विषय: History

महाराणा प्रताप

‘तू भोजन कुत्ते की तरह चाट या मत खा’ – हल्दीघाटी की एक अनसुनी कहानी में गद्दारों के लिए संदेश

महाराणा प्रताप ने मानसिंह जैसे कुलघाती से क्या कहा? उसके साथ कैसा व्यवहार किया? उनके वो वाक्य आज भी प्रासंगिक हैं लेकिन महराणा की युद्धकला की चर्चाओं के बीच उनके विचार छिप जाते हैं। देश के गद्दारों को लेकर क्या सोचते थे प्रताप? चलिए क़रीब 450 वर्ष पीछे।
जावेद अख़्तर, घूँघट

बुर्क़े की तुलना घूँघट से करने से पहले जरा भारत का इतिहास भी देख लें जावेद ‘ट्रोल’ अख़्तर

घूँघट को नायिका की सुंदरता का पर्याय मानकर कई गीत लिखने वाले जावेद अख़्तर के लिए अब यह एक कुरीति हो गई है क्योंकि 'उनके' बुर्क़े पर आँच जो आ गई है। घूँघट को समझने के लिए जावेद अख़्तर को 'मृच्छकटिकम्' पढ़नी चाहिए, विजयनगर साम्राज्य पर इस्लामी आक्रांताओं की क्रूरता जाननी चाहिए।

तो भारत में हड़प्पा के सामानांतर भी थी कोई सभ्यता.. यहाँ से खुदाई में मिली चीजें करती हैं इशारा

यमुना के तीर पर हड़प्पा के समकालीन ऐसी कौन सी संस्कृति बसी थी जहाँ इस प्रक्रिया से ताँबे के हथियार बनाए जाते थे? रथ, मुकुट, पाए वाली शव पेटिकाएँ, हवनकुंड, जली लकड़ियाँ और न जानें क्या-क्या। देखें गैलेरी। मरे हुए नेवले और जंगली सूअर का क्या औचित्य है?

कमाल ‘अतातुर्क’ का ख़ूनी जुनून था जिन्ना के सर पर: अभिजित चावड़ा

अतातुर्क से प्रभावित जिन्ना हिंदुस्तान लौटे और देश का बँटवारा करा कर ही दम लिया; उनके हिंसक पैंतरे अतातुर्क द्वारा यूनानियों के कत्लेआम की नक़ल थी।
पंडारा रोड

एक क्लर्क की गलती और… दिल्ली को बसाने वाले पांडवों का नाम मिट गया दिल्ली के नक्शे से

भारत के गौरवशाली इतिहास का एक हिस्सा कई सालों से वर्तनी की त्रुटि के कारण दबा हुआ है। जिन पांडवों ने भारतवर्ष को इंद्रप्रस्थ दिया, उसी इंद्रप्रस्थ (दिल्ली) में उनका नाम कहीं भी नहीं है। और यह हुआ अंग्रेजी के v और r लेटर्स के कारण।
मंगल पांडे

शेख पल्टू: मंगल पांडे को पकड़ने, अंग्रेज अफसर को बचाने वाला मुस्लिम सिपाही, हुआ था mob lynching का शिकार

शेख पल्टू गौभक्तों के आतंक को रोकने वाले पहले वीर भी थे, और mob lynching के पहले शहीद भी। इतिहास के पन्नों से उखाड़ कर लाई गई वीरगाथा...
कॉन्ग्रेस, हिंसा

दंगों के नाम पर डराने वाली कॉन्ग्रेस का इतिहास 16000+ हिंदू-मुसलमान-सिख के खून से लथपथ है

कॉन्ग्रेस शासनकाल में कई भीषण दंगे हुए, जिनको लेकर उन पर सवाल नहीं दागे गए। भाजपा शासनकाल में देश अपेक्षाकृत शांत है और ऐसी घटनाओं में कमी आई है। अगर हम 2011-2013 की बात करें तो उस दौरान भी कॉन्ग्रेस शासित राज्य सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में सबसे ज्यादा थे।
लाल बहादुर शास्त्री

किसने और क्यों शास्त्री जी के चेहरे पर चन्दन मल दिया था? पढ़िए उनके नाती संजय नाथ की जुबानी

"मैं रूस से आए निमंत्रण के बाद अपनी नानी के साथ ताशकंद गया, जब मैं उनके कमरे में गया (जहाँ शास्त्रीजी की मृत्यु हुई थी) तो मुझे पता चला कि उनके कमरे में एक घंटी तक नहीं थी। सरकार ने झूठ बोला था कि उनके कमरे में कई फोन थे। क्यों?"
देव आनंद

जब बनी थी बॉलीवुड की अपनी राजनीतिक पार्टी, किसको था ख़तरा, कौन डरा, किसने धमकाया, क्या हुआ अंजाम?

जब आपातकाल के बाद देव आनंद की अध्यक्षता में बनी थी बॉलीवुड की अपनी राजनीतिक पार्टी। जानिए क्या हुआ इसके बाद। राजनारायण ने क्यों जोहर के हाथ-पाँव तोड़ने की धमकी दी थी? क्या हुआ नेशनल पार्टी का और क्यों अकेले पड़ गए थे देव आनंद?
रणजीत सिंह

कोहिनूर धारण करने वाला सिख सम्राट जिसकी होली से लाहौर में आते थे रंगीन तूफ़ान, अंग्रेज भी थे कायल

कहते हैं कि हवा में गुलाल और गुलाबजल का ऐसा सम्मिश्रण घुला होता था कि उस समय रंगीन तूफ़ान आया करते थे। ये सिख सम्राट का ही वैभव था कि उन्होंने सिर्फ़ अंग्रेज अधिकारियों को ही नहीं रंगा बल्कि प्रकृति के हर एक आयाम को भी रंगीन बना देते थे।
महाराजा रणजीत सिंह

#बालाकोट: हूरों के चक्कर में मारे गए थे 300 जेहादी… वो भी 188 साल पहले

सैयद अहमद शाह ने राजा रणजीत सिंह द्वारा अज़ान और गौतस्करी पर प्रतिबंध लगाने की बात सुनकर जिहाद की घोषणा कर दी थी। जिस समय पर बरेलवी बालाकोट पहुँचा उस समय उसके साथ 600 जिहादी थे और पेशावर के हज़ारों पठानों द्वारा भी उसे समर्थन दिया जा रहा था।
सारागढ़ी का युद्ध

केसरी की असली कहानी: जब 21 सिखों ने 10000 इस्लामी आक्रांताओं को चटाई थी धूल

संख्या में मात्र 21 लेकिन अनंत साहस एवं पराक्रम से भरे सिख जवानों ने 10,000 इस्लामी आक्रांताओं के पसीने छुड़ा दिए। हम भले ही उनके बलिदान को भूल गए लेकिन ब्रिटेन और फ्रांस में वे आज भी याद किए जाते हैं- सम्मान के साथ।

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