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मीडिया गिरोह

भारत पर ‘गोरी मीडिया’ की शाब्दिक उल्टीः पोखरण हो या मंगलयान या फिर कुम्भ और कोरोना, परोसा बस प्रोपेगेंडा

‘वाशिंगटन पोस्ट’ की खबर हो या 'गार्डियन' का संपादकीय, ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ का कवरेज हो या ‘सीएनएन’ की कवरेज, ये सभी बस 'व्हाइट मेन्स बर्डन सिंड्रोम' का ज्वलंत उदाहरण है।

कोरोना से मौत, हिंदुओं की जलती चिताएँ: Reuters की पत्रकारिता या हिंदू-घृणा?

हिन्दू लाशों के जलने की तस्वीरें शेयर कर के दानिश सिद्दीकी ने पूरी दुनिया में भारत की ऐसी छवि बनाने का प्रयास किया है, जैसे कोरोना वायरस संक्रमण के लिए हिन्दू ही जिम्मेदार हों और वही मर रहे हों।

विज्ञापन की वजह से केजरीवाल के कोरोना कुप्रबंधन पर नरमी? Times Now पत्रकारों के वायरल पत्र को चैनल ने नकारा

"केजरीवाल ने हमारे चैनल को विज्ञापनों से भर दिया है ताकि हम दिल्ली में कोरोना के चौतरफा घोर कुप्रबंधन पर सवाल न खड़े करें।"

शाहनवाज दूत है, कोरोना मरीजों के लिए बेच डाला कार: 10 महीने पुरानी खबर मीडिया में फिर से क्यों?

'शाहनवाज शेख ने मरीजों को ऑक्सीजन सिलिंडर मुहैया कराने के लिए अपनी SUV बेच डाली' - जून 2020 में चली खबर अप्रैल 2021 में फिर चलाई जा रही।

आप मरिए-जिन्दा रहे प्रोपेगेंडा: NDTV की गार्गी अंसारी ऑक्सीजन उत्पादन के लिए प्लांट खोलने की बात से क्यों बिलबिलाई

वामपंथियों को देखकर लगता है कि उनके लिए प्रोपेगेंडा मानव जीवन से ज्यादा ऊपर है। तभी NGT की क्लीयरेंस पाने वाले प्लांट के खुलने का विरोध कर रहे।

कोरोना महामारी के बीच ऐसे फैलाया गया 40 झूठ: विपक्ष, वामपंथी, मीडिया गिरोह, इस्लामी कट्टरपंथी… सबने दिया योगदान

बड़े-बड़े 'बुद्धिजीवी' या फिर विपक्ष के दिग्गज नेता या फिर वामपंथी और इस्लामी कट्टरपंथी... कोई भी इस दाग से अछूता नहीं है।

रवीश और बरखा की लाश पत्रकारिताः निशाने पर धर्म और श्मशान, ‘सर तन से जुदा’ रैलियाँ और कब्रिस्तान नदारद

अचानक लग रहा है जैसे पत्रकारों को लाश से प्यार हो गया है। बरखा दत्त श्मशान में बैठकर रिपोर्टिंग कर रही हैं। रवीश कुमार लखनऊ को लाशनऊ बता रहे हैं।

पत्रकारिता का पीपली लाइवः स्टूडियो से सेटिंग, श्मशान से बरखा दत्त ने रिपोर्टिंग की सजाई चिता

चलते-चलते कोरोना तक पहुँचे हैं। एक वर्ष पहले से किसी आशा में बैठे थे। विशेषज्ञ को लाकर चैनल पर बैठाया। वो बोला; इतने बिलियन संक्रमित होंगे। इतने मिलियन मर जाएँगे।

सुबह का ‘प्रोपेगेंडाबाज’ शाम को ‘पलटी मारे’ तो उसे शेखर गुप्ता कहते हैं: कोरोना वैक्सीन में ‘दाल-भात मूसलचंद’ का क्या काम

स्वदेशी वैक्सीन पर दिन-रात अफवाह फैलाने वाले आज पूछ रहे हैं कि सब को वैक्सीन पहले क्यों नहीं दिया? क्या कोरोना वॉरियर्स और बुजुर्गों को प्राथमिकता देना 'भूल' थी?

कोरोना से लड़ाई में मजबूत कदम बढ़ाती मोदी सरकार: फर्जी प्रश्नों के सहारे फिर बेपटरी करने निकली गिद्धों की पाँत

गिद्धों की पाँत फिर से वैसे ही बैठ गई है। फिर से हेडलाइन के आगे प्रश्नवाचक चिन्ह के सहारे वक्तव्य दिए जा रहे हैं। नेताओं द्वारा फ़र्ज़ी प्रश्न उठाए जा रहे हैं। शायद फिर उसी आकाँक्षा के साथ कि भारत कोरोना के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई हार जाएगा।

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