Homeविविध विषयभारत की बातसमाज को बचाने के लिए वीर देते थे खुद का बलिदान, महान भारतीय परंपरा...

समाज को बचाने के लिए वीर देते थे खुद का बलिदान, महान भारतीय परंपरा का बेंगलुरु में मिला साक्ष्य: बुरी शक्तियों को भगाने के लिए होता था बलिदान

यह बलिदान किसी देवी-देवता को प्रसन्न करने या कठिन समय में आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद अपना आभार व्यक्त करने के लिए दिए जाते थे। बलिदान के भी एक से अधिक तरीके प्रचलित थे। कुछ लोग तलवार से अपना सर धड़ से अलग कर लेते थे तो कुछ ऊँचाई से किसी तलवार पर कूदते थे।

13वीं और 14वीं शताब्दी में बेंगलुरु के वीर समाज को बुरी शक्तियों से बचाने के लिए खुद का बलिदान देते थे। वह स्वयं का वध करके समाज का उद्धार करते थे। इन्हें समाज में नायक के तौर पर देखा जाता था। यह सभी जानकारियाँ इन बलिदानियों की मूर्तियाँ मिलने के बाद हो रहे एक शोध में सामने आई हैं।

वर्तमान में बेंगलुरु में द मिथिक सोसायटी नाम की एक संस्था यहाँ से प्राप्त अलग अलग मूर्तियों को 3D डिजिटल तरीके से संरक्षित कर रही है। इन्हें बेंगलुरु के अलग अलग हिस्सों से 14 ऐसी मूर्तियाँ प्राप्त हुई हैं जिनमें से स्वयं के बलिदान देते हुए लोगों को प्रदर्शित किया गया है। शोधकर्ताओं ने बताया है कि प्राचीन बेंगलुरु में यह चलन था कि लोग समाज को बचाने के लिए खुद का बलिदान देने से नहीं कतराते थे।

डेक्कन हेराल्ड को इस शोध के मुखिया उदय कुमार ने बताया, “यह मूर्तियाँ दर्शाती हैं कि इस इलाके में खुद का बलिदान दिया जाता था। ये बलिदान अधिकांश समय समाज में व्याप्त बुराई को दूर करने के लिए दिए जाते थे। इन बलिदान को वीरतापूर्ण कार्य माना जाता था क्योंकि यह समाज या गाँव की भलाई के लिए किया जाता था। आमतौर पर, यह बड़ी समस्याओं जैसे कि सूखे को खत्म करने या फिर महामारी को सही करने के लिए दिए जाते थे।”

यह बलिदान किसी देवी देवता को प्रसन्न करने या कठिन समय में आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद अपना आभार व्यक्त करने के लिए दिए जाते थे। बलिदान के भी एक से अधिक तरीके प्रचलित थे। कुछ लोग तलवार से अपना सर धड़ से अलग कर लेते थे तो कुछ एक ऊँचाई से किसी तलवार पर कूदते थे।

बेंगलुरु के अलग अलग इलाकों में यह मूर्तियाँ मिली हैं। इनमें से कुछ मूर्तियों में सजावट भी दिखती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि जिनके शरीर पर गहने आदि दिख रहे हैं, वह बलिदानी राजपरिवार के सदस्य हो सकते हैं। कई मूर्तियाँ पुरातन मंदिरों के निकट पाई गई हैं। बताया गया है कि जिन लोगों ने अपने बलिदान दिए, इतिहास में उनके सम्मान में मूर्तियाँ बनाई गईं।

हालाँकि, यह कोई पहली बार नहीं है जब कर्नाटक में ऐसी मूर्तियाँ पाई गई हैं। इससे पहले 2018 में भी स्वयं का बलिदान देने सम्बंधित मूर्तियाँ कर्नाटक के ही शिवमोगा में पाई गईं थी। इनमें भी जिन लोगों को प्रदर्शित किया गया था, वह स्वयं का बलिदान देते हुए देखे गए थे। बेंगलुरु में पाई गई मूर्तियों के सम्बन्ध में शोधकर्ताओं ने बताया है कि इनकी खोज के बाद आमजनों को इनकी वीरतापूर्ण कहानियों के विषय में बताया जाएगा। इसके लिए एक डिजिटल मानचित्र भी तैयार किया गया है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘हर हिंदू घर में है संभावित हत्यारा-बलात्कारी’: वामपंथी अपूर्वानंद ने हिंदुओं के खिलाफ फिर उगला जहर, मुस्लिमों को बताया पीड़ित

यूट्यूब चैनल 'सत्य हिंदी' पर वामपंथी अपूर्वानंद ने फिर हिंदुओं के खिलाफ जहर उगला। कहा कि हर हिंदू घर में संभावित हत्यारा-बलात्कारी छिपा हुआ।

‘राख’ पहली नहीं: ‘तांडव’ में हिंदू देवताओं का मजाक, ‘दहाड़’ में लव जिहाद पर पर्दा, ‘पाताल लोक’ में हिंदू-सिखों की नकारात्मक छवि; लंबी है...

किरदारों की पहचान बदलना, हिंदुओं को खलनायक और मुसलमानों को पीड़ित दिखाना: ‘दहाड़’ से ‘राख’ तक Prime Video के शोज में दिखता एक जैसा पैटर्न।
- विज्ञापन -