प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू ने खुफिया तंत्र को महत्व नहीं दिया, जिसका खामियाजा भारत को 1962 में उठाना पड़ा। इंदिरा गाँधी ने सीआईए को अंदरुनी राजनीति में दखल देने का मौका दिया।
संसद में कॉन्ग्रेस बिना छपी किताब का सहारा लेकर सरकार और प्रधानमंत्री को बदनाम करने की कोशिश की। लेकिन जब निशिकांत दुबे ने छपी किताबें पेश की, तो कॉन्ग्रेस बौखला गई।
सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार से परेशान प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 17 चिट्ठियाँ लिखीं। इस दौरान राष्ट्रपति से लेकर तमाम मुख्यमंत्रियों तक को चिट्ठियाँ लिखी।