कोलकाता एयरपोर्ट का सेकेंडरी रनवे एक बार फिर विवादों के घेरे में है। रनवे के पास मौजूद एक मस्जिद बाधा बन रही है और उसकी वजह से रनवे का सुरक्षित इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है, और यह मामला संसद तक पहुँच गया है। यह जानकारी नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री श्री मुरलीधर मोहोल ने संसद में दी है।
सांसद ने पूछे सुरक्षा और देरी के सवाल
सांसद शमिक भट्टाचार्य ने पूछा था कि क्या मस्जिद सचमुच सेकेंडरी रनवे के पूरे उपयोग में बाधा बन रही है? उन्होंने यह भी पूछा कि बार-बार सुरक्षा चिंताएँ उठने के बावजूद मस्जिद को हटाया या कहीं और क्यों नहीं शिफ्ट किया गया? इसके अलावा, उन्होंने नए टर्मिनल के लिए पुराने भवनों को तोड़ने में हो रही देरी का कारण और उसकी संशोधित समय-सीमा भी पूछी।

मंत्री का जवाब: रनवे की सीमा घटी, मंजूरी पर काम अटका
मंत्री मोहोल ने जवाब दिया कि मस्जिद सेकेंडरी रनवे के एप्रोच क्षेत्र में है और उसकी सीमा को 88 मीटर तक कम कर देती है। सेकेंडरी रनवे का इस्तेमाल तभी होता है जब मुख्य रनवे उपलब्ध न हो। उन्होंने मस्जिद को हटाने पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया।
वहीं, नए टर्मिनल के लिए पुराने भवनों को तोड़ने में देरी हो रही है क्योंकि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने ध्वस्तीकरण की अनुमति के लिए नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) से संपर्क किया है। नए टर्मिनल का काम शुरू होने की समय-सीमा BCAS की अंतिम मंजूरी पर निर्भर करेगी।

