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क्या है नव मध्यम वर्ग, कैसे मोदी राज में हुआ उदय, कैसे इनके दम से पूरा होगा भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का स्वप्न: जानिए India की ग्रोथ स्टोरी में इनका रोल

इस वर्ग को मोटे तौर पर समझें तो Neo Middle Class ऐसा सामाजिक-आर्थिक वर्ग है, जो हाल ही में गरीबी से ऊपर उठ पाया है लेकिन अभी स्थिर और सुरक्षित मध्यमवर्ग की स्थिति तक नहीं पहुँच सका है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (21 सितंबर 2025) को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में नियो मिडिल क्लास (Neo Middle Class) या नव मध्यम वर्ग का जिक्र किया है। पीएम मोदी ने कहा, “पिछले 11 साल में देश में 25 करोड़ लोगों ने गरीबी को हराया है। गरीबी से बाहर निकलकर 25 करोड़ का समूह ‘Neo Middle Class’ के रूप में देश के अंदर एक बहुत बड़ी भूमिका अदा कर रहा है।”

क्या है Neo Middle Class?

इस वर्ग को मोटे तौर पर समझें तो Neo Middle Class ऐसा सामाजिक-आर्थिक वर्ग है, जो हाल ही में गरीबी से ऊपर उठ पाया है लेकिन अभी स्थिर और सुरक्षित मध्यमवर्ग की स्थिति तक नहीं पहुँच सका है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले पीएम मोदी ने 2012 में किया था। उस समय वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे और 3 दिसंबर 20212 को पार्टी का चुनावी घोषणा पत्र जारी करते हुए उन्होंने कहा था कि पार्टी का संकल्प पत्र इस नए वर्ग को ध्यान में रखकर ही तैयार किया गया है।

इसके बाद अगस्त 2024 में उद्योग जगत का कार्यक्रम हो या आज का संबोधन, पीएम मोदी ने लगातार इस शब्द का इस्तेमाल किया है। जो दिखाता है कि यह नया वर्ग उनके विकसित भारत के सपने के लिए कितना मायने रखता है।

नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) की रिपोर्ट बताती है कि नियो मिडिल क्लास में वे लोग शामिल हैं जो गरीबी रेखा से थोड़ा ऊपर कमाते हैं लेकिन स्थापित मिडिल क्लास जैसी आर्थिक सुरक्षा से अभी तक वंचित हैं।

1990 में भारत में आर्थिक सुधार हुए और उसके बाद से इस क्लास में विस्तार हुआ है। मोदी सरकार आने के बाद इस वर्ग में लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। नीति आयोग के डिसक्सन पेपर ‘मल्‍टीडायमेंशनल पावर्टी इन इंडिया सिन्‍स 2005-06’ के मुताबिक, 2013-14 से 2022-23 के बीच 24.82 करोड़ लोग विविध प्रकार की (मल्‍टीडायमेंशनल) गरीबी से बाहर निकले हैं।

भारत का लक्ष्य 2030 से बहुआयामी गरीबी को आधा करना है और आने वाले दिनों में इस लक्ष्य के चलते इस क्लास के और बढ़ने की पूरी संभावना है।

मोदी सरकार में गरीबी कम करने को लेकर चली योजनाओं पर PIB ने लिखा है, “पोषण अभियान और एनीमिया मुक्त भारत जैसी उल्लेखनीय पहलों ने स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिससे वंचित रहने में काफी कमी आई है।”

इसमें प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मुफ्त खाद्यान्न वितरण, उज्ज्वला योजना के माध्यम से स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन वितरण, सौभाग्य के माध्यम से बिजली कवरेज में सुधार और स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन जैसे अभियानों का भी जिक्र किया गया है।

ग्रोथ स्टोरी में कितना अहम है Neo Middle Class?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक यानी आजादी के 100वें वर्ष में भारत को विकसित भारत बनाने का लक्ष्य रखा है। उनका मानना है कि यह Neo Middle Class इस सपने को पूरा करने में सबसे अहम भूमिका निभा सकता है।

ऐसा सोचना सही भी है, आसान भाषा में समझें तो, जब कोई परिवार गरीबी से निकलता है, उसकी कमाई बढ़ती है तो उसकी खपत की क्षमता भी बढ़ जाती है। यह खपत की बढ़ी हुई क्षमता बाजार को गति देने का काम करती है और नए रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

साथ ही, इस वर्ग के बढ़ने से सामाजिक स्थिरता भी बढ़ती है। गरीबी से बाहर निकले लोगों में नया आत्मविश्वास आता है और यही लोग फिर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करते हैं। इनकी आने वाली पीढ़ियों की भी बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं तक पहुँच बनती है। जिससे इस वर्ग में नया आत्मविश्वास पैदा होता है।

मोदी सरकार की योजनाएँ जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना और आयुष्मान भारत ने गरीबों को ऊपर उठाकर इस वर्ग तक पहुँचाने में मदद की है। आने वाले समय में यही वर्ग भारत को दुनिया के बड़े देशों से मुकाबले के लिए खड़ा करेगा।

विकसित देशों में मजबूत मिडिल क्लास ही रीढ़ बनता है। भारत में भी यह नियो मिडिल क्लास नई तकनीक को अपना रहा है, UPI का इस्तेमाल कर रहा है और स्टार्टअप इंडिया व मुद्रा लोन जैसी योजनाओं से कारोबार शुरू कर भारत को आर्थिक ताकत दे रहा है। यह वर्ग अगर आगे बढ़ता रहा तो भारत ना केवल घरेलू बाजार में बल्कि पूरी दुनिया में एक महत्वपूर्ण आर्थिक ताकत बन जाएगा।

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शिव
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7 वर्षों से खबरों की तलाश में भटकता पत्रकार...

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