Homeदेश-समाजसंभल के गाँव में सरकारी जमीन पर कब्जा कर बना लिए थे मस्जिद-मदरसे: अब...

संभल के गाँव में सरकारी जमीन पर कब्जा कर बना लिए थे मस्जिद-मदरसे: अब चलेगा योगी सरकार का बुलडोजर, लगाए गए लाल निशान

संभल में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर अधिकारी एक्शन मोड में हैं। अधिकारियों ने अवैध कब्जे को लेकर मस्जिद, मदरसे और मैरिज हॉल को एक हफ्ते का अल्टीमेटम दिया है। अगर 20 सितंबर तक इन पर अवैध कब्जा नहीं हटाया जाएगा, तो प्रशासन इसे ध्वस्त कर देगा।

संभल में अवैध तरीके से बनाए गए मस्जिद, मदरसे और मैरिज हॉल को प्रशासन ने अल्टीमेटम दिया है। इनका निर्माण सरकारी जमीनों पर किया गया है। यहाँ तक कि तालाब की जमीन पर मदरसे के मुतवल्ली ने अपना घर भी बना लिया है।

इसका जायजा लेने शनिवार (13 सितंबर 2025) को प्रशासनिक अधिकारी के साथ राजस्व विभाग की टीम पहुँची। जाँच में सरकारी जमीन पर पाए गए मस्जिद, मदरसे समेत कई इमारतों पर लाल निशान लगा दिया गया और हफ्ते भर में इसे खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया।

नोटिस में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों को 20 सितंबर तक हटा लेने को कहा गया है, वरना इन्हें ध्वस्त करने की बात कही गई है। दरअसल इस इलाके में कई गाँवों में सरकारी जमीन पहले खाली पड़ी थी। इनपर धीरे-धीरे कब्जा किया गया। पहले कच्चा ढाँचा खड़ा किया गया और फिर पक्की इमारत बना ली गई। इसको देखते हुए अवैध कब्जे को हटाने की मुहिम चल रही है। कई जगहों पर अवैध कब्जे को हटा भी दिया गया है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने किया चिन्हित

तहसीलदार धीरेन्द्र सिंह के नेतृत्व में टीम राया बुजुर्ग गाँव और सलेमपुर सलार गाँव का दौरा किया। तहसीलदार के मुताबिक, सलेमपुर सलार उर्फ हाजीपुर गाँव में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है। इसको लेकर स्थानीय कोर्ट में धारा 67 के तहत केस दायर था।

कोर्ट ने 2 सितंबर 2025 को सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने का आदेश दिया था। लेकिन अभी तक इसे नहीं हटाया गया है। इसलिए ऐसे जमीन पर बनी इमारत पर लाल निशान लगाए गए हैं। गाँव राया बुजुर्ग में गड्ढों वाली सरकारी जमीन पर मस्जिद और तालाब की भूमि पर मदरसे और दो घर बनाए गये हैं। इस घर पर मस्जिद के मुतवल्ली का कब्जा है।

सलेमपुर सलार गाँव में सड़क किनारे की सरकारी जमीन को चारदिवारी से घेर लिया गया है। सामने 4-5 दुकानें हैं और अंदर जाने पर ग्राउंड फ्लोर पर 4 से 5 कमरे बने हैं। पहली मंजिल पर एक कमरा और बरामदा है। इमारत को देखकर ये नहीं लगता कि मदरसा या पढ़ाई-लिखाई का काम यहाँ होता होगा। यहाँ काफी गंदगी थी। इससे पता चलता है कि कोई व्यावसायिक काम यहाँ से किया जा रहा है।

गाँव के सरकारी बंजर भूमि पर एक मस्जिद का निर्माण कर दिया गया है। अब इन इमारतों को ध्वस्त करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया गया है।

तालाब की जमीन पर बना बैक्वेट हॉल

राया बुजुर्ग गाँव में तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा कर मदरसा निर्माण किए जाने की बात सामने आई थी। लेकिन जब जाँच करने के लिए प्रशासनिक टीम पहुँची तो उन्हें वहाँ एक बैक्वेट हॉल मिला। इसे भी हटाने का नोटिस थमा दिया गया है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने जब गाँव में पैमाइश का काम शुरू किया, तो खलबली मच गई। वहाँ बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए, लेकिन अधिकारियों ने सफलतापूर्व जमीन मापने का काम पूरा किया और अवैध इमारतों पर लाल निशान लगाए।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

मुस्लिमों को कवर फायर, हिंदुओं से खुली नफरत: बकरीद पर ‘The Wire’ में अपूर्वानंद का जहरीला लेख, जानिए- दिल्ली दंगों वाले ‘प्रोफेसर’ के ‘सेलेक्टिव...

अपूर्वानंद का 'द वायर' पर लेख कोई निष्पक्ष लेख नहीं, बल्कि एकतरफा रोना है। लेख की हर बात में देश के सिस्टम, हिंदुओं के प्रति गुस्सा दिखता है।

सनातन के स्त्री प्रतीकों के प्रति तिरस्कार, हिंदू विरोध और घृणा का लंबा दौर: जब इस्लाम में अनिवार्य नहीं तो गाय की कुर्बानी पर...

इस्लाम में गाय की कुर्बानी अनिवार्य नहीं, फिर भी क्यों इतना जोर? संविधान, अदालतों के फैसले, गो-संरक्षण कानून और हाल के मामलों पर विस्तृत रिपोर्ट।
- विज्ञापन -