बुजुर्गों की मदद के लिए अलग से स्टाफ की तैनाती की गई है। इसके लिए उन्होंने बकायदा सभी थानों पर एक-एक महिला आरक्षक को इसी कार्य के लिए नियुक्त भी कर दिया है।
वो ऐसा कर के न सिर्फ़ ज़रूरतमंदों का हक़ मार रहे हैं बल्कि संवेदनहीनता का परिचय भी दे रहे हैं। हम बात कर रहे हैं ऐसे लोगों की, जो अपने घर में पर्याप्त राशन होते हुए भी प्रशासन के सामने झूठ बोल कर फायदा उठाना चाहते हैं।