पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट क्षेत्र की एक घटना ने प्रशासन और सियासत दोनों को हिला दिया है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान एक बांग्लादेशी युवक की धोखाधड़ी का बड़ा मामला पकड़ में आया है। महबूर दफादार नाम का यह युवक भारतीय नागरिकता पाने के लिए एक भारतीय बुजुर्ग जियाद अली दफादार को अपना अब्बू बताकर फर्जी वोटर कार्ड बनवा चुका था।
घुसपैठिए ने कैसे किया पूरा खेल?
शिकायत के अनुसार, महबूर ने जियाद के घर में घुसकर उनके दस्तावेजों की चोरी की और उनकी बीवी से मुलाकात के दौरान आधार व वोटर आईडी की प्रतियाँ हासिल कर लीं। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उसने वोटर ID कार्ड में अब्बू के नाम की जगह जियाद अली का नाम दर्ज करवा लिया।
हालाँकि, SIR प्रक्रिया के दौरान जियाद अली ने प्रशासन को लिखित शिकायत देकर स्पष्ट किया कि महबूर न उनका बेटा है और न ही भारतीय नागरिक। उन्होंने माँग की कि उसे तुरंत बांग्लादेश वापस भेजा जाए।
घटना के सामने आते ही राजनीतिक विवाद भी भड़क गया। राज्य सरकार की इस विफलता के कारण बंगाल में घुसपैठिए फर्जी दस्तावेजों के जरिए नागरिकता हासिल कर रहे हैं और यह ममता सरकार के वोट बैंक का हिस्सा है।
Explosive testimony from Basirhat exposes how West Bengal’s voter roll is being compromised through fake family linkages.
— Amit Malviya (@amitmalviya) November 28, 2025
This single testimony lays bare a systemic modus operandi long suspected across several border districts:
✔️ Fake parental linkages
✔️ Fraudulent Aadhaar and… https://t.co/rPscwR54jF
पार्टी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर SIR प्रक्रिया में घुसपैठियों द्वारा हेरफेर किए जाने का दावा किया। वहीं, TMC ने पलटवार करते हुए चुनाव आयोग और बीजेपी पर सुनियोजित वोट कटाई का आरोप लगाया।
डेरेक ओ ब्रायन के नेतृत्व में पार्टी के सांसदों ने चुनाव आयोग से मिलकर कहा कि अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। केंद्र सरकार और चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य सिर्फ फर्जी मतदाताओं की पहचान कर उन्हें सूची से बाहर करना है, जिनमें बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है।

