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मिट गया भोपाल के नवाब का नाम: मध्य प्रदेश का नसरुल्लागंज अब कहलाएगा भैरूंदा, शिवराज सरकार ने जारी किया आदेश

भोपाल के नवाब परिवार के सबसे बड़े बेटे नसरुल्ला खाँ को यह इलाका जागीर में दी गई थी। उस दौरान इसका नाम भौरुंदा ही थी। जब यह इलाका मुगलों के अधीन आया तब इसका नाम बदलकर नसरुल्लागंज कर दिया गया था।

मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने एक और शहर का नाम बदल दिया है। शिवराज सिंह चौहान सरकार ने सीहोर जिले के नसरुल्लागंज का नाम बदल दिया है। अब इसे भैरूंदा के नाम से जाना जाएगा। प्रदेश सरकार ने इसको लेकर एक नोटिफिकेशन भी जारी किया है।

बता दें कि शिवराज सरकार ने नसरुल्लागंज का नाम बदलकर भैरूंदा करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। इसके बाद राज्य सरकार ने शहर का नाम बदलने का नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 2021 में अपने एक कार्यक्रम में नसरुल्लागंज का नाम बदलकर भैरूंदा करने की घोषणा की थी। यह इलाका मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र बुधनी में आता है। यहाँ के लोग लंबे समय से नाम बदलने की माँग करते आ रहे थे।

इससे पहले राज्य सरकार ने भोपाल के इस्लाम नगर का नाम बदलकर जगदीशपुर और होशंगाबाद का नाम बदलकर नर्मदापुरम कर दिया था। इतना ही नहीं, इसी साल हबीबगंज रेलवे स्टेशन का भी नाम बदलकर रानी कमलापति रेलवे स्टेशन कर दिया गया था।

भोपाल के मिंटो हॉल का भी नाम बदलकर कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर किया गया है। अब कहा जा रहा है कि जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट का नाम बदलकर रानी दुर्गावती एयरपोर्ट नाम रखने का प्रस्ताव राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को भेजा है।

नसरुल्लागंज के इतिहास को देखें तो इसका संबंध भोपाल के नवाब परिवार से है। नवाब सुल्तानजहाँ बेगम ने अपने तीनों पुत्रों को भोपाल के पास जागीर दी थी। सबसे बड़े बेटे नसरुल्ला खाँ को दी गई जागीर के नाम पर उसका नाम नसरुल्लागंज पड़ा। इसी प्रकार अब्दुल्लागंज, अब्दुल्ला खाँ की जागीर थी।

सुल्तानजहाँ बेगम ने अपने सबसे छोटे बेटे हमीदउल्ला को चिकलोद की जागीर दी थी। बाद में नसरुल्लाह भोपाल रियासत का नवाब बना। नई दुनिया के अनुसार, भोपाल के 1908 के राजपत्र घोषणा में नसरुल्लागंज का नाम भैरुंदा ही बताया गया था।

उस राजपत्र में कहा गया है कि कि भैरुंदा भोपाल रियासत के दक्षिणी संभाग के आठ परगना में से एक परगना था। उस समय भैरुंदा और आसपास के इलाकों में दरी बुनने का काम होता था। इसकी वजह से काफी संख्या में यहाँ बुनकर रहते थे।

दरअसल, यहाँ निवास करने वाले कलोता समाज के लोगों के अराध्य देव भैरव महाराज हैं। भैरव नाथ में आस्था होने के कारण इस गाँव का भैरुंदा रखा था। भोपाल और आसपास के क्षेत्र में मुगलों का राज कायम हुआ तो उन्होंने भैरुंदा का नाम बदलकर नसरुल्लागंज कर दिया गया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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