जावड़ेकर के इस ट्वीट के बाद तमिल इंडस्ट्री और रजनीकांत के फैंस के साथ-साथ अन्य सिनेप्रेमियों ने भी ख़ुशी जताई। जावड़ेकर ने लिखा कि भारत सरकार ने भारतीय सिनेमा में रजनीकांत द्वारा पिछले कई दशकों में दिए गए उत्कृष्ट योगदान को सम्मानित करने का फ़ैसला लिया है।
सरकार ‘Framework Agreement’ के दायरे में झंडा और संविधान के मुद्दों के न आने की बात कर रही है। NSCN (IM) इन दोनों का वादा किए जाने की बात कह रही है। उसकी इस जिद से शांति वार्ता को नुकसान हो रहा था।
कैसे इन अनधिकृत कालोनियों में रहने वले लोगों को केंद्र सरकार के इस एक फैसले के बाद घर का मालिकाना हक मिलने से बहुत फायदा पहुँचेगा। उन्होंने कहा कि इन कालोनियों में रह रहे लोगों को ऋण लेने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सरकार के इस फैसले से उन्हें बैंकों से ऋण लेने में समस्या नहीं आएगी।
संभावना शांति समझौते पर हस्ताक्षर बिना NSCN (IM) के ही होने की सूरत बनती दिख रही है। इसके चलते नागालैंड में कानून व्यवस्था के लिए खतरा उत्पन्न हो सकता है।
शाह ने आज के पेपर फॉर्मेट की जगह डिजिटल पर जोर देते हुए कहा कि ऐसा होने से मुख्यालय को यह देखने में आसानी रहेगी कि जवानों की तैनाती का रोटेशन इस प्रकार से हो रहा है या नहीं, जिससे वे प्रतिवर्ष 100 दिन अपने परिवार के साथ व्यतीत कर सकें।
नगालैंड के गवर्नर रवि ने कहा है कि अंतिम समझौता लिखे जाने को तैयार है। लेकिन,
NSCN-IM नेता बेवजह नई-नई कल्पित सामग्री जोड़ कर इसमें रोड़ा अटका रहे हैं। वे लोगों को गुमराह करने की कोशिश भी कर रहे हैं।
पार्ले के अधिकारी मयंक शाह ने कर्मचारियों की छॅंटनी की खबरों का आधारहीन बताया है। उनका कहना है कि चीजों को गलत तरीके से पेश कर नकारात्मकता फैलाई गई। उन्होंने माना कि छॅंटनी इंडस्ट्री के विकास दर और बिक्री पर निर्भर करता है।
रघुराम राजन का कहना है कि जन-कल्याणकारी योजनाओं पर सरकार को कम ख़र्च करना चाहिए। चुनाव से पहले राजन ने 3.6 लाख करोड़ रुपए के बजट वाली कॉन्ग्रेस की 'न्याय योजना' का समर्थन किया था। इसे कारगर भी बताया था।
केंद्रीय मंत्री नक़वी ने अपने ट्वीट में लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत "विश्व गुरु" बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ में अपने भाषण से मोदी जी ने एहसास कराया कि भारत दुनिया का सबसे मजबूत और बड़ा लोकतंत्र है।
वामपंथी नेता सीताराम येचुरी ने भी लिखा कि मोदी सरकार अपने दोस्त उद्योगपतियों को बचाने के लिए सार्वजनिक उपक्रमों को बर्बाद करने पर तुली हुई है। सूर्यकांत मिश्रा और सुजन चक्रवर्ती सहित अन्य वामपंथी नेताओं ने भी इस ख़बर के आधार पर सरकार को आड़े हाथों लिया।