Thursday, July 18, 2024
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शाहनवाज दूत है, कोरोना मरीजों के लिए बेच डाला कार: 10 महीने पुरानी खबर मीडिया में फिर से क्यों?

शाहनवाज शेख को 'ऑक्सीजन मैन' का नाम दे दिया गया और जून 2020 में जिस चीज के लिए उनके बारे में खबरें छपी थीं, उसे फिर से अभी की खबर बना कर चलाया गया। शाहनवाज के लिए आखिर ऐसा क्यों?

कोई व्यक्ति एक ही चीज को दो बार कैसे बेच सकता है? यह संभव है! गंगा-जमुनी तहजीब और मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए भारतीय मीडिया संस्थान इस तरह का कमाल करते रहते हैं। ऐसे में मुंबई के मलाड में रहने वाले शाहनवाज शेख को ‘ऑक्सीजन मैन’ का नाम दे दिया गया और जून 2020 में जिस चीज के लिए उनके बारे में खबरें छपी थीं, इसके 10 महीने बाद अप्रैल 2021 में भी उसी खबर को दोबारा चला कर उनकी पीठ थपथपाई गई।

सबसे बड़ी बात तो ये कि ‘न्यूज़ 18’, ‘इंडिया डॉट कॉम’ और ‘इंडिया टुडे’ जैसे पोर्टलों ने न सिर्फ इस खबर को फिर से चलाया, बल्कि ये भी नहीं बताया कि यह एक पुरानी खबर है। अब जब कोरोना की दूसरी लहर से लोग परेशान हैं और कई अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी की बात सामने आ रही है, ऐसे में इस खबर को दोबारा चलाने के पीछे क्या कारण था, वो समझ से परे है। खासकर, ये छिपा कर कि ये अब की खबर नहीं है।

‘इंडिया टाइम्स’ ने पिछले साल चलाई थी ये खबर, ‘लोकमत’ ने अब चलाई

जून 2020 में भी भारत में कोरोना के कारण स्थिति गंभीर थी और संक्रमितों की संख्या देश भर में लगातार बढ़ रही थी। तभी शाहनवाज शेख का बयान ‘द क्विंट’ और ‘इंडियन एक्सप्रेस’ जैसे मीडिया संस्थानों ने चलाया था, जिसमें वो कहते दिख रहे थे कि उन्हें कोविड-19 मरीजों के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था करने में आर्थिक समस्या आ रही थी, इसीलिए उन्होंने अपनी ‘ड्रीम कार’ कस्टमाइज्ड फोर्ड एंडेवर को बेच दिया।

शाहनवाज शेख ने बताया था कि इन रुपयों से उन्होंने कोरोना मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलिंडर्स का इंतजाम किया। तब प्रकाशित हुई ख़बरों के अनुसार, शाहनवाज के एक दोस्त थे, जो उनके बिजनेस पार्टनर भी थे। दोनों बचपन से दोस्त थे और साथ काम करते थे। दोस्त की एक कजन बहन मुम्ब्रा में रहती थी, जो 6 महीने की गर्भवती थी। एक दिन अचानक उसे साँस लेने में तकलीफ होने लगी। उसका पति उसे अस्पताल में भर्ती कराना चाहता था।

‘न्यूज़ 18’ ने चालाकी से छिपाई कार बेचने की तारीख़, फिर से चलाई खबर

जून-जुलाई 2020 में शाहनवाज द्वारा बताई गई कहानी की मानें तो दोस्त की बहन को ऑटो रिक्शा से कई अस्पतालों में ले जाया गया लेकिन बेड नहीं मिला। किसी में ऑक्सीजन नहीं था, किसी में बेड्स नहीं थे, किसी में वेंटिलेटर नहीं था तो किसी ने कोरोना टेस्ट कराने को कहा। उसकी मौत हो गई और इसके बाद शाहनवाज लोगों को बचाने लगे। उन्होने अपनी SUV को एम्बुलेंस बना दिया। एक टीम बनाई और लॉकडाउन में लोगों की मदद की, उन्हें भोजन दिया।

‘इंडिया डॉट कॉम’ ने तो ऐसे चलाया जैसे ये कल की ही खबर हो

‘न्यूज़ 18’ की हालिया खबर में भी यही कहानी दोहराई गई है और कहा गया है कि शाहनवाज पिछले साल से ही एक बड़े कोरोना वॉरियर रहे हैं। बताया गया है कि अब तक उन्होंने 4000 लोगों की मदद की है और रोज उन्हें 500-600 फोन कॉल्स आते हैं। जबकि, ‘इंडिया डॉट कॉम’ की खबर में बताया गया है कि ‘कुछ ही दिनों पहले’ शाहनवाज ने अपनी कार बेच कर 160 ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था की।

‘इंडिया टुडे’ ने भी इसी तरह ‘कुछ दिन पहले’ SUV बेचने की बात की और इस खबर को प्रकाशित किया। अब चैनल ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से माफ़ी माँगते हुए कहा है कि ये एक पुरानी खबर है, जो फिर से चल रही है। लेकिन साथ ही ‘इंडिया टुडे’ ने जोड़ा, “लेकिन हमें निश्चित रूप से ऐसे और भी लोगों की ज़रूरत है।” लेकिन, इस स्टोरी को डिलीट नहीं किया गया है और ये साइट पर मौजूद है।

पिछले साल ‘इंडियन एक्सप्रेस’ और ‘द क्विंट’ ने शाहनवाज के हवाले से ही बनाया था वीडियो

इसी खबर में ये भी लिखा है कि शाहनवाज ने पिछले वर्ष भी अपनी कार बेच दी थी। भला एक ही SUV को 2 बार एक ही काम के लिए कैसे बेचा जा सकता है? खबर में इसके आगे शाहनवाज शेख के पिछले साल के बयान को ही हूबहू छाप दिया गया है। पिछले साल भी ‘द क्विंट’ और ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के वीडियोज में शाहनवाज ही एक दीवार के बैकग्राउंड के साथ अपनी कहानी बता रहे थे। बीच-बीच में उनके ‘सामाजिक सेवा कार्यों’ का स्लाइडशो चलाया गया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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