विषय: कश्मीरी पण्डित

शिकारा, कश्मीरी पंडित, विधु विनोद

मुसलमानों से किस बात की माफ़ी माँगें कश्मीरी हिन्दू? कि उनकी लड़कियों का गैंगरेप हुआ, निर्मम हत्या की गई?

आज विधु कहते हैं कि सब कुछ भुलाकर उन लोगों से कश्मीरी पंडितों को गले मिल लेना चाहिए, प्रेम करना चाहिए और सब भुला देना चाहिए। एनडीटीवी पत्रकार रवीश कुमार कहते हैं कि निर्देशक ने वर्षों की इस चुप्पी को तोड़ने के लिए सिर्फ एक 'सॉरी' की गुज़ारिश की है, उन्होंने बहुत ज्यादा तो नहीं माँगा।
जनसंख्या नियंत्रण

‘जानवरों की तरह बच्चे पैदा करना हानिकारक… जो महिलाओं को यूज कर रहे, वो चूड़ियाँ पहन लें’

"कुछ लोगों का मानना ​​है कि बच्चों का पैदा होना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन जानवरों की तरह अधिक बच्चों को जन्म देना समाज और देश के लिए हानिकारक है। जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून लागू होने पर यह देश के लिए अच्छा होगा।"
कुछ तस्वीरें जो पूरी कहानी नहीं कह पातीं (साभार JK Now)

कश्मीर के हिन्दू नरसंहार की 20 नृशंस कहानियाँ जो हर हिन्दू को याद होनी चाहिए

ये किसी फिल्म के दृश्य नहीं हैं जहाँ नाटकीयता के लिए आरी से किसी को काटा जाता है, किसी की खोपड़ी में लोहे का रॉड ठोक दिया जाता है, किसी की आँखें निकाल ली जाती हैं, किसी के दोनों गाल चाकू से चमड़ी सहित छील दिए जाते हैं, किसी के तिलक लगाने वाले ललाट को चाकू से उखाड़ दिया जाता है…
शाहीन बाग़

शाहीन बाग पहुँचे कश्मीरी पंडितों से CAA-विरोधी प्रदर्शनकारियों ने की हाथापाई

कश्मीरी पंडित इस दौरान 'कश्मीरी पंडितों को न्याय दो' के नारे लगाने शुरू कर दिए थे। कश्मीरी पंडितों की इस नारेबाजी से नाराज होकर CAA-विरोधी प्रदर्शनकारियों ने उनके साथ झड़प कर दी, जो कि कुछ ही देर में हाथा-पाई में बदल गई।
सबा नक़वी

इस्लामी घाटी का हिंदुत्वकरण करना चाहती है सरकार: कश्मीरी पंडितों की घर वापसी पर सबा नकवी

सबा नक़वी ने एक टीवी डिबेट के दौरान अपने चिरपरिचित अंदाज में हिंदुओं के खिलाफ जह​र उगला। न केवल कश्मीरी पंडितों के घाटी में लौटने को लेकर एतराज जताया ब​ल्कि जम्मू-कश्मीर पर भारत के अधिकार को लेकर भी सवाल उठाए।
नदीमर्ग नरसंहार

कश्मीरी हिन्दुओं का नरसंहार: नदीमर्ग में 70 साल की महिला से लेकर 2 साल के मासूम तक को मारी गोली

नदीमर्ग तत्कालीन सीएम मुफ्ती मोहम्मद सईद के पैतृक गॉंव से महज 7 किमी दूर है। 54 लोगों की आबादी वाले इस गॉंव में 7 आतंकी घुसे। हिंदुओं को उनके नाम से पुकार घरों से बाहर बुलाया। चिनार के पेड़ के नीचे सबको जमा किया और...
छत्तीसिंहपुरा नरसंहार

सूरज ढलते ही गाँव में घुसे 50 आतंकी, लोगों को घरों से निकाला और लगा दी लाशों की ढेर

बर्बरता की उस रात निहत्थे सिखों को दो समूहों में खड़ा किया गया। आतंकियों में से एक पास के ही गाँव का रहने वाला था। उसे एक सिख ने पहचान लिया। गोलीबारी से पहले उसने आतंकी से पूछा ‘चट्टिया तू इधर क्या कर रहा है’?
कश्मीरी पंडित, नरसंहार

हमें हिंदू औरतें चाहिए… कश्मीर की हर मस्जिद से 19/1/1990 की रात आ रही थी यही आवाज

"उस रात इस्लामी आतंकियों ने 3 विकल्प दिए थे - कश्मीर छोड़ दो, धर्मांतरण कर लो, मारे जाओ। गिरिजा टिक्कू को सामूहिक बलात्कार कर टुकड़ों में काट दिया। बीके गंजू को गोली मारी और उनकी पत्नी को खून से सने चावल (वो भी पति के ही खून से सने) खाने को मजबूर किया।"
कश्मीरी पंडित

कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचारों के तीस साल: ट्रेंड कर रहा ‘हम वापस आएँगे’

"मेरे पास बचपन की कई तस्वीरें नहीं हैं। जीवन और फैमिली एलबम के बीच चयन करने में कोई विकल्प नहीं है। जान बचाने के दौरान फैमली एलबम पीछे छूट गए। 30 साल हो गए। घर वापस जाने का संकल्प केवल मजबूत हुआ है।"
जम्मू, कश्मीरी पंडित

फ्री कश्मीर फ्रॉम इस्लामिक टेररिज़्म: कश्मीरी पंडित ने 15 देशों के राजनयिकों को दिखाई ‘हकीकत’

जम्मू-कश्मीर में कभी पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाते तो कभी सेना पर पत्थरबाजी का सीन आम है। लेकिन ऐसा पहली बार हुआ जब कश्मीरी पंडित ने 'फ्री कश्मीर फ्रॉम इस्लामिक टेररिज़्म' का पोस्टर लहराया हो, विदेशी दल को जमीनी हकीकत से वाकिफ कराया हो।
शेहला-परेश रावल

शेहला को परेश रावल ने दिखाया आईना, कहा- तुम्हें इंटरनेट की पड़ी है, कश्मीरी पंडित सालों से बेघर हैं

कश्मीर पर अफवाह फैलाने में शेहला रशीद पुरानी उस्ताद रही हैं। वे ट्ववीट कर सेना पर कश्मीरियों को प्रताड़ित करने का आरोप तक लगा चुकी हैं। सेना ने उस वक्त कहा था कि लोगों को भड़काने के लिए असामाजिक तत्व और संगठन फर्जी खबरें फैला रहे हैं।
शिवम विज-शेखर गुप्ता

‘पगला गए हो क्या?’ दि प्रिंट के शिवम विज ने पहले फ़र्ज़ी बयान छापा, पकड़े जाने पर की बेहूदगी

दरअसल द प्रिंट और शिवम विज का सोचना यह है कि एक दशक पुरानी बात, जब समय और परिस्थितियाँ अलग थीं, उस समय की घटनाओं और परिस्थितियों का हवाला देते हुए आज के समय में वो अपने प्रोपेगेंडा को फैलाने में इस्तेमाल कर सकते हैं।

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