जाँच से पता चला कि नोएडा हिंसा स्पॉन्टेनियस नहीं थी। मुख्य आरोपित अदित्य आनंद ने 5 साल से तैयारी कर रखी थी। श्रमिकों को भड़काने के लिए 17+ व्हाट्सएप ग्रुप्स बनाए गए।
'द वायर' ने उत्तर प्रदेश में 2 करोड़ से अधिक नाम कटने पर SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे और कहा था कि वोटरों के नाम कैसे कम हो गए। लेकिन आयोग ने इसका जवाब दिया है।