Sunday, September 25, 2022

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Vivekananda

नेताजी बोस हों या पंडित नेहरू… दोनों की किताबों में वो शख्स थे कॉमन, जिनके लिए भारत माता ही थी आराध्य देवी

"यह जननी जन्मभूमि भारत माता ही मानो आराध्य देवी बन जाए। अपना सारा ध्यान इसी एक ईश्वर पर लगाओ, हमारा देश ही हमारा जाग्रत देवता है।"

जननी जन्मभूमि भारत-माता ही आराध्य देवी… जब स्वामी विवेकानंद ने अन्य देवी-देवताओं को भूलने का किया था आह्वान

“निःसंदेह स्वामी विवेकानन्द धर्म महासभा के सर्वाधिक लोकप्रिय एवं प्रभावशाली। कट्टर से कट्टर ईसाई भी कहते हैं कि वे मनुष्य में महाराज हैं।”

‘मेरा वाला ही एकमात्र पैगम्बर, बाकी सब को खत्म कर दो’: इस्लाम को लेकर 120 साल पहले स्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद ने फ़रवरी 3, 1900 को कैलिफोर्निया के पासाडेना स्थित शेक्सपियर क्लब में इस्लाम और मुस्लिमों को लेकर बात की थी।

जब विवेकानंद ने कहा- संन्यासी हूँ तो क्या हृदय की कोमलता का भी त्याग कर दूँ

स्वामी विवेकानंद का जीवन बहुत लंबा न होने के बावजूद, सौभाग्य से विभिन्न समय पर लिखे गए पत्रों, संस्मरणों, लेखों और हँसी-ठिठोली से हम वंचित नहीं हुए हैं। खास बात ये है कि उनके लिखे कई पत्र, संस्मरण आज उनके न रहने के लगभग एक शताब्दी के बाद भी कई नए रहस्य उद्घाटित कर रहे हैं।

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