चुनावी हिंसा, संदेशखली और चोपरा में पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए ममता बनर्जी ने क्या कार्रवाई की? केंद्र सरकार बार-बार टास्क फ़ोर्स और पॉक्सो अदालतों के गठन के लिए पत्र भेजती रही, TMC सरकार सोई रही।
उसने एक बेटी को जन्म दिया। बेटी के जन्म के बाद सोहैल पीड़िता को ले कर बदायूँ आ गया। घर आ कर पीड़िता को सोहैल के मुस्लिम होने और खुद को धोखा मिलने की जानकारी हुई।
रास्ते में चाँद बाबू पीड़िता के पीछे कुछ छिड़कता जिसका विरोध करने पर वह खुद से निकाह करने का दबाव बनाता है। कई दिनों तक प्रताड़ित होने के बाद पीड़िता ने अपनी माँ को सारी बात बताई।
मुफ़्ती मेहँदी ने पीड़िता से कहा, "पुलिस से बताओगी तो तुम्हें और तुम्हारे पूरे परिवार को जान से खत्म कर दूँगा।" डरी-सहमी पीड़िता ने आखिरकार सारी बात अपनी माँ को बता दी।
पीड़िता पढ़ाई छोड़ कर शामली के झिंझाना स्थित अपने गाँव वापस आ गई। इसके बावजूद ज़ाकिर अपनी हरकतों से बाज नहीं आया और किसी परिचित के साथ पीड़िता के गाँव तक पहुँच गया।