लोकसभा में वंदे मातरम पर गरमा गरम बहस में प्रियंका गाँधी ने सदन में अपने संबोधन के दौरान कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू देश के लिए जिए और देश के लिए ही उन्होंने दम तोड़ा। प्रियंका गाँधी ने आगे दावा किया कि ‘जितने दिनों तक मोदी जी प्रधानमंत्री रहे, करीब उतने ही दिन नेहरू जेल में रहे।’ प्रियंका गाँधी ने अपने बयान में पंडित नेहरू के जेल में बिताए वर्षों को 12 साल बताया और इसे प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल के बराबर बताया।
हमारे राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों का चुनाव और निर्धारण करने में सबसे बड़ी भूमिका गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की थी। इसे संविधान सभा ने भी स्वीकार किया। इस पर सवाल उठाना न सिर्फ हमारे स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों और महापुरुषों का अपमान है, बल्कि समूची संविधान सभा का अपमान है।… pic.twitter.com/VL26xCATuo
— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) December 8, 2025
जवाहरलाल नेहरू का ‘जेल जीवन’
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पंडित जवाहरलाल नेहरू को ब्रिटिश सरकार द्वारा विभिन्न आंदोलनों और अभियानों में भाग लेने के लिए 1921 और 1945 के बीच कुल 9 बार गिरफ्तार किया गया था। इन सभी अवधियों को मिलाकर, नेहरू ने अपनी पूरी ज़िंदगी में जेल में लगभग 3259 दिन बिताए, जो 8 साल और 11 महीने के बराबर है। यह अवधि प्रियंका गाँधी द्वारा सदन में बताए गए 12 साल के आँकड़े से काफी कम है।
जवाहरलाल नेहरू की सबसे लंबी हिरासत नौवाँ कारावास था, जो भारत छोड़ो आंदोलन के बाद अहमदनगर के किले में थी। इसकी समय सीमा अगस्त 1942 से जून 1945 तक चली थी, यानी पूरे 1041 दिनों तक।
जवाहरलाल नेहरू के नौ कारावासों का विवरण
जवाहरलाल नेहरू को अपनी 9 जेल यात्राओं के दौरान अलग-अलग अवधि के लिए हिरासत में रखा गया था।
- पहला कारावास लखनऊ जिला जेल में 87 दिनों तक (6 दिसंबर 1921 से 3 मार्च 1922 तक): जवाहरलाल नेहरू करीब 6 महीने जेल में रहें और 100 रुपए का जुर्माना लगा। तकनीकी आधार पर अपनी आधी से भी कम सजा पूरी करने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।
- दूसरा कारावास इलाहाबाद जिला जेल में 10 दिन बिताए (11 मई 1922 से लेकर 20 मई 1922 तक) और लखनऊ जिला जेल में 256 दिन बताए ( 21 मई 1922 से लेकर 31 जनवरी 1923 तक)। इसमें जवाहरलाल नेहरू को विदेशी कपड़ों की बिक्री के विरोध में धरना आयोजित करके कपड़ा व्यापारियों को धमकाने का आरोप जेल की सजा हुई। 18 महीने का कारावास और 100 रुपए का जुर्माना लगा।
- तीसरा कारावास नाभा जेल में 12 दिन बिताए (22 सितंबर 1923 से लेकर 4 अक्टूबर 1923 तक): जेल जाने का कारण नाभा प्रिंसली स्टेट में महाराजा के पदच्युत होने के विरोध में चल रहे सिख आंदोलन में भाग लेना और नाभा छोड़ने के आदेश का उल्लंघन करना था। जवाहरलाल नेहरू को कुल छह महीने से अठारह महीने तक की सजा सुनाई गईं। नाभा जेल में जवाहरलाल नेहरू को छुड़ाने के लिए उनके पिता ने एड़ी-चोटी का जोड़ लगा दिया था, जो कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके थे। जवाहरलाल नेहरू को जेल से तभी छोड़ा गया था, जब उन्होंने नाभा प्रिंसली स्टेट के क्षेत्र में प्रवेश ना करने के लिए साइन करके दिया था। नाभा जेल में कीचड़ और कमरे के कम एरिया को देखकर ही नेहरू के पसीने छूट गए थे।
- चौथा कारावास नैनी सेंट्रल जेल, इलाहाबाद में 181 दिन बिताए (14 अप्रैल 1930 से 11 अक्टूबर 1930 तक)। जवाहरलाल नेहरू ने छह महीन जेल में रहे।
- पाँचवाँ कारावास नैनी सेंट्रल जेल, इलाहाबाद में 99 दिन बिताए (19 अक्टूबर 1930 से 26 जनवरी 1931 तक)। जेल जाने का कारण किसानों के बीच कर-मुक्ति अभियान का सक्रिय प्रचार और राजद्रोह का आरोप था। राजद्रोह के लिए 18 महीने और अन्य आरोपों के लिए छह-छह महीने की सजा काटी। कुल दो साल का कारावास।
- छठा कारावास- छठा कारावास में जवाहर लाल नेहरू 4 बार जेल गए और 614 दिन बिताए थे। इसमें पहला नैनी सेंट्रल जेल, इलाहाबाद में 42 दिन बिताए (26 दिसंबर 1931 से 5 फरवरी 1932 तक), दूसरा बरेली जिला जेल में 122 दिन बिताए (6 फरवरी 1932 से 6 जून 1932 तक), तीसरा देहरादून जेल में 443 दिन बिताए (6 जून 1932 से 23 अगस्त 1933 तक), चौथा नैनी सेंट्रल जेल, इलाहाबाद में 7 दिन बिताए (24 अगस्त 1933 से 30 अगस्त 1933 तक)। जेल जाने का कारण काश्तकारों के लिए लगान-मुक्त अभियान शुरू करना और इलाहाबाद की सीमा से बाहर जाने पर रोक लगाने वाले अध्यादेश का उल्लंघन था।
- सातवाँ कारावास- सातवें कारावास में जवाहरलाल नेहरू कुल 4 बार जेल गए और 558 दिन बिताए थे। पहला अलीपुर सेंट्रल जेल, कलकत्ता में 85 दिन बिताए (12 फरवरी 1934 से 7 मई 1934 तक), दूसरा देहरादून जेल में 96 दिन बिताए (8 मई 1934 से 11 अगस्त 1934 तक), तीसरा नैनी सेंट्रल जेल, इलाहाबाद में 66 दिन बिताए (23 अगस्त 1934 से 27 अगस्त 1934 तक), चौथा अल्मोड़ा जेल में 311 दिन बिताए (28 अक्तूबर 1934 से 3 सितंबर 1935 तक)। जेल जाने का कारण बंगाल में दमनकारी नीतियों के विरुद्ध जनसभाओं को संबोधित करना और राजद्रोह का आरोप था।
- आठवाँ कारावास- आठवें कारावास में भी जवाहरलाल नेहरू कुल 4 बार जेल गए थे और कुल 399 दिन बिताए थे। पहला गोरखपुर जेल में 17 दिन बिताए (31 अक्तूबर 1940 से 16 नवंबर 1940 तक), दूसरा देहरादून जेल में 104 दिन बिताए (17 नवंबर 1940 से 28 फरवरी 1941 तक), तीसरा लखनऊ जिला जेल में 49 दिन बिताए (1 मार्च 1941 से 18 अप्रैल 1941 तक), चौथा देहरादून जेल में 229 दिन बिताए (19 अप्रैल 1941 से 3 दिसंबर 1941 तक)।
- नौंवा कारावास- नौंवे कारावास में भी जवाहरलाल नेहरू कुल 3 बार जेल गए और 1041 दिन बिताए थे। पहला अहमदनगर किला जेल में 963 दिन बिताए (9 अगस्त 1942 से 28 मार्च 1945 तक), जो अबतक की सबसे लंबी अवधि थी। दूसरा बरेली सेंट्रल जेल में 72 दिन बिताए (30 मार्च 1945 से 9 जून 1945 तक), तीसरा अल्मोड़ा जेल में 6 दिन बिताए (10 जून 1945 से 15 जून 1945 तक)।
इस हिसाब से जवाहरलाल नेहरू के जेल की कुल अवधि 3259 दिन और कुल वर्ष लगभग 8 साल 11 महीने थी।
जेल में जवाहरलाल नेहरू का समय कैसे बीता
जवाहरलाल नेहरू ने कारावास के दौरान जेल की बुनियादी असुविधाएँ और कठोर व्यवस्था बहुत अखरती थीं। उनके तीसरे कारावास (नाभा जेल, 1923) के दौरान, उन्हें एक अस्वच्छ, कीचड़ वाली और नम कोठरी में रखा गया था जहाँ चूहे घूमते थे और उन्हें जमीन पर सोना पड़ता था। उनके साथी कैदी के सन्तानम ने लिखा है कि नेहरू इस व्यवस्था से इतने झुँझला गए थे कि अपनी निराशा निकालने के लिए वह रोज आधे घंटे कमरे में झाड़ू लगाने लगे थे।
जहाँ उन्हें 2 साल की सजा सुनाई गई थी, वहीं वह मात्र 12 दिनों में ही जेल से बाहर आ गए। यह जल्दी रिहाई उनके पिता मोतीलाल नेहरू के अथक प्रयासों का परिणाम थी। मोतीलाल नेहरू ने अपने बेटे को छुड़ाने के लिए पंजाब के अधिकारियों और यहाँ तक कि वायसराय से भी संपर्क किया था।
नेहरू को नाभा जेल से तब छोड़ा गया जब उन्होंने एक शर्त पर हस्ताक्षर किए कि वह फिर कभी नाभा प्रिंसली स्टेट के क्षेत्र में प्रवेश नहीं करेंगे। इस तरह, कठोर और अस्वच्छ जेल जीवन से परेशान नेहरू, बॉन्ड (भविष्य में नाभा में प्रवेश न करने का वादा) भरकर बहुत कम समय में बाहर आने में कामयाब रहे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यकाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार सँभाला था। 26 मई 2014 से लेकर 9 दिसंबर 2025 तक की अवधि को मिलाकर पीएम मोदी कुल 4214 दिन इस पद पर रह चुके हैं। समय के वर्षों में रूपांतरण के अनुसार यह अवधि 11 वर्ष, 6 महीने और 13 दिन होती है, और यह कार्यकाल अब भी लगातार जारी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने जुलाई 2025 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के 4077 दिनों के कार्यकाल को पीछे छोड़ते हुए भारत के दूसरे सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्री बनने का रिकॉर्ड बनाया। देश के इतिहास में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद संभालने का रिकॉर्ड पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाम है, जिन्होंने लगभग 17 वर्ष, यानी 6130 दिन, भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया था।
प्रियंका गाँधी के दावे की सत्यता
लोकसभा में बहस के दौरान प्रियंका गाँधी वाड्रा ने दावा किया कि जितने दिनों तक मोदी जी प्रधानमंत्री रहे, लगभग उतने ही दिन जवाहरलाल नेहरू जेल में रह। जवाहरलाल नेहरू की परनाति प्रियंका गाँधी का यह बयान तथ्यात्मक रूप से गलत है और इसका कोई आधार नहीं है। जवाहरलाल नेहरू ने लगभग 8 साल, 11 महीने जेल में बिताए, जबकि प्रधानमंत्री मोदी का मौजूदा कार्यकाल 11 साल, 6 महीने से अधिक है। दोनों अवधियों में लगभग ढाई साल (2.5 वर्ष) का स्पष्ट अंतर है।
प्रियंका गाँधी ने जवाहरलाल नेहरू के बढ़ा-चढ़ाकर बताए गए 12 साल के आँकड़े की तुलना पीएम मोदी के 11 साल, 6 महीने के कार्यकाल से की, जो वास्तविकता पर आधारित नहीं है। यह स्पष्ट है कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौजूदा कार्यकाल की तुलना में काफी कम समय जेल में बिताया था। सदन में दिया गया प्रियंका गाँधी वाड्रा का बयान, एक सार्वजनिक बहस के दौरान राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा था, जिसका तथ्यात्मक आधार कमजोर है।


