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इजरायल ने जिस आतंकी अनस-अल को ठोका, उसे इस्लामी-लिबरल बता रहे ‘शरीफ’: मौत के बाद सामने आई अल-जजीरा के जिहादी की सच्चाई

गाजा में इजरायली हमले में अनस अल शरीफ और उसके 4 साथियों की मौत हो गई है। इस पर सोशल मीडिया पर इस्लामी लिबरल गैंग आँसू बहा रहा है। हालाँकि इजरायल पहले ही उसका नाम मोस्ट वॉन्टेड की सूची में शामिल कर चुका था। IDF ने अल जजीरा के 6 पत्रकारों की लिस्ट जारी की थी, जो हमास के लिए काम करता था।

इजरायली हमले में मारे गए अनस अल शरीफ समेत अल जजीरा के 5 कथित पत्रकारों को लेकर सोशल मीडिया इजरायल पर अटैक कर रहा है। कोई उसकी दूर दराज में किए गए रिपोर्टिंग को शेयर कर उसे ‘सच्चा पत्रकार’ साबित करने की कोशिश कर रहा है तो कोई ‘प्रेस टैंट पर अटैक’ कह कर मीडिया को खामोश करने की कवायद करार दे रहा है। हालाँकि इजरायल पहले ही बता चुका था कि अनस उसके ‘हिट लिस्ट’ में शामिल था।

इजरायल के मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में शामिल था अनस

गाजा में इजरायली हमले में अनस अल शरीफ और उसके 4 साथियों की मौत हो गई है। ये सभी अल जजीरा से जुड़े कथित पत्रकार थे। इजरायल पहले ही उसका नाम मोस्ट वॉन्टेड की सूची में शामिल कर चुका था। IDF ने अल जजीरा के 6 पत्रकारों की लिस्ट जारी की थी, जो हमास के लिए काम करता था। इसमें अनस अल शरीफ का नाम भी शामिल था। IDF के मुताबिक अनस अल-शरीफ रॉकेट लॉन्चिंग स्क्वॉड का प्रमुख था और हमास की नुसीरत बटालियन में नुखबा फोर्स कंपनी का आतंकी था।

हालाँकि अल जजीरा ने दावा किया था कि उसके पत्रकार का आंतकी संगठनों से कोई संबंध नहीं है। लेकिन IDF ने इसे खारिज कर कहा था कि उसके पास दस्तावेज मौजूद हैं जिससे साबित होता है कि वह आतंकी था।

इजरायल के खिलाफ अल जजीरा का दुष्प्रचार

अल जजीरा लगातार इजरायल को लेकर दुष्प्रचार करता रहा है। इस साल मई में बेंजामिन नेतन्याहू सरकार ने हमास का प्रोपेगेंडा चलाने के कारण इजरायल के भीतर अल जजीरा को बंद कर दिया था। सितम्बर, 2024 में इजरायल सरकार ने वेस्ट बैंक के रामल्लाह में अल जजीरा ब्यूरो को भी बंद कर दिया था।

अलजजीरा एक ऐसा नेटवर्क है जिसे कतर सरकार फंडिंग करती है। ये इजरायल के खिलाफ खबरें दिखाता है और फिलिस्तीन की मदद करता है। इजरायल कहता रहा है कि अल जजीरा हमास के आतंकियों को रिपोर्टर के रूप में फिलिस्तीन के दूर दराज के इलाके में भेजता है जो मुख्य रूप से आतंकी गतिविधि में शामिल रहते हैं। अनस अल शरीफ इसका अच्छा उदाहरण है जिसे पहले ही इजरायल ने हमास का आतंकी घोषित कर दिया था। आखिर एक वॉन्टेड आतंकी को रिपोर्ट बनाकर अल जजीरा हमास की मदद ही कर रहा है। वह गाजा के लोगों के बीच में छिप कर जिहादी मंसूबों को अंजाम दे रहा था।

लेकिन अनस अल शरीफ की मौत के बाद सोशल मीडिया पर उसके प्रति सहानुभूति जताने वाले इस्लामी और कथित लिबरल गैंग की बाढ़ आ गई है। कोई उसे ‘शहीद’ कह रहा है तो कोई पत्रकारों पर हमले को ‘इजरायली बर्बरता’ करार दे रहा है। इसमें कहा जा रहा है कि दुनिया, मीडिया सब खामोश हैं।

कोई उसे अल जजीरा का बड़ा चेहरा बता रहा है तो साहसपूर्ण रिपोर्टिंग की बात कह रहा है। कोई हमास के हमलावरों की तारीफों के पुल बाँधे जा रहे हैं। यहाँ तक कि परिवार के साथ फोटो और वीडियो शेयर किया जा रहे हैं।

इजरायली हमले को भयावह करार देते हुए सीएनएन ने कहा है कि ये स्थानीय पत्रकारों की स्थिति को बयां करता है। सीएनएन के मुताबिक अल शरीफ हमास के राजनीतिक प्रमुख इस्माइल हनीयेह के पारिवारिक घर के पास एक स्थान से लाइव रिपोर्टिंग कर रहे थे, इसलिए वहाँ मौजूद थे। हनीयेह की मंगलवार को तेहरान में हत्या कर दी गई थी। वहीं बीबीसी ने इसे ‘प्रेस की आजादी’ पर हमला करार दिया है।

लेकिन इससे अनस अल शरीफ की असलियत नहीं बदल सकती। उसके खिलाफ कई तरह के सबूत होने की बात इजरायल पहले से करता रहा है। जिहादी सोच का संबंध किसी पेश से नहीं होता। ये इंजीनियर ओसामा बिन लादेन से लेकर डॉक्टर अल जवाहिरी तक के केस में देखा जा सकता है। पत्रकार बनकर लोगों से बातें करना और उनके बीच रहना तो और आसान है।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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