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क्रिसमस पर अमेरिका-ब्रिटेन में कटते हैं 32000000+ पेड़, गिफ्ट से लेकर खाना-पीना तक पर्यावरण को करता है नुकसान, इकोलॉजिकल ‘कीमत’ पर मनाया जा रहा दुनिया भर में त्यौहार

क्रिसमस सीधा तो नहीं लेकिन अप्रत्यक्ष तौर पर वनों के कटाव के लिए जिम्मेदार है। दरअसल क्रिसमस पर नेचुरल क्रिसमस ट्री की डिमांड होती है। पेपर आधारित सामान, फर्नीचर, गिफ्ट और सजावट की चीजें काफी बिकती हैं। अमेरिकी फर्म ब्यूरो के मुताबिक, 25 मिलियन नेचुरल क्रिसमस ट्री को अमेरिका में क्रिसमस के मौके पर काटा और बेचा जाता है।

क्रिसमस ईसाईयों का अहम त्यौहार है, जो जीसस क्राइस्ट के जन्म की याद में मनाया जाता है। दुनिया भर में फैले ईसाइयत को मानने वाले इस त्योहार को पूरे जोर-शोर से मनाते हैं। जब पतझड़ की जगह सर्दी आ जाती है और जमीन बर्फ से ढक जाता है, तो दुनियाभर में क्रिसमस का माहौल बनने लगता है।

इस दौरान शॉपिंग, घूमना-फिरना, खाना-पीना और सजावट पर होने वाले खर्च में बढ़ोतरी होती है। इसका पर्यावरण पर असर पड़ता है।

इस लेख में क्रिसमस पर होने वाले पर्यावरण के नुकसान का आंकलन किया गया है। साथ ही जंगलों की कटाई, कचरे का पहाड़ और खाने पीने की बर्बादी पर चर्चा की गई है। यहाँ क्रिसमस के जश्न पर सवाल उठाने के बजाय, फोकस इस बात पर है कि क्रिसमस से जुड़ी कंजम्पशन-ड्रिवन प्रैक्टिस कैसे इकोसिस्टम को बर्बाद कर रही हैं।

क्रिसमस और पेड़ों की कटाई का दबाव

क्रिसमस के जिन असर पर कम बात होती है, उनमें से एक है पेड़ों की कटाई में इसका अप्रत्यक्ष योगदान। त्योहारों के मौसम में नैचुरल क्रिसमस ट्री, पेपर-बेस्ड प्रोडक्ट, गिफ्ट पैकेजिंग, फर्नीचर और सजावटी चीज़ों की बढ़ती माँग के साथ, पेड़ों को सबसे ज़्यादा नुकसान होता है। जब पेड़ बागानों से लिए जाते हैं, तब भी इन कामों के लिए जमीन, पानी, खाद और ज्यादा एनर्जी वाले ट्रांसपोर्ट की जरूरत होती है। पेड़ों के अलावा, कार्डबोर्ड, पेपर बैग और रैपिंग मटीरियल की बढ़ती माँग से दुनिया भर में जंगल के संसाधनों पर दबाव पड़ता है।

अमेरिकन फार्म ब्यूरो के अनुसार, यूनाइटेड स्टेट्स में हर साल लगभग 25 मिलियन नैचुरल क्रिसमस ट्री काटे और बेचे जाते हैं। इसके अलावा, UK सरकार के अनुसार, हर साल लगभग 6-8 मिलियन क्रिसमस ट्री काटे और बेचे जाते हैं।

अकेले नॉर्थ अमेरिका और यूरोप में, क्रिसमस मनाने के लिए हर साल लाखों पेड़ काटे जाते हैं। वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF) ने अपनी लिविंग फॉरेस्ट्स रिपोर्ट में, बढ़ती कंज्यूमर डिमांड और लाइफस्टाइल को दुनिया भर में जंगलों की कटाई के लिए जिम्मेदार बताया है।

कचरा बनना और प्लास्टिक प्रदूषण

क्रिसमस के साथ सॉलिड वेस्ट भी तेज़ी से बढ़ता है। त्योहारों के समय डिस्पोजेबल डेकोरेशन, बहुत ज़्यादा पैकेजिंग और रैपिंग पेपर की वजह से घरेलू और कमर्शियल कचरा काफी बढ़ जाता है। यूनाइटेड किंगडम में एनवायरनमेंटल ऑडिट के मुताबिक, हर क्रिसमस पर लगभग 227,000 मील रैपिंग पेपर इस्तेमाल होता है, जो धरती को लगभग 9 बार लपेटने के लिए काफी है, और इसमें से ज़्यादातर नॉन-रीसायकल होता है।

त्योहारों में रैप करने में इस्तेमाल सामान नॉन-रीसायकल होता है क्योंकि वे लैमिनेटेड, डाई किए हुए या प्लास्टिक और ग्लिटर से कोट किए हुए होते हैं। इन्हें फेंका या जलाया जाता है, तो दोनों से ही प्रदूषण होता है और ग्रीनहाउस गैस निकलते हैं।

प्लास्टिक की समस्या

क्रिसमस पर गिफ्ट देना भी कचरे को बढ़ाता है। UK सरकार और वेस्ट- मैनेजमेंट डेटा से पता चलता है कि त्योहारों के समय साल के बाकी समय की तुलना में लगभग 30% ज़्यादा कचरा पैदा होता है, जिसमें से ज़्यादातर पैकेजिंग और कम समय तक चलने वाले कंज्यूमर गुड्स से जुड़ा होता है।

डिपार्टमेंट फॉर एनवायरनमेंट, फूड एंड रूरल अफेयर्स के अनुसार, UK में £40 मिलियन से ज़्यादा के फालतू क्रिसमस गिफ्ट फेंक दिए जाते हैं, जिनमें से कई ट्रेड होने के कुछ ही महीनों बाद लैंडफिल में चले जाते हैं। पैकेजिंग इस समस्या को और बढ़ा देती है।

WRAP के डेटा के अनुसार, प्लास्टिक कोटिंग, ग्लिटर, रिबन और मिले-जुले मटीरियल से होने वाले कंटैमिनेशन के कारण हर साल लगभग 114,000 टन रीसायकल पैकेजिंग गलत तरीके से फेंक दी जाती है।

कंज्यूमर सर्वे के अनुसार, सोशल गिफ्ट देना खास तौर पर बेकार है। काम करने वालों और जान-पहचान वालों से मिले गिफ्ट को नापसंद किए जाने की संभावना ज्यादा होती है। ये इस्तेमाल भी नहीं किए जाते और पर्यावरण को भी अंत में नुकसान पहुँचाते हैं।

पेड़ों का कटना और सड़ना दोनों पर्यावरण के लिए नुकसानदेह

क्रिसमस का पर्यावरण पर असर दिखने वाले कचरे से कहीं ज्यादा है। पेडों को काट कर उन्हें बर्बाद होने के लिए छोड़ दिया जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, UK में हर साल लगभग 7-8 मिलियन असली क्रिसमस ट्री बर्बाद होते हैं, जिन्हें फेंक दिया जाता है, जिससे लगभग 12000 टन ग्रीन वेस्ट पैदा होता है।

मीथेन (CH₄) एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है, जो कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) की तुलना में कम समय में कहीं अधिक ग्लोबल वार्मिंग की क्षमता रखती है। लैंडफिल में जैविक सामग्री, जैसे कि पेड़ जब सड़ती है, तो बड़ी मात्रा में मीथेन उत्पन्न होती है, जिससे हर साल हज़ारों टन एमिशन हो सकता है।

खाने की बर्बादी इस समस्या को और बढ़ा देती है। WRAP के मुताबिक, अनुमान है कि क्रिसमस के दौरान UK में 200,000 टन से ज्यादा खाना बर्बाद हो जाता है। यह बर्बादी न सिर्फ खाने की होती है, बल्कि प्रोडक्शन में इस्तेमाल होने वाले संसाधनों की भी है। जब बचे खाने को लैंडफिल में फेंका जाता है, तो यह मीथेन गैस छोड़ती है।इसका जलवायु पर असर पड़ता है।

कुल मिलाकर जंगलों की कटाई, बायोडायवर्सिटी के नुकसान और क्लाइमेट में अस्थिरता पैदा करती है। क्रिसमस जैसे त्यौहारों में उत्सव कई दिनों तक चलते हैं। इस दौरान सामानों का इस्तेमाल ज्यादा होती है और बर्बादी भी ज्यादा होती है। हर साल इनमें बढ़ोतरी हो रही है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुँच रहा है।

पर्यावरण और उपभोक्तावाद में संतुलन जरूरी

क्रिसमस से जुड़ी पर्यावरण की चिंता का सेलिब्रेशन या सांस्कृतिक परंपरा से कोई लेना देना नहीं है। बल्कि ये उपभोक्तावाद को उजागर करता है। पर्यावरण की कीमत पर कई ग्लोबल त्यौहार मनाए जा रहे हैं। रिसर्च से पता चलता है कि जंगल, जलवायु परिवर्तन और इकोसिस्टम को दुरुस्त रखने के लिए हाई मानदंड बनाने की जरूरत है। दुनिया के चकाचौध में ये काफी पीछे छूटते जा रहे हैं। कम कचरा, खपत की जरूरत और पर्यावरण के प्रति जागरूकता पर फोकस करने वाले उत्सवों पर बल दिया जाना चाहिए ताकि संतुलन बना रहे।

(ये लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

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Dhruv Mishra
Dhruv Mishra
Dhruv Mishra is a researcher and writer specializing in Indian politics and policy analysis. With a background in data-driven storytelling, he explores elections, governance, and India’s role in global affairs.

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