क्या भारत की राजनीति का सबसे बड़ा बदलाव चुनावी नतीजों में नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस के केंद्र में हुआ है? PM मोदी मजबूत हों या कमजोर, सत्ता में BJP रहे या विपक्ष आए, क्या हिन्दू पहचान और हिन्दू समाज से जुड़े सवाल अब भारतीय राजनीति के केंद्रीय विमर्श का हिस्सा बन चुके हैं?
जब CJP का एजेंडा एक्सपोज हुआ, तो 'आंदोलनजीवी' योगेंद्र यादव ने 'पंचशील' का प्रपंच रच डैमेज कंट्रोल किया। इसमें 'जय भीम' और 'इंकलाब जिंदाबाद' से हिंदुओं को गुमराह किया जाता रहा है।
प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू ने खुफिया तंत्र को महत्व नहीं दिया, जिसका खामियाजा भारत को 1962 में उठाना पड़ा। इंदिरा गाँधी ने सीआईए को अंदरुनी राजनीति में दखल देने का मौका दिया।