लोकसभा में सोमवार (8 दिसंबर 2025) को वंदे मातरम पर हुई चर्चा के बाद जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने भड़काऊ बयान दिया है। उन्होंने वंदे मातरम गाने को लेकर कहा, “हम एक खुदा को मानने वाले हैं। अल्लाह के सिवा न किसी को पूजनीय मानते हैं और न किसी के आगे सजदा करते हैं।”
मदनी ने X पर एक लंबा पोस्ट लिखा है। उन्होंने लिखा, “हमें किसी के ‘वंदे मातरम्’ पढ़ने या गाने पर आपत्ति नहीं है लेकिन मुसलमान केवल एक अल्लाह की इबादत करता है और अपनी इबादत में अल्लाह के सिवा किसी दूसरे को शामिल नहीं कर सकता है।” मदनी ने कहा, “वंदे मातरम का अनुवाद शिर्क से संबंधित मान्यताओं पर आधारित है। इसके चार श्लोकों में देश को देवता मानकर ‘दुर्गा माता’ से तुलना की गई है और पूजा के शब्दों का प्रयोग हुआ है।”
हमें किसी के “वंदे मातरम्” पढ़ने या गाने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन मुसलमान केवल एक अल्लाह की इबादत करता है और अपनी इबादत में अल्लाह के सिवा किसी दूसरे को शामिल नहीं कर सकता। और “वंदे मातरम्” का अनुवाद शिर्क से संबंधित मान्यताओं पर आधारित है, इसके चार श्लोकों में देश को देवता…
— Arshad Madani (@ArshadMadani007) December 9, 2025
मदनी ने कहा, “यह किसी भी मुसलमान की धार्मिक आस्था के खिलाफ है। वतन से प्रेम करना अलग बात है, उसकी पूजा करना अलग बात है। हमें मर जाना स्वीकार है लेकिन शिर्क (खुदा के साथ किसी को शामिल करना) कभी स्वीकार नहीं!”

