‘अहिंसक हूँ, हिंदू विरोधी बयान के बाद मजबूर हो गया था’: CJI पर जूता फेंकने की कोशिश करने वाले वकील को नहीं है कोई पछतावा, बोले- जो कार्रवाई कर सकते हों वो करें

सुप्रीम कोर्ट के 71वर्षीय अधिवक्ता राकेश किशोर ने 6 अक्टूबर 2025 को एपेक्स कोर्ट में CJI गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की थी। अब उनका बयान सामने आया है। उनका कहना है कि जो भी उन्होंने किया वह गवई के बयान की प्रतिक्रिया थी क्यों कह उनकी बात से दुखी थे।

मीडिया से बात करते हुए राकेश किशोर ने कहा, राकेश किशोर ने मीडिया से कहा: “16 सितंबर को CJI की कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें एक प्राचीन विष्णु मूर्ति के सिर को दोबारा लगाए जाने की माँग की गई थी। CJI ने इसका मजाक उड़ाया और याचिकाकर्ता से कहा कि वह मूर्ति से प्रार्थना करे ताकि वह खुद ही अपना सिर वापस पा ले। मुझे CJI के इस बयान से बहुत ठेस पहुँची।”

राकेश ने कहा, “यह पहली बार नहीं था। जस्टिस गवई अन्य धर्मों के प्रति सहानुभूति दिखाते नजर आते हैं। उन्होंने हल्द्वानी में अतिक्रमण विरोधी अभियान को जारी रखने की अनुमति नहीं दी। उन्होंने नूपुर शर्मा को ‘हिंसा भड़काने की कोशिश’ के लिए दोषी ठहराया।”

राकेश ने आगे कहा, “लेकिन जब भी मामला हिंदुओं या सनातन धर्म के अधिकारों से जुड़ा होता है, न्यायपालिका हिंदुओं के लिए समान संवेदनशीलता दिखाने से कतराती है, चाहे वह जल्लीकट्टू हो या दही हांडी की ऊंचाई। यह उनका चलन बन गया है कि हिंदुओं को अपमानित किया जाए और उनकी धार्मिक भावनाओं की अनदेखी की जाए।”

राकेश ने अपनी बात जारी रखते हुए आगे कहा, “यह ठीक है कि मूर्ति के मामले में याचिकाकर्ता को राहत नहीं दी गई। लेकिन सवाल यह है कि न्यायाधीश ने उसकी आस्था का उपहास क्यों किया? मैं कोई हिंसक व्यक्ति नहीं हूँ। नशे में नहीं था, न किसी नशीले पदार्थ के प्रभाव में। मैं एक अहिंसक, उच्च शिक्षित व्यक्ति हूँ। मैंने जो किया, उसका मुझे कोई पछतावा नहीं है।”

राकेश का कहना है कि मैं किसी संगठन से नहीं जुड़ा हूँ। उन्हें यह सोचना चाहिए कि मेरे जैसे व्यक्ति को ऐसा कदम उठाने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ा। न्यायपालिका और कानून-प्रवर्तन एजेंसियाँ मेरे खिलाफ जो भी कार्रवाई उचित समझें, करने के लिए स्वतंत्र हैं।