यह भय का ही असर है जो अस्पताल में बेड पर कब्जा करने के लिए मजबूर कर रहा है। आवश्यकता न होने के बावजूद ऑक्सीजन सिलेंडर और इंजेक्शन रखने के लिए उकसा रहा है।
‘वाशिंगटन पोस्ट’ की खबर हो या 'गार्डियन' का संपादकीय, ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ का कवरेज हो या ‘सीएनएन’ की कवरेज, ये सभी बस 'व्हाइट मेन्स बर्डन सिंड्रोम' का ज्वलंत उदाहरण है।
हिन्दू लाशों के जलने की तस्वीरें शेयर कर के दानिश सिद्दीकी ने पूरी दुनिया में भारत की ऐसी छवि बनाने का प्रयास किया है, जैसे कोरोना वायरस संक्रमण के लिए हिन्दू ही जिम्मेदार हों और वही मर रहे हों।
चलते-चलते कोरोना तक पहुँचे हैं। एक वर्ष पहले से किसी आशा में बैठे थे। विशेषज्ञ को लाकर चैनल पर बैठाया। वो बोला; इतने बिलियन संक्रमित होंगे। इतने मिलियन मर जाएँगे।
स्वदेशी वैक्सीन पर दिन-रात अफवाह फैलाने वाले आज पूछ रहे हैं कि सब को वैक्सीन पहले क्यों नहीं दिया? क्या कोरोना वॉरियर्स और बुजुर्गों को प्राथमिकता देना 'भूल' थी?