Thursday, May 23, 2024

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Mughal Rule

मिट गया भोपाल के नवाब का नाम: मध्य प्रदेश का नसरुल्लागंज अब कहलाएगा भैरूंदा, शिवराज सरकार ने जारी किया आदेश

मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार ने नसरुल्लागंज का नाम बदलकर भैरुंदा कर दिया है। सरकार की ओर से इसका नोटिफिकेशन भी जारी हो गया।

मोदी सरकार में डर का माहौल है… ‘कुपोषित’ अकबर को देख लोगों को याद आया कॉन्ग्रेस के समय का ‘खुश अकबर’, बोले – आइंस्टीन...

"मोदी सरकार में तो अकबर अवसादग्रस्त, कुपोषित, और एक ऐसे रुग्ण बूढ़े व्यक्ति के रूप में दिख रहा है जो दिमागी समस्याओं से जूझ रहा हो।"

मुगलों ने सब गलत किया तो ताजमहल और लाल किले को गिरा दो: वेब सीरीज में अकबर बने नसीरुद्दीन शाह के बोल, कहा- वे...

मुगल इतने ही बुरे थे तो मुगलों द्वारा बनाई गई स्मारकों को गिरा क्यों नहीं देते? ताजमहल, लाल किला या कुतुब मीनार को गिरा देना चाहिए।

विदेशी आक्रांताओं द्वारा रखे गए नामों को बदला जाए: वकील अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की PIL, कहा- नाम पता करने के...

वकील अश्विनी उपाध्याय ने याचिका के साथ 1000 स्थानों के नाम कोर्ट के सामने रखे, जिन्हें विदेशी आक्रान्ताओं ने बदल दिए थे।

औरंगजेब ने मथुरा को कर दिया था इस्लामाबाद, वृंदावन को मोमिनाबाद: मुगल काल के सिक्कों और दस्तावेजों में है जिक्र

मुगल आक्रांता औरंगजेब ने ना सिर्फ हिंदू मंदिरों को तोड़वाया, बल्कि मथुरा का नाम बदलकर इस्लामाबाद और वृंदावन का मोमिनाबाद करवा दिया।

‘जगह तो अच्छी है लेकिन नंगी मूर्तियाँ कर रहीं खराब’: जब ‘गाजी’ बाबर ने मुगलिया फ़ौज से कहा – जैन प्रतिमाओं को तोड़ डालो:...

बाबर ने लिखा था, "पूर्णरूपेण नंगी मूर्तियों की प्रदर्शनी लगी हुई है। उनके जननांग भी नहीं ढँके हुए हैं। मैंने उन्हें तबाह करने का आदेश दिया।"

मुरब्बा-पटाखा के बाद ‘चिकनकारी’ भी हुआ मुगलों का, 2500 साल पुराने अजंता-चन्द्रकेतुगढ़ को भूले: राजा हर्ष भी कढ़ाई की इस कला के थे शौकीन

480 ईसापूर्व के अजंता की गुफाओं में 'चिकनकारी' जैसी कलाकृति है। 2500 साल पुरानी चन्द्रकेतुगढ़ की एक मूर्ति में ये है। राजा हर्षवर्धन इसके शौक़ीन थे। मुगलों को श्रेय क्यों?

‘मेरे मामा मेरी मातृभूमि से बढ़कर नहीं हो सकते’: जिसने उत्तर-पूर्व की रक्षा के लिए मामा का भी किया वध, जिसके ‘त्रिभुज’ में औरंगजेब...

मुगल आक्रांताओं से उत्तर-पूर्व भारत की पवित्र भूमि की रक्षा करने वाले वीरयोद्धा लाचित बरपुखान का जीवन और व्यक्तित्व शौर्य, साहस, स्वाभिमान, समर्पण और राष्ट्रभक्ति का पर्याय है।

50000 की मुगलिया फौज, पूर्वोत्तर के पानी से गई हार: यूँ ही नहीं NDA का सर्वश्रेष्ठ कैडेट पाता है ‘लाचित बरपुखान’ सम्मान

लाचित बरपुखान ने पूर्वोत्तर की जमीन पर मुगलों की बर्बर विस्तारवादी मंसूबों को दफन कर दिया। उनके पराक्रम में इतना बल था कि उससे टकराने के बाद मुगलों ने कभी पूर्वोत्तर पर काबिज होने का स्वप्न न देखा।

औरंगजेब मर गया पर उस राठौड़ से जीत न पाया, इस्लामी सरदार देते थे टैक्स: मारवाड़ की वह अभेद्य दीवार जिससे टकरा मुगल हुए...

जसवंत सिंह की मौत हो गई। मारवाड़ के नवजात उत्तराधिकारी अजीत सिंह की रक्षा का जिम्मा दुर्गादास राठौड़ ने उठाया। औरंगजेब मर गया, जीत नहीं पाया।

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