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तुर्क ऐसा है, तुर्क वैसा है… ये केवल बॉलीवुड की फिल्मों का बकवास है, असल में नंबर वन ‘चमन’ मुल्क है तुर्की: पाकिस्तानी गधों से भी हैं गए गुजरे

पाकिस्तान का समर्थन करने वाले तुर्की के लोगों की मूर्खताएँ असीमित हैं। जब उन्हें रूस के झंडे को जलाना था तो उन्होंने डच झंडा जला दिया। इसके बाद डच लोगों ने जब विरोध किया तो वह विरोध में फ्रांस के झंडे जलाने लगे।

तुर्की के लोग पाकिस्तान की जनता से भी ज़्यादा मूर्ख और बुद्धू हैं। 2015 में तुर्की ने रूस के लड़ाकू विमान सुखोई को मार गिराया था। उसके बाद रूस में लोगों ने तुर्की के दूतावास के सामने प्रदर्शन और तोड़फोड़ की। स्वाभाविक रूप से, इसका जवाब तुर्की ने देने की सोची।

तुर्की के लोगों ने जवाब में रूसी झंडे जलाने का कार्यक्रम भी शुरू किया। लेकिन ये मूर्ख रूस और नीदरलैंड के झंडों में अंतर नहीं कर पाए और रूसी झंडे की जगह डच झंडा जला दिया। बिना किसी कारण के झंडा जलाए जाने के चलते नीदरलैंड के लोग तुर्की से नाराज़ हो गए। उन्होंने पूरे देश में हज़ारों तुर्की झंडे जला दिए।

इतना करने के बाद भी उनका गुस्सा कम नहीं हुआ। जब तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन 2017 में नीदरलैंड गए, तो डच सरकार ने उन्हें विनम्रता से कह दिया कि ‘इधर से फूट लो!’ यह सुनकर तुर्की के लोग फिर से भड़क गए, सड़कों पर उतर आए और फिर से झंडे जलाने लगे।

लेकिन मूर्खों के कोई गाँव भले ना होते हों, देश जरूर होता है। इसी का उदाहरण देते हुए उन्होंने डच का विरोध करने को इस बार डच के बजाय फ्रांसीसी झंडे जलाए। उसके बाद, आपने सोचा होगा कि फ्रांसीसी लोग तुर्की के झंडे जलाएँगे।

उन्होंने इसका और भी कड़ा जवाब दिया। उन्होंने तुर्की के झंडे का एक डोरमैट बनाया और उसे रौंद दिया। 2018 में कुवैत में एक व्यक्ति ने अपनी तुर्की की नौकरानी को मार डाला। तुर्की ने अपनी खुफिया एजेंसी से हत्यारे की एक फोटो मँगाई। तुर्की ने इस फोटो अपने टीवी पर बड़े धूमधाम से दिखाया।

उन्होंने यह भी घोषणा की कि वे मोसाद की तरह उसे ढूंढ कर मारेंगे। लेकिन इन तुर्की लोगों ने ‘गौर से देखो इस दरिंदे को’ वाली फोटो समेत जो खबर चलाई, उसमें उन्होंने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून-जे-इनको दिखा दिया। उन्होंने राष्ट्रपति के साथ ट्रम्प कि बेटी को भी दिखाया था। इसके बाद तुर्की की बड़ी लानत-मलानत हुई।

तुर्की के पेपर को इसके बाद माफी माँगनी पड़ी। हालाँकि, इसके बाद भी अगले 2 महीने तक कोरिया में टॉयलेट पेपर पर तुर्की का झंडा लगा रहा। ऐसे देश के लिए चुप रहना ही बेहतर था। लेकिन इस बीच उन्होंने अजरबैजान के लिए आर्मेनिया से झगड़ा किया और अपनी मिसाइलों और विमानों का मज़ाक उड़वाया।

फिर पाकिस्तान की मदद करने आए और उनके ड्रोन की इज्जत में मिट्टी में मिलवा दी। ऊपर से बहिष्कार की वजह से तुर्की का व्यापार और आय भी रसातल को गई। खैर! इस कहानी से सीख मिलती है: ‘तुर्क ऐसा है और तुर्क वैसा है’, ऐसी बकवास सिर्फ़ बॉलीवुड की फिल्मों में होती है। अन्यथा, तुर्की नंबर एक का ‘चमन’ देश है।

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