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दिहाड़ी मजदूर का किया काम, ट्रक के खलासी बने… जानिए कौन हैं 5 बार के CM को हराने वाले लक्ष्मण बाग, पहली बार चुनाव हारे हैं नवीन पटनायक

लक्ष्मण बाग एक गरीब किसान परिवार से आते हैं और एक समय में दिहाड़ी मजदूरी किया करते थे। उन्होंने ट्रक पर खलासी का काम करके भी अपना जीवन गुजारा था। बाद में जाकर उन्होंने खुद ट्रक खरीद ली और ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में लग गए। इसके बाद उन्होंने इसी व्यापार में ध्यान देते हुए बढ़त बनाई। बाद में काम चलने पर राजनीति में किस्मत आजमाई।

ओडिशा के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी का प्रदर्शन लगातार चर्चा में है। इस बीच उस व्यक्ति के नाम पर भी बात हो रही है जिन्होंने बीजू जनता दल के प्रमुख चेहरे व ओडिशा के 5 बार के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को 16000 वोटों से हराया है। ये हार नवीन पटनायक के राजनीतिक जीवन में प्रवेश करने के बाद पहली हार है जो उन्हें कांटाबांजी से मिली है। नवीन पटनायक को हराने वाले भारतीय जनता पार्टी के लक्ष्मण बाग हैं।

आगे बढ़ने से पहले बता दें कि नवीन पटनायक ने ओडिशा में दो सीटों पर चुनाव लड़ा था। एक हिंजिली और दूसरा कांटाबांजी। हिंजिली में उन्हें मात्र 4600 वोटों के अंतर से जीत मिली है। वहीं कांटाबांजी में उनकी किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और वो 16000 वोट से हार गए।

चुनाव आयोग की साइट पर मौजूद जानकारी के अनुसार लक्ष्मण बाग को 90876 वोट मिले हैं। वहीं नवीन पटनायक सिर्फ 74 हजार 532 वोट जुटा पाए। लक्ष्मण बाग की जीत के बाद अब लोग उनके बैकग्राउंड को देखते हुए उनकी तारीफ कर रहे हैं।

दरअसल, लक्ष्मण बाग एक गरीब किसान परिवार से आते हैं और एक समय में दिहाड़ी मजदूरी किया करते थे। उन्होंने ट्रक पर खलासी (ट्रक पर सामान उतारने-चढ़ाने) का काम करके भी अपना जीवन गुजारा था। बाद में जाकर उन्होंने खुद ट्रक खरीद ली और ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में लग गए।

इसके बाद उन्होंने इसी व्यापार में ध्यान देते हुए बढ़त बनाई। बाद में काम चलने पर राजनीति में किस्मत आजमाई। 2014 में चुनाव लड़ा तो वो तीसरे स्थान पर रहे। फिर 2019 में दोबारा इसी जगह से खड़े हुए पर कॉन्ग्रेस के संतोष सिंह सलूजा से मात्र 128 वोटों से हार गए थे। इसके बाद उन्होंने 5 साल काम किया और अपनी पैठ बनाई। 2024 आते ही उनकी मेहनत का परिणाम उन्हें मिला। उन्होंने 90 हजार वोट पाकर जीत हासिल की। वहीं कॉन्ग्रेस के संतोष सिंह को 64 हजार वोटों से हराया।

हर पार्टी के स्थानीय नेता भी उनकी इस जीत पर हैरान हैं। कहा जा रहा है कि उन लोगों को पता था कि लक्ष्मण आगे चल रहे हैं लेकिन उन्हें ये नहीं लगा था कि वो नवीन पटनायक को हरा सकते हैं। ये बेहद अकल्पनीय है।

जिस जगह से लक्ष्मण जीते हैं वहाँ उन्होंने श्रमिकों के पलायन का मुद्दा उठाया था। जीत के बाद भी वह इस मामले पर बोलते दिखे। उन्होंने कहा- कांटाबाजी में बेरोजगारी, श्रमिक पलायन और शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था के बुनियादी ढाँचे की कमी है। ये सभी समस्याएँ 10 जून के बाद खत्म होंगी जब नई सरकार बनेगी। अब यहाँ नई शुरुआतज होगी। जनता ने जो किया है पीएम उसका उन्हें रिटर्न गिफ्ट देंगे। विकास मार्ग दिखाएँगे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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