विषय: दंगे

सिख दंगे

1984 दंगाः सिख यात्रियों को ट्रेनों से घसीटकर मारा गया, पुलिस तमाशबीन बनी रही, SIT रिपोर्ट

SIT की रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रेन में सफर कर रहे सिख यात्रियों की ट्रेन और रेलवे स्टेशनों पर हमला करने वाले लोगों द्वारा हत्या किए जाने के पाँच मामले थे।
कॉन्ग्रेस पार्षद, पुलिस पर हमला

कॉन्ग्रेस पार्षद शहजाद खान ने पुलिस को मारने के लिए भीड़ को उकसाया, कहा- एक भी पुलिस वाले को मत छोड़ना

प्रदर्शनकारियों से दंगाईयों में तब्दील हुई इस भीड़ ने इस दौरान पुलिसकर्मियों पर पत्थरबाजी की। जिसमें करीब 26 पुलिस वाले घायल हो गए। इसके अलावा पुलिस जीप को भी निशाना बनाया गया। इस पूरे मामले में पुलिस ने 5000 लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कर ली है। जिसमें से कुछ लोगों की पहचान होने का भी दावा किया जा रहा है
मिसिसिपी यूनिवर्सिटी (तस्वीर: Getty) और जामिया यूनिवर्सिटी के छात्र

यूनिवर्सिटी दंगों के 6000 लोगों को रोकने के लिए जब कैनेडी ने 30,000 जवान उतार दिए थे

हम ये मान लें कि 'अल्लाहु अकबर' का मतलब 'गॉड इज ग्रेट' होता है? इतने मासूम तो मत ही बनो। दंगा करते वक्त ये नारा उतना ही साम्प्रदायिक है जितना 'हिन्दुओं से आजादी' और ‘हिन्दुत्व की कब्र खुदेगी' है। राजनैतिक विरोध में 'नारा-ए-तकबीर' और 'ला इलाहा इल्लल्लाह' की जगह कैसे बन जाती है?
जामिया इस्लामिया, नागरिकता क़ानून

जामिया हिंसा पर FIR: कॉन्ग्रेस का पूर्व MLA आसिफ खान भी था शामिल, दंगाइयों के साथ छात्रों ने भी की पत्थरबाजी

स्थानीय नेता आशु खान, मुस्तफा और हैदर का नाम भी एफआईआर में है। सीवाईएसएस के नेता कासिम उस्मानी, AISA के चंदन और एसआईओ के आसिफ तन्हा को भी आरोपी बनाया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

‘गोधरा कांड के बाद गुजरात में भड़की हिंसा सुनियोजित नहीं’ – नानावती आयोग से ‘CM मोदी’ को क्लीन चिट

नानावती-मेहता आयोग की फाइनल रिपोर्ट में 59 कारसेवकों को जलाए जाने के बाद राज्य में भड़की हिंसा को सुनियोजित हिंसा नहीं माना गया। आयोग ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली तत्कालीन गुजरात सरकार को अपनी रिपोर्ट में क्लीन चिट दी है।
बंधु प्रकाश पाल, उनकी पत्नी ब्यूटी और पुत्र एक पुरानी तस्वीर में (साभार: स्वराज्य)

मुर्शिदाबाद हत्याकांड: बंधु प्रकाश हम शर्मिंदा हैं…

बंधु प्रकाश गलत राज्य में पैदा हुआ, गलत जाति-धर्म का था, गलत राज्य में मारा गया। मरने के बाद की चर्चा में बने रहने के लिए आपको निर्दोष होना मात्र 'सही' नहीं होता। आपको किसी खास जाति, किसी खास मजहब में होना होता है, किसी खास तरह के हत्यारे का शिकार बनना पड़ता है, और वहाँ सत्तारूढ़ पार्टी कौन सी है, इसका भी बहुत असर पड़ता है।
मुजफ्फरनगर दंगा

मुजफ्फरनगर दंगा: अखिलेश ने किए थे हिंदुओं पर 40 केस, मुस्लिमों पर 1, सारे हिंदू बरी

हत्या से जुड़े 10, सामूहिक बलात्कार के 4 और दंगों के 26 मामलों के आरोपितों को अदालत ने बेगुनाह माना। सरकारी वकील के हवाले से बताया गया है कि अदालत में गवाहों के मुकरने के बाद अब राज्य सरकार रिहा आरोपितों के संबंध में कोई अपील नहीं करेगी।

सरकारी डॉक्टर की जान बनाम मुस्लिम वोटबैंक को निहारती निर्मम ममता जो दंगे पीती, खाती और सोती है

ये भीड़ इतनी जल्दी कैसे आती है, कहाँ हमला करती है और किधर गायब हो जाती है? क्या पुलिस ने नहीं देखा इन्हें? क्या हॉस्पिटल में सुरक्षा के लिए पुलिस आदि नहीं होती या फिर इस पहचानहीन भीड़ का सामूहिक चेहरा ममता की पुलिस ने पहचान लिया और उन्हें वो करने दिया जो वो कर गए?
इमरान ने गाय काटने के अपराध को स्वीकारा

इमरान ने गाय इसलिए काटी कि होली पर सांप्रदायिक तनाव भड़के, दिल्ली पुलिस ने दबोचा

होली के दिन इमरान ने अपने तीन और दोस्तों, परवेज, लुकमान और इंशालाहम, के साथ मिलकर गाय काटी थी और इसका मकसद यह था की हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच मज़हबी तनाव बढ़े।
मस्जिद पर हमला

श्री लंका में भड़का मुस्लिम-विरोधी दंगा: पूरे देश में लगाना पड़ा कर्फ्यू, अब तक एक व्यक्ति की हत्या

इन दंगों में अब तक कई घरों और मस्जिदों पर हमला किया जा चुका है। दंगाई हाथ में लाठी और हथियार लिए आते हैं और सीधा हमला कर देते हैं। इस समय श्री लंका में अल्पसंख्यक मुसलमानों में और सिंहलियों में काफ़ी तनातनी का माहौल है।
टकराव रोकने का प्रयास करते सुरक्षाकर्मी (साभार: स्क्रॉल)

मंदिर की सड़क रोक कर हो रही थी जुम्मे की नमाज, असम में भड़के दंगे, 15 घायल

हिंसा तब भड़की जब नमाज मंदिर की ओर जाने वाली सड़क पर पढ़ी गई- यानि मंदिर का रास्ता रोक दिया गया।
रामनवमी और दंगे

हिन्दू त्योहारों पर आम होती इस्लामी पत्थरबाज़ी: ये भी मोदी के मत्थे मढ़ दूँ?

हर आतंकी और उसका संगठन एक ही नारा लेकर निकलता है, काले झंडे पर सफ़ेद रंग से लिखा वाक्य क्या है, सबको पता है। बोल नहीं सकते, वरना 'बिगट' और 'कम्यूनल' होने का ठप्पा तुरंत लग जाएगा। हमने पीढ़ियाँ निकाल दीं कहते हुए कि आतंक का कोई मज़हब नहीं होता।

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