘जूते’

बात 2004 की है। अंडमान निकोबार की सेल्युलर जेल पहुँचे उस कॉन्ग्रेसी नेता को ज्योति पुंज पर वीर सावरकर का नाम देखकर इतनी चिढ़ हुई कि...

सावरकार की 10 साल बाद याचिका Vs नेहरू का बॉन्ड भरकर 2 हफ्ते में जेल से रिहाई: किसने कितना सहा?

नेहरू ने कभी भी नाभा में प्रवेश ना करने का बॉन्ड भरा, अपनी सज़ा माफ कराई। उनके पिता उन्हें छुड़ाने के लिए वायसराय तक सिफारिश लेकर...

जब अंग्रेज सावरकर को कोल्हू में बैल की जगह जोतते थे, जब गाँधी अफ्रीका से भारत लौटे भी नहीं थे: कहानी कालापानी की

उनसे छिलके कूटवाए जाते। कोल्हू का बैल बना कर दिन भर जोता जाता। उन्हें रस्सी बाँटने का काम दिया जाता। प्रताड़ना ऐसी कि आत्महत्या के ख्याल आते।

महात्मा गाँधी किसी मस्जिद में गीता पाठ कर सकते हैं क्या? आखिर क्यों नाथूराम गोडसे ने पूछा था यह सवाल

नेहरू सरकार नाथूराम गोडसे के बहाने सावरकर पर निशाना साधना चाहती थी। गाँधीजी की हत्या के बाद इस प्रयास पर पानी फेरते हुए गोडसे ने...

‘मुस्लिमों में भारतीयता का बहुत अभाव, वो इसका महत्व नहीं समझते’ – शहीद दिवस पर भगत सिंह का ‘कम चर्चा’ वाला वो लेख

"मुस्लिमों में भारतीयता का बहुत अभाव है। इसलिए वे सभी भारतीयता के महत्व को नहीं समझते हैं और अरबी एवं फारसी लिपि को पसंद करते हैं। पूरे भारत की एक भाषा होनी चाहिए और वह भी हिंदी। जिसे वे कभी नहीं समझते हैं, इसलिए वे अपनी उर्दू की प्रशंसा करते रहते हैं और एक तरफ बैठते हैं।"

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