न्यूजलॉन्ड्री ने अपनी रिपोर्ट में शब्दों का ऐसा हेर-फेर किया, जिससे पाठकों को लगे कि दिल्ली पुलिस ने जानबूझकर पत्थरों से भरा डंपर ट्रक संसद मार्ग थाने के पास खड़ा किया था।
खुद को 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सबसे बड़ा रक्षक' बताने वाला लेफ्ट-लिबरल जमात सीजेपी प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों के साथ भीड़ की बदसलूकी को जायज ठहरा रहा है।
तुम्हारे (मुस्लिम) 'मर्द' 'हैंडसम' और 'खूबसूरती' नहीं है आरफा और निवेदिता, वे महिलाओं को सुरमा लगाकर नहीं फँसाते बल्कि माथे पर टीका और हाथ में कलावा पहनकर आते हैं।
कुणाल कामरा के शो में जब पत्रकारिता की 'सस्ती आलिया भट्ट' मनीषा पांडे पहुँची तो बेकाबू हो गई। अपने शो के पाकिस्तानी दर्शक होने का ऐसे बखान किया जैसे ये कोई 'तमगा' हो।