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Jawaharlal Nehru

‘मेविस्तान’ बनाने का सपना, अलवर-भरतपुर में हिंसा और फिर गाँधी-नेहरू का हस्तक्षेप: जानिए मेवात के उस इतिहास की पूरी कहानी, जिसने बदल दिया इलाके...

मेविस्तान की माँग, 1933 का गोविंदगढ़ संघर्ष, 1947 का अलवर-भरतपुर घटनाक्रम और गाँधी-नेहरू के हस्तक्षेप से जुड़ी मेवात की पूरी कहानी जानिए।

क्या भारत की राजनीति पहली बार पूरी तरह ‘हिन्दू-केंद्रित’ हो गई है?

क्या भारत की राजनीति का सबसे बड़ा बदलाव चुनावी नतीजों में नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस के केंद्र में हुआ है? PM मोदी मजबूत हों या कमजोर, सत्ता में BJP रहे या विपक्ष आए, क्या हिन्दू पहचान और हिन्दू समाज से जुड़े सवाल अब भारतीय राजनीति के केंद्रीय विमर्श का हिस्सा बन चुके हैं?

‘गोली मार दो, लेकिन पूरा ‘वंदे मातरम’ नहीं गाएँगे’: 76 साल बाद भी नहीं बदला कॉन्ग्रेसियों का चरित्र, इस्लामी कट्टरपंथियों को खुश करने के...

केरल में कॉन्ग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन ने कहा है, " नरेंद्र मोदी हमें गोली मारने की धमकी दें, तब भी 'वंदे मातरम' को पूरा नहीं गाया जाएगा।"

टोक्यो में महाविनाशकारी भूकंप की चेतावनी, अब दूसरी राजधानी ढूँढ रहा जापान: जानें- कैसे यह बना राजनीतिक विवाद; भारत में दूसरी राजधानी पर कब-कब...

जापान ने दूसरी राजधानी बनाने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। जानिए इसकी जरूरत, कानून, फायदे, विवाद और भारत से जुड़ा कनेक्शन।

एक्सपोज हुए कॉकरोच तो ‘आंदोलनजीवी’ रचने लगे ‘पंचशील’ का प्रपंच, जानिए- ‘जय भीम’ और ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नाम पर कैसे हिंदुओं को किया जाता...

जब CJP का एजेंडा एक्सपोज हुआ, तो 'आंदोलनजीवी' योगेंद्र यादव ने 'पंचशील' का प्रपंच रच डैमेज कंट्रोल किया। इसमें 'जय भीम' और 'इंकलाब जिंदाबाद' से हिंदुओं को गुमराह किया जाता रहा है।

इतिहास की भूल सुधार या नई सियासी जंग? ‘सुहरावर्दी एवेन्यू’ के ‘गोपाल मुखर्जी रोड’ बनने से लगी कॉन्ग्रेसियों के ‘अंग विशेष’ में आग: जानें...

कोलकाता में 'सुहरावर्दी एवेन्यू' का नाम अब 'गोपाल मुखर्जी रोड' हुआ। कॉन्ग्रेस-वामपंथियों ने ध्रुवीकरण का आरोप लगाकर कड़ा विरोध जताया है।

PM मोदी ने नेहरू को पीछे छोड़ रचा नया इतिहास: बतौर निर्वाचित प्रधानमंत्री 4399 दिन पद पर रहने का बनाया रिकॉर्ड, वैश्विक नेताओं ने...

PM मोदी लगातार सबसे लंबे समय तक भारत के निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सेवा करने वाले नेता बन गए हैं। जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ा।

1937 के जिन्ना वाले एजेंडे से लेकर आज के अरशद मदनी तक, ‘वंदे मातरम’ पर कट्टरपंथ का प्रहार: भारत में अब भी जीवित है...

जिन्ना ने जो विभाजनकारी बीज बोया था, आज की कट्टरपंथी ताकतें उसे ही सींच रही। इन तत्वों की सोच में न तो पहले कोई परिवर्तन था और न आगे होगा।

नेहरू की इंटेलिजेंस की अनदेखी से लेकर इंदिरा गाँधी की CIA से जुड़ी दखलअंदाजी तक: निजी फायदे के लिए देश के हितों को बेचने...

प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू ने खुफिया तंत्र को महत्व नहीं दिया, जिसका खामियाजा भारत को 1962 में उठाना पड़ा। इंदिरा गाँधी ने सीआईए को अंदरुनी राजनीति में दखल देने का मौका दिया।

नेहरू की किस मानसिकता के कारण भारत को चीन से मिली पराजय, कॉन्ग्रेस शासन की विफलता की साहित्यिक समीक्षा

नेहरू अपने अनुयायियों के साथ मिलकर अपनी देवताओं की छवि गढ़ने का प्रयास कर रहे थे। सभी की चुप्पी में नेहरू का डर था लेकिन दिनकर नहीं डरे।

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