जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने कहा है कि घाटी में पर्यटकों और बागानों को निशाना बनाने के बाद आतंकवादी अब जल और विद्युत आपूर्ति समेत पूरे बुनियादी ढांचे काे तबाह करने की कोशिश में हैं।
गुजरात एटीएस के उप महानिदेशक हिमांशु शुक्ल ने मीडिया को बताया कि पैसे खत्म हो गए तो रिश्तेदारों को फ़ोन कर पैसे के लिए सम्पर्क किया, लेकिन पुलिस के डर से किसी ने उनके खाते में पैसे नहीं डाले।
मोईनुद्दीन और अशफाक दोनों ही सूरत के रहने वाले थे और अपने साथ लाया हुआ पैसा खत्म हो जाने के बाद परिवार और दोस्तों से आर्थिक सहायता लेने की कोशिश कर रहे थे। गुजरात पुलिस के एटीएस ने गुजरात-राजस्थान बॉर्डर पर गिरफ्तार कर लिया और लखनऊ पुलिस ने दोनों को सीजेएम की अदालत में पेश किया।
जसरत को विलुप्तप्राय प्रजातियों में शामिल बाघों का बड़ी संख्या में शिकार करने के अलावा एक और अजीब वजह से जाना जाता है- वह भालुओं का शिकार इसलिए करता था ताकि उनके जननांग (पेनिस) को खा सके।
हिंदू महासभा ने उनको मरणोपरांत 'हिन्दूरत्न' सम्मान से नवाज़े जाने की घोषणा की है। इसके अलावा हिन्दू महासभा के लखनऊ ऑफ़िस के सामने तिवारी का प्रतिमा लगाई जाएगी।
वो सभी मजहबी बैठकों में भाग ले रहे थे। बिजनौर पुलिस ने वीजा नियमों का हवाला देते हुए बताया कि कोई भी विदेशी नागरिक टूरिस्ट वीजा लेकर मजहबी गतिविधियाँ संचालित नहीं कर सकता। इस सम्बन्ध में मस्जिद प्रशासन से भी रिपोर्ट माँगी गई है।
नागपुर से भी सैयद आसिम अली नामक आरोपित को गिरफ़्तार किया गया है। सैयद ने एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें उसने कमलेश तिवारी की हत्या को जायज ठहराया था क्योंकि 'उन्होंने पैगम्बर मुहम्मद का अपमान किया है।' वह हत्यारों से लगातार संपर्क में था।
गुजरात पुलिस और योगी की पुलिस को शक की नज़र से देखने वाले यह भी कह सकते हैं कि सबूत मैन्युफैक्चर्ड है। ऐसे लोगों के लिए राँची के काँके में बिरसा मुंडा के नाम पर एक अस्पताल है। वहाँ अच्छी व्यवस्था है।
ज़्यादा संभावना इस बात की है कि पुलिस को मामले में किसी भी 'एंगल' के सबूत अब तक न मिले हों, जिसमें कोई आश्चर्य नहीं किया जा सकता, क्योंकि हत्या को अभी 24 घंटे भी नहीं हुए हैं। ऐसे में सबूत न मिलने को बहुत सम्भव है कि मीडिया में क्लीन चिट मिलने के रूप में दिखाया जा रहा है।
पुलिस ने बताया कि रजिया खातून और उसके पति सिराजुद्दीन दोनों पश्चिम बंगाल के मूल निवासी हैं। पूछताछ के दौरान रजिया ने कबूल किया कि वो अपने तृपति सिराजुद्दीन के साथ हैदराबाद में देह व्यापार का धंधा करने के लिए आई थीं। वो लोग पिछले 6 महीने से चोरी-छिपे रैकेट चला रहे थे।