सुषमा स्वराज ने ट्विटर डिप्लोमेसी का दरवाजा खोला। ट्विटर पर सक्रिय रहते हुए लोगों की मदद करना इतना चर्चित हुआ कि वाशिंगटन पोस्ट ने उन्हें 'सुपरमॉम ऑफ द स्टेट' कहा। उनके देहांत के साथ ही भारतीय राजनीति का एक शालीन अध्याय समाप्त हो गया है।
भाजपा की ओर से लोक सभा में मोर्चा संभालने वालों में से एक थे लद्दाख के सांसद जाम्यांग त्सेरिंग नामग्याल, जिन्होंने राज्य के विभाजन के समर्थन में लद्दाख का पक्ष रखा।
कई राजनेताओं ने केंद्र सरकार के निर्णय को सही ठहराते हुए कहा कि ये भारत की क्षेत्रीय संप्रभुता और उसके लोगों के कल्याण के हित में लिया गया फैसला है। हालाँकि, इनमें से सभी नेता अपनी पार्टी के रुख का खुलकर विरोध नहीं कर रहे हैं।
"प्रदेश बोर्डों में अलग पाठ्यक्रम होने के कारण मेडिकल और इंजीनियरिंग के दाखिले की परीक्षाओं में ग्रामीण इलाकों के बच्चे स्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए पूरे देश में एक बोर्ड होना चाहिए ताकि सभी बच्चे एक तरह की पढ़ाई करें और सबको बराबर का मौका मिले।"
'हमने सिर्फ एक किताब फाड़ा है।' यानी कि उनके अनुसार देश के संविधान की प्रति उनके लिए महज एक किताब है। उनका कहना है कि संविधान उन्होंने नहीं, बल्कि भाजपा ने फाड़ा है।
अनुच्छेद 370 में किए गए बदलाव पर जहाँ पूरा देश जश्न मना रहा है, वहीं पश्चिम बंगाल में लोगोंं को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने सिलीगुड़ी में भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष कंचन देबनाथ और महामंत्री समेत 5 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है।
अब्दुल्ला को घर में नजरबंद किए जाने के बाद शशि थरूर ने ट्वीट किया, "आप अकेले नहीं हैं उमर अब्दुल्ला। लोकतंत्र को मानने वाला हर भारतीय कश्मीर की मुख्यधारा से जुड़े नेताओं के साथ खड़ा होगा। संसद का सत्र अभी भी चल रहा है और हमारी आवाज खामोश नहीं रहेगी।"
विपक्षी दलों की बात की जाए तो लोकसभा में कॉन्ग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, डीएमके लीडर टीआर बालू को भी पहली कतार में स्थान दिया गया है। जेडीयू, तृणमूल कांग्रेस और वाईएसआर कांग्रेस के कुछ सदस्यों को भी प्रथम पंक्ति में जगह मिली है।
यह बिल भाजपा और मोदी का संदेश था- समर्थकों और विरोधियों दोनों के लिए। दोनों को ही समान संदेश- सरकार राज्यसभा में बहुमत में भले न हो, लेकिन जो उसे करना है, जिसे वह उचित समझती है, उसे वह करके रहेगी।