1 दिसंबर 2025 से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के बाहर देशवासियों को संबोधित किया है। उन्होंने कहा, “पहले ये शीतकालीन सत्र सिर्फ कोई रिवाज नहीं है। ये राष्ट्र को प्रगति की ओर तेज गति के जो प्रयास चल रहे हैं उसमें ऊर्जा भरने का काम यह शीतकालीन सत्र करेगा। भारत ने लोकतंत्र को जिया है, लोकतंत्र के उमंग और उत्साह को समय-समय पर ऐसे प्रकट किया है कि लोकतंत्र के प्रति विश्वास और मजबूत होता रहता है।”
पीएम मोदी ने बिहार चुनाव के नतीजों को लेकर भी बातचीत की है। उन्होंने कहा, “पिछले दिनों बिहार में जो चुनाव हुआ, उसमें भी मतदान की जो बढ़ोतरी हुई है वो लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। माताओं-बहनों की बढ़ती भागीदारी नई आशा और नया विश्वास पैदा करती है। लोकतंत्र के साथ-साथ अर्थतंत्र की मजबूती को दुनिया देख रही है। भारत ने सिद्ध कर दिया है कि ‘डेमोक्रेसी केन डिलीवर’। विकसित भारत के लक्ष्य की तरफ जाने में यह मजबूती हमें ताकत देती है।”
उन्होंने कहा, “यह सत्र संसद देश के लिए क्या सोच रही है, करना चाहती है, करने वाली है, इन मुद्दों पर केंद्रित होना चाहिए। विपक्ष अपना दायित्व निभाए और चर्चा में मजबूत मुद्दे उठाए। पराजय की निराशा से बाहर निकलकर आए, एक-दो दल पराजय भी नहीं पचा पाते हैं।” पीएम मोदी ने आगे कहा, “बिहार के नतीजों की पराजय ने उन्हें परेशान करके रखा है। शीतकालीन सत्र में पराजय की बौखलाहट को मैदान नहीं बनना चाहिए। यह सत्र विजय के अहंकार में भी नहीं बदलना चाहिए। जनता के दिए दायित्व को सँभालते हुए हम आगे के लिए सोचें, जो है उसे कैसे अच्छा कर सकते हैं। बुरे में सटीक टिप्पणी कैसे कर सकते हैं।”
प्रधानमंत्री ने युवा सांसदों को मिलने वाली कम समय पर भी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा, “मेरी एक चिंता रही है कि सदन में जो पहली बार चुनकर आए या जो छोटे आयु के हैं, वैसे सांसद दुखी हैं। उन्हें अपने सामर्थ्य का परिचय कराने का मौका नहीं मिल रहा है। अपने क्षेत्र की समस्याओं पर बात करने नहीं दिया जा रहा है। हमें नई पीढ़ी के नौजवान सांसदों को अवसर देना चाहिए, उनके अनुभवों को हमें लाभ लेना चाहिए।”
पीएम मोदी ने संसद में हंगामा करने वाले लोगों पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “ड्रामा करने के लिए जगह बहुत होती है, जिसको करना है करे। यहाँ ड्रामा नहीं डिलीवरी होनी चाहिए। नारेबाजी के लिए सारा देश खाली पड़ी है लेकिन यहाँ नीति पर बल देना चाहिए। राष्ट्र निर्माण के लिए सोच सकारात्मक होनी चाहिए।”

