Wednesday, April 14, 2021

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HSTDV : इस अत्याधुनिक तकनीक के सफल प्रयोग के साथ ही विश्व का चौथा देश बना भारत, राजनाथ सिंह ने दी बधाई

HSTDV का सफल प्रयोग करने वाला भारत दुनिया का चौथा देश बन गया है। इससे पहले अमेरिका, रूस और चीन यह कारनामा कर चुके हैं।

11 दिन में 1000 बेड वाला ‘कोरोना हॉस्पिटल’ तैयार: वीरगति को प्राप्त कर्नल संतोष बाबू के नाम पर ICU वेंटिलेटर वॉर्ड

DRDO ने केवल 11 दिनों में दिल्ली में कोरोना वायरस के इलाज के लिए 1,000 बेड वाली सुविधा का निर्माण किया। इसमें 250 ICU बेड भी...

HSTDV विकसित कर भारत महाशक्तियों में शामिल, हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने में होगा इस्तेमाल

इस परीक्षण में 1 टन वजन वाले और 18 फीट लंबे एयरव्हीकल को अग्नि मिसाइल से लॉन्च किया गया था। इस परीक्षण का उद्देश्य एचएसटीडीवी को एक खास ऊँचाई तक पहुँचाना था, जिसके बाद स्क्रैमजेट इंजन अपने आप चालू हो जाता है और व्हीकल 6 मैक की रफ्तार हासिल कर लेता है।

20cm तक ज़ूम करके दुश्मन पर नज़र रखेगी भारतीय सेना, 5 और सैन्य उपग्रह किया जाएगा लॉन्च

कार्टोसैट-3 एक उन्नत उपग्रह है। इसमें 0.2 मीटर (20 सेमी) के रिज़ॉल्यूशन को ज़ूम करने की क्षमता है। इस क्षमता को दुनिया में सबसे अच्छा माना जाता है। इससे बंदूक या दुश्मन के बंकर में मौजूद हर छोटी से छोटी वस्तुओं को स्पष्ट देखा जा सकेगा।

मिशन शक्ति: कॉन्ग्रेसी चाटूकार गलत, मोदी इस रिस्क के लिए पूरी तरह से श्रेय के हकदार

मिशन शक्ति वैश्विक राजनीति में भारत की बढ़ती धाक का एक वसीयतनामा है। नरेंद्र मोदी ने पिछले पाँच वर्षों के दौरान जिन कूटनीतिक रिश्तों को मजबूती दी है, वे सभी सरकार को परीक्षण करने का विश्वास दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए होंगे।

ASAT तकनीक 2012 से ही थी भारत में, कॉन्ग्रेस के लचर नेतृत्व के कारण फाँक रही थी धूल

2012 में DRDO के प्रमुख वीके सारस्वत थे। एक दिन उन्होंने देश को चौंका दिया, यह घोषणा करके कि भारत के पास Low Earth Orbit और Polar Orbit में परिक्रमा करने वाले सैटेलाइट को निष्क्रिय करने लायक ऐंटी सैटलाइट वेपन की सारी तकनीक और उसे बनाने के लिए सारे कल-पूर्जे मौजूद हैं।

DRDO ने तैयार की खास दवा और पट्टियाँ, अब नहीं बहेगा युद्धक्षेत्र में जवानों का खून

DRDO के वैज्ञानिकों के अनुसार अगर जवानों को सही समय पर उचित फर्स्ट ऐड दिया जाए तो उनकी जिंदगी बचने की संभावना काफ़ी बढ़ जाती है। वैज्ञानिकों ने कहा कि इन दवाओं की मदद से मृतकों की संख्या में कमी लाई जा सकती है।

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