बिहार विधानसभा चुनाव में NDA की जीत के बाद असम के मंत्री अशोक सिंघल ने एक्स पर एक पोस्ट किया। पोस्ट में खेत में लगी गोभियों की तस्वीर थी और लिखा था ‘बिहार ने गोभी की खेती को मंजूरी’ दी। इस पोस्ट पर कुछ इस्लामी कट्टरपंथी भड़क उठे और कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर की झोली में जाकर रोने लग गए।
Bihar approves Gobi farming ✅ pic.twitter.com/SubrTQ0Mu5
— Ashok Singhal (@TheAshokSinghal) November 14, 2025
इन कट्टरपंथियों ने मंत्री अशोक सिंघल की पोस्ट पर धड़ाधड़ कमेंट किए और शशि थरूर से हिंदू बुद्धिजीवियों को इकट्ठा कर पोस्ट पर ‘निंदा’ करने की भीख माँगने लगे। ऐसा इसीलिए क्योंकि गोभी की खेती से इस जुड़े पोस्ट को इस्लामी कट्टरपंथियों ने भागलपुर नरसंहार से जोड़ लिया और उम्मीद करने लगे कि शशि थरूर जैसे सेकुलर नेता अपना समूह लेकर इसका विरोध करेंगे।

लेकिन ऐसा हुआ नहीं। सैफ नाम के इस एक्स यूजर की पोस्ट पर कमेंट करते हुए शशि थरूर ने जो लिखा, उससे इस्लामी कट्टरपंथियों के अरमान तार-तार हो गए। शशि थरूर ने लिखा, “यह मेरा काम नहीं है कि मैं किसी समुदाय की ओर से साझा बयान जारी करूँ। लेकिन एक #InclusiveIndia में विश्वास रखने वाले और ‘एक प्राउड हिंदू’ होने के नाते मैं अपनी ओर से इतना जरूर कह सकता हूँ और उन अधिकतर हिंदुओं की ओर से भी जिन्हें मैं जानता हूँ- न हमारा धर्म और न ही हमारा राष्ट्रवाद ऐसे नरसंहारों की जरूरत बताता है, न उन्हें सही ठहराता है और न ही उनकी सराहना करता है।”
I’m not a community organiser, so joint statements are not my job. But as a passionate advocate of #InclusiveIndia and a proud Hindu, I can speak for myself, and for most Hindus I know, in saying that neither our faith nor our nationalism requires, justifies or condones such… https://t.co/Wd1tprR3r6
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) November 16, 2025
शशि थरूर ने खुद को ‘प्राउड हिंदू’ बता दिया। और उनके इतना कहते ही इस्लामी कट्टरपंथी को निराशा हाथ लगी। अब इनका प्रश्न था कि आखिर शशि थरूर सीधे-सीधे बेजीपी नेता का विरोध क्यों नहीं कर देते। एक यूजर ने लिखा, “लेकिन आपने कहा था आप निंदा करेंगे।”

वहीं एक इस्लामी कट्टरपंथी ने कहा, ” एक ‘गर्वित हिंदू’ धर्म आपको अपने धर्म के उन लोगों की निंदा करने के लिए नहीं कहता जो नरसंहार का जश्न मनाते हैं या क्या यह आपके इस महत्वपूर्ण प्रवास के समय में एक राजनीतिक जोखिम है?”

इस मामले से यह तो साफ हो गया कि शशि थरूर कॉन्ग्रेस की तरह मुस्लिम-समर्थक राजनीतिक नहीं करते हैं। शशि थरूर के विचार कॉन्ग्रेस से कही अलग है। शायद यही वजह है कि उनके कई बयानों को कॉन्ग्रेस ने खुद से अलग किया है। हालाँकि, अब तक कॉन्ग्रेस की इस मामले में कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं ‘सेकुलर’ शशि थरूर को अपना नेता समझने वाले इस्लामी कट्टरपंथी भी समझ ही चुके होंगे कि वे ‘प्राउड हिंदू’ हैं।

